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ग्राम यात्रा की पड़ताल ने उठाए बड़े सवाल: पौधा खरीदी पर शासन तक शिकायत, अब आयुक्त बताएं—GeM प्रक्रिया से पहले खेप कैसे पहुंची?

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नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद संभागायुक्त कार्यालय से भी कार्रवाई के निर्देश; “Umesh Sir”, 650 पौधे और 3,290 पौधों की दो बोलियों का दस्तावेजी मिलान जरूरी

 

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कोरबा।   ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। एक वाहन, पौधों की एक खेप और पर्ची पर दर्ज “Umesh Sir” का उल्लेख—ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने इन बिंदुओं को मामूली आपूर्ति का विवरण मानकर नहीं छोड़ा। इन्हें नगर निगम कोरबा की GeM खरीदी की प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए, विषय प्रमुखता से प्रकाशित किया और लिखित शिकायत के जरिए जांच की मांग पहुंचाई।

अब मामला निगम की फाइलों तक सीमित नहीं है। पूर्व में नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देशों का विषय समाचारों में सामने आने के बाद उपलब्ध संभागायुक्त कार्यालय का ज्ञापन भी शिकायत को कलेक्टर कोरबा के पास कार्रवाई के लिए भेजे जाने की पुष्टि करता है।  यह ग्राम यात्रा की दस्तावेजी पड़ताल को प्रशासनिक स्तर पर मिला महत्वपूर्ण संज्ञान है। अब नगर निगम आयुक्त से अपेक्षा है कि खरीदी का पूरा घटनाक्रम मूल अभिलेखों के साथ स्पष्ट करें।

सबसे बड़ा सवाल: आपूर्ति पहले पहुंची तो आदेश किसने दिया?

 

मामला नगर निगम द्वारा जारी कुल 3,290 पौधों की दो GeM बोलियों से जुड़ा है। संभागायुक्त कार्यालय के ज्ञापन में दर्ज शिकायत के अनुसार, बोली प्रक्रिया पूरी होने से पहले “Umesh Sir” के नाम से 650 पौधों की खेप, वाहन क्रमांक CG04 RB 0409 से पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर पहुंचाई गई थी।

इसी आरोप का दस्तावेजी परीक्षण पूरे मामले की धुरी है।

 

क्या यह खेप संबंधित GeM खरीदी की थी? यदि हां, तो प्रक्रिया पूरी होने से पहले आपूर्ति का आधार क्या था? यदि नहीं, तो किस दूसरे स्वीकृत कार्य के लिए पौधे आए थे?  दोनों स्थितियों में उत्तर उपलब्ध होना चाहिए। अलग कार्य था तो उसका आदेश और अलग हिसाब सामने आए। संबंधित खरीदी थी तो उसकी पूरी समयरेखा स्पष्ट की जाए।

सवाल जितना सीधा है, जवाब भी उतना ही स्पष्ट होना चाहिए।

 

ग्राम यात्रा ने केवल सवाल नहीं उठाए—जांच का दस्तावेजी रास्ता भी बताया

इस पड़ताल की अहमियत केवल आरोप लगाने में नहीं है। शिकायत में उन रिकॉर्ड की पहचान भी की गई है जिनसे घटनाक्रम की पुष्टि या खंडन हो सकता है।   CCTV, गेट रजिस्टर, GeM ऑडिट ट्रेल, GST चालान, ई-वे बिल, मालभाड़े का भुगतान और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड—इनका मिलान बता सकता है कि पौधे कब मंगाए गए, किसने प्राप्त किए और किस स्वीकृत काम में दर्ज हुए।  ग्राम यात्रा की मेहनत का जवाब सामान्य सफाई से नहीं मिलेगा। जिन दस्तावेजों से सवाल उठे हैं, उन्हीं दस्तावेजों से उनका निस्तारण होना चाहिए।

संभागायुक्त कार्यालय से कलेक्टर को निर्देश—अब कार्रवाई का परिणाम सामने आए

आयुक्त कार्यालय, बिलासपुर संभाग के ज्ञापन क्रमांक GENS/60761/शिकायत/2026 में शिकायत आवक क्रमांक 2893, दिनांक 21 सितंबर 2026 के साथ दर्ज है।   ज्ञापन पर उपायुक्त (विकास), बिलासपुर संभाग हरिशंकर चौहान के 28 सितंबर 2026 के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। इसमें कलेक्टर कोरबा को शिकायत पर नियमानुसार समुचित कार्रवाई करने और कृत कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।   यह निर्देश अंतिम दोष निर्धारण नहीं है, लेकिन शिकायत पर स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय की जरूरत सामने रखता है।

अब प्रश्न केवल निगम से नहीं, शिकायत के निस्तारण के लिए जिम्मेदार कार्यालयों से भी है—रिकॉर्ड मंगाए गए या नहीं? परीक्षण किसे सौंपा गया? परिणाम क्या निकला?

आयुक्त महोदय, “Umesh Sir” का उल्लेख किस भूमिका में है?

 

किसी पर्ची पर नाम होना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन सरकारी आपूर्ति से जुड़े मामले में उसका संदर्भ स्पष्ट करना जरूरी है।   “Umesh Sir” किस व्यक्ति के लिए लिखा गया? आपूर्ति में उसकी क्या भूमिका थी? पौधे मंगाने और प्राप्त करने का अधिकृत आदेश किसके पास था?

सरकारी खरीदी में परिचय से अधिक महत्वपूर्ण प्राधिकृत आदेश होता है। इसलिए संबंधित नाम, आपूर्ति और निगम की स्वीकृति का संबंध दस्तावेजों से सामने आना चाहिए।

केवल पौधे गिनना जांच नहीं होगा

 

650 पौधे आए या नहीं—यह जांच का एक हिस्सा है। उससे आगे यह देखना होगा कि उनकी प्रजातियां क्या थीं, किस दर पर आपूर्ति हुई, गुणवत्ता किसने सत्यापित की और भुगतान का आधार क्या बना।   जांच का दायरा मांग तैयार होने से लेकर माल प्राप्ति और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों से विचलन मिलता है, तो निर्णय लेने, स्वीकृति देने और सत्यापन करने वालों की भूमिका भी स्पष्ट की जाए।  किसी को पद के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उसी तरह किसी पद को जांच से छूट का आधार भी नहीं बनाया जा सकता।

विभागीय निर्देशों के बाद भी जवाब अधूरा क्यों रहे?

 

नगरीय प्रशासन विभाग और अब संभागायुक्त कार्यालय के स्तर पर विषय पहुंचने के बाद मामले को केवल स्थानीय शिकायत बताकर किनारे करने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।  ऊपर से आए निर्देशों का वास्तविक सम्मान निष्पक्ष परीक्षण और कारण सहित निर्णय से होगा। एक और अग्रेषण पत्र जारी कर देना जनता के सवालों का उत्तर नहीं है।

शिकायत में दोनों बोलियों, ठेका दिए जाने और भुगतान पर रोक तथा प्रथमदृष्टया अनियमितता मिलने पर EOW/ACB कार्रवाई की मांग की गई है। उपलब्ध संभागायुक्त ज्ञापन स्वयं रोक लगाने या अपराध दर्ज करने का आदेश नहीं है। अंतिम जांच निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष अभी सामने आना बाकी है।

ग्राम यात्रा का सवाल अब भी वहीं है—पूरा हिसाब कब?

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने विषय उठाया, शिकायत पहुंचाई और रिकॉर्ड के आधार पर जांच की मांग की। अब जिम्मेदार प्रशासन की बारी है।   नगर निगम आयुक्त खरीदी की समयरेखा, अधिकृत आदेश, प्राप्ति और भुगतान का हिसाब सामने रखें। कलेक्टर कार्यालय शिकायत पर हुई कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराए।

पौधे किस काम के लिए आए थे—यह रिकॉर्ड बताएगा। प्रक्रिया सही थी या नहीं—यह निष्पक्ष परीक्षण तय करेगा। लेकिन सार्वजनिक धन की खरीदी पर उठे प्रश्नों को बिना स्पष्ट उत्तर के छोड़ देना स्वीकार्य निस्तारण नहीं हो सकता।

आयुक्त महोदय, अब जवाब दीजिए—650 पौधों की खेप और 3,290 पौधों की बोलियों के बीच वास्तविक संबंध क्या है?

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