कुसमुंडा पेट्रोल पंप: नोटिस जारी, अब आगे क्या? SECL प्रबंधन बताए कार्रवाई की पूरी स्थिति

13 अक्टूबर की जांच रिपोर्ट में लीज अवधि समाप्त होने का उल्लेख; GM/CGM से निदेशक कार्मिक और CMD तक सवाल—सार्वजनिक संपत्ति के मामले में अगला कदम क्या होगा?
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कुसमुंडा क्षेत्र के कोरबा सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप का मामला अब SECL की प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी है। सामने आई निरीक्षण रिपोर्ट में लीज अवधि समाप्त होने का उल्लेख है और संपदा अधिकारी का कारण बताओ नोटिस भी उपलब्ध है। अब प्रबंधन स्पष्ट करे—प्रकरण किस चरण में है, संबंधित पक्ष से कौन-से दस्तावेज मांगे गए हैं और निर्णय किस प्रक्रिया से होगा?
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रह सकती। उसके बाद की प्रक्रिया और निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
जांच रिपोर्ट में क्या लिखा है?
उपलब्ध हस्तलिखित जांच रिपोर्ट, दिनांक 13 अक्टूबर 2026, में वैशाली नगर मेन रोड स्थित पेट्रोल पंप के निरीक्षण का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार वहां “Korba Service Station” के नाम से पेट्रोल पंप संचालित पाया गया और उसकी लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। रिपोर्ट में आगे विभागीय कार्रवाई करने का उल्लेख भी दिखाई देता है। यह निरीक्षण दल की दर्ज टिप्पणी है। अंतिम कानूनी स्थिति समझने के लिए मूल लीज, उसके संभावित नवीनीकरण, संबंधित पक्ष के जवाब और लागू न्यायालयीन आदेशों का मिलान आवश्यक है।
लेकिन जांच रिपोर्ट में लीज समाप्त होने की टिप्पणी दर्ज होने के बाद प्रबंधन से अगली प्रक्रिया का विवरण मांगना बिल्कुल उचित है।
नोटिस में सुनवाई की तारीख बाकी—फिर भी तैयारी का हिसाब जरूरी
संपदा अधिकारी, SECL कुसमुंडा क्षेत्र के उपलब्ध नोटिस पर क्रमांक 708 और तारीख 13 अक्टूबर 2026 दिखाई देती है। इसमें लोक परिसर से बेदखली संबंधी अधिनियम की धारा 4 के तहत कारण बताने का अवसर दिया गया है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध प्रति में जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख 10 नवंबर 2026 पढ़ी जा रही है। आज 24 अक्टूबर तक वह तारीख आई नहीं है। इसलिए अभी यह घोषित करना कि अंतिम कार्रवाई रोक दी गई है या नोटिस केवल डराने के लिए दिया गया था, दस्तावेजों से सिद्ध नहीं होता।
फिर भी SECL बताए—क्या नोटिस की विधिवत तामील हुई? क्या जवाब प्राप्त हुआ? क्या भूमि और लीज संबंधी अभिलेख पूरे हैं? क्या किसी न्यायालयीन आदेश का प्रभाव है? प्रक्रिया का पालन जरूरी है; उसकी स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी है।
GM/CGM, DP और CMD से सीधे सवाल
कुसमुंडा क्षेत्र के सक्षम प्रबंधन, SECL के निदेशक कार्मिक और CMD के स्तर पर अपने-अपने अधिकारक्षेत्र की जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए:
– लीज समाप्त होने संबंधी निरीक्षण निष्कर्ष पर अब तक कौन-से कदम उठाए गए?
– वर्तमान कब्जे और संचालन का दावा किस व्यक्ति या संस्था ने, किन दस्तावेजों के आधार पर किया है?
– क्या लीज, कब्जे, डीलरशिप या संचालन में किसी परिवर्तन की सक्षम अनुमति उपलब्ध है?
– क्या कोई न्यायालयीन रोक लागू है? यदि है तो उसका वर्तमान आदेश और दायरा क्या है?
– सुनवाई के बाद निर्णय के लिए सक्षम अधिकारी कौन है और लागू प्रक्रिया क्या होगी?
इन सवालों का जवाब पदनामों की आड़ में नहीं टाला जाना चाहिए। सरकारी कंपनी की भूमि का मामला है—रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए। तीवरता समूह और अशोक कुमार धुल्यानी की भूमिका पर क्या पुष्ट है? तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड की वेबसाइट अशोक कुमार धुल्यानी को संस्थापक एवं निदेशक बताती है। यह कंपनी में उनकी भूमिका की जानकारी है। लेकिन उपलब्ध निरीक्षण रिपोर्ट और नोटिस से यह पुष्टि नहीं होती कि संबंधित पेट्रोल पंप का वर्तमान मालिक, डीलर या संचालक तीवरता समूह अथवा अशोक कुमार धुल्यानी हैं। इसलिए उन्हें इस पंप का स्थापित मालिक लिखना अभी उचित नहीं होगा।
पंप से तीवरता समूह के कथित संबंध की पुष्टि के लिए संबंधित तेल कंपनी के डीलरशिप रिकॉर्ड, किसी स्वीकृत पुनर्गठन या हस्तांतरण, भूमि उपयोग की अनुमति और वास्तविक संचालन के दस्तावेज आवश्यक हैं। यदि ऐसा संबंध है तो प्रबंधन और संबंधित कारोबारी पक्ष उसका आधार स्पष्ट करें।
प्रभाव या ‘सेटिंग’ का सवाल—सबूत कहां हैं?
किसी कारोबारी के प्रभाव में कार्रवाई होने अथवा रुकने का आरोप गंभीर है। उपलब्ध प्रतियां किसी अधिकारी की मिलीभगत या ‘सेटिंग’ साबित नहीं करतीं। हां, फाइल में किसने क्या निर्णय लिया, किस तारीख को लिया और किस आधार पर लिया—यह सामने आने पर जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। दस्तावेजों में अनावश्यक देरी, विरोधाभास या नियमों से हटकर निर्णय मिले तो उन पर कठोर सवाल उठेंगे।
जनता देख रही है—नोटिस के बाद निर्णय भी सामने आए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का स्पष्ट संपादकीय आग्रह है कि SECL इस मामले की प्रक्रिया, वर्तमान न्यायालयीन स्थिति और सुनवाई के बाद पारित निर्णय का तथ्यात्मक विवरण सार्वजनिक करे। लीज समाप्त है तो सक्षम प्रक्रिया के अनुसार निर्णय हो। वैध अधिकार का दावा है तो उसकी जांच हो। और किसी स्तर पर लापरवाही मिले तो जिम्मेदारी तय हो।
जनता जनार्दन देख रही है, महोदय—नोटिस की गंभीरता उसके बाद की निष्पक्ष प्रक्रिया और ठोस निर्णय से साबित होगी। आधार: उपलब्ध कराई गई 13 अक्टूबर 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट और नोटिस की चित्र प्रतियां। मूल प्रतियों की प्रामाणिकता, अस्पष्ट हस्तलिखित विवरण, वर्तमान न्यायालयीन स्थिति तथा SECL और संबंधित कारोबारी पक्ष का जवाब अभी सत्यापनाधीन है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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