ग्राम यात्रा की खबरों और शिकायत के बाद जांच की दिशा में कदम: बालको के खिलाफ 24 पुलिस क्वार्टर तोड़ने के मामले में सात दिन में रिपोर्ट तलब

प्रमुख अभियंता कार्यालय ने मुख्य अभियंता, बिलासपुर परिक्षेत्र को दिए परीक्षण के निर्देश; वर्ष 2023 में पीडब्ल्यूडी ने बिना अनुमति सरकारी आवास तोड़ने की बात लिखकर पुलिस से मांगी थी आपराधिक कार्रवाई
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। सरकारी धन से पुलिस परिवारों के लिए बने 24 आवास आखिर किसकी अनुमति से तोड़े गए? लोक निर्माण विभाग ने जब वर्ष 2023 में ही लिख दिया था कि बालको प्रबंधन ने विभाग और पुलिस प्रशासन की अनुमति लिए बिना आवासीय परिसर तोड़ा है, तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? अब यही सवाल शासन के स्तर से दोबारा संबंधित अधिकारियों के सामने पहुंच गया है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क द्वारा मामला उठाए जाने और संपादक अब्दुल सुल्तान की लिखित शिकायत के बाद। प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग, नवा रायपुर के कार्यालय ने शिकायत का शीघ्र परीक्षण कर सात दिन के भीतर तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन मांगा है।
यह जांच की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। अब जिम्मेदार कार्यालयों को अभिलेखों के आधार पर बताना होगा कि सरकारी आवास कैसे टूटे और कार्रवाई कहां तक पहुंची।
शासन से पहुंची शिकायत, प्रमुख अभियंता कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट
उपलब्ध पत्र के अनुसार, प्रमुख अभियंता कार्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, बिलासपुर परिक्षेत्र को निर्देश जारी किए हैं। पत्र का विषय है—बालको प्रबंधन द्वारा पुलिस विभाग के लिए निर्मित 24 फैमिली क्वार्टर नष्ट करने का मामला।
इसमें लोक निर्माण विभाग मंत्रालय के 29 सितंबर 2026 के पत्र क्रमांक ESTB-35892/2026-PWD का संदर्भ है। साथ ही स्पष्ट उल्लेख है कि अब्दुल सुल्तान का 14 सितंबर 2026 का पुलिस अधीक्षक, कोरबा को संबोधित शिकायत पत्र शासन से आवश्यक कार्रवाई के लिए प्राप्त हुआ है।
इसके बाद शिकायत प्रकरण का शीघ्र परीक्षण कर सात दिवस के भीतर तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। पत्र की प्रतिलिपि संबंधित विभागीय कार्यालयों और शिकायतकर्ता को भी भेजी गई है।
सवाल अब केवल शिकायत पहुंचने का नहीं है—निर्देश के बाद जांच में क्या निकला, इसका जवाब सामने आना चाहिए।
पीडब्ल्यूडी का 2023 का पत्र: अनुमति नहीं ली गई, आपराधिक कार्रवाई करें
इस प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, कोरबा संभाग का 14 मार्च 2023 का पत्र क्रमांक 1841/शिल्प/2023 है, जो पुलिस अधीक्षक, कोरबा को संबोधित है।
पत्र में विभाग ने लिखा था कि बालको थाना के पीछे वर्ष 1991–92 में लोक निर्माण विभाग ने 24 आई-टाइप क्वार्टरों का निर्माण कराया था। इनमें 12 भूतल और 12 प्रथम तल पर थे। विभाग के अनुसार, बालको प्रबंधन ने आवासीय परिसर पूर्णतः तोड़ दिया और इसके लिए लोक निर्माण विभाग अथवा पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई।
पीडब्ल्यूडी ने इसे सरकारी संपत्ति नष्ट करने का मामला तथा प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता बताते हुए बालको प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।
जब सरकारी विभाग ने स्वयं कार्रवाई मांगी थी, तो उस पत्र पर आगे क्या हुआ? यही इस मामले का सबसे सीधा और सबसे असहज सवाल है।
₹13.90 लाख का ऐतिहासिक खर्च—आज के नुकसान का हिसाब कौन देगा?
वर्ष 2023 के विभागीय पत्र में 24 आवासों के निर्माण पर ₹13,90,354 का कुल व्यय दर्ज है। लगभग 831.60 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्रफल का भी उल्लेख किया गया है।
यह राशि वर्ष 1991–92 का निर्माण व्यय है। इसे आज के सरकारी नुकसान का अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा। शिकायत में भवनों की पुनर्निर्माण लागत, भूमि संबंधी अभिलेख, मलबे और अन्य संभावित नुकसान का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
सरकारी संपत्ति का हिसाब केवल पुरानी लागत लिख देने से पूरा नहीं होगा। पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि संपत्ति किस अधिकार से तोड़ी गई और नुकसान का मूल्यांकन हुआ भी या नहीं।
2023 से 2026: पत्र पहुंचा, कार्रवाई कहां पहुंची?
अब्दुल सुल्तान की शिकायत में पुराने पत्र पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा गया है। प्रमुख सवाल हैं—
– पीडब्ल्यूडी का पत्र मिलने के बाद उसे किस अधिकारी को सौंपा गया?
– क्या जांच अधिकारी नियुक्त हुआ और स्थल निरीक्षण कराया गया?
– क्या बालको प्रबंधन से अनुमति तथा ध्वस्तीकरण के दस्तावेज मांगे गए?
– क्या एफआईआर दर्ज हुई? यदि नहीं, तो उसके कारण क्या थे?
– क्या कार्रवाई की जानकारी पीडब्ल्यूडी को दी गई?
फाइल किस मेज से किस मेज तक गई, इसका जवाब पर्याप्त नहीं होगा; सरकारी संपत्ति पर हुई कार्रवाई का परिणाम बताना होगा।
जांच निर्णय लेने वालों तक पहुंचे
शिकायत में मांग की गई है कि जांच केवल मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों या ठेकेदार तक सीमित न रहे। ध्वस्तीकरण का निर्णय, आदेश, स्वीकृति, कार्यादेश और भुगतान करने वालों की वास्तविक भूमिका भी जांची जाए।
इसके लिए निर्माण एवं हस्तांतरण रिकॉर्ड, संपत्ति रजिस्टर, भवनों को अनुपयोगी घोषित करने के दस्तावेज, ध्वस्तीकरण की अनुमति, ठेकेदार के अभिलेख, मलबा निस्तारण और संबंधित परियोजना नक्शे सुरक्षित करने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी अधिकारी को केवल पद के आधार पर आरोपी बनाने के बजाय उसकी भूमिका साक्ष्यों से निर्धारित हो।
अब सात दिन की रिपोर्ट का हिसाब भी सामने आए
प्रमुख अभियंता कार्यालय का पत्र शिकायत के परीक्षण और तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट का निर्देश है। यह अपने आप में एफआईआर दर्ज होने अथवा किसी की आपराधिक जिम्मेदारी तय होने की पुष्टि नहीं करता। उपलब्ध दस्तावेजों में अंतिम जांच प्रतिवेदन और बालको प्रबंधन का पक्ष शामिल नहीं है।
फिर भी, ग्राम यात्रा की खबरों और लिखित शिकायत के बाद मामला शासन से विभागीय परीक्षण तक पहुंचना महत्वपूर्ण है। अब अगला प्रश्न है—सात दिन में मांगी गई रिपोर्ट प्रस्तुत हुई या नहीं, और उसमें क्या निष्कर्ष दर्ज हैं?
24 सरकारी आवासों के मामले को पत्राचार की परिक्रमा बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। अनुमति थी तो अभिलेख सामने आएं; अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी तय हो। सरकारी संपत्ति का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।
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