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चेयरमैन साहब, उत्पादन की पीठ थपथपाई—अब कुसमुंडा पेट्रोल पंप की फाइल भी खुलवाइए!

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देबजानी मजूमदार और अशोक तीवरता समूह से जुड़े बताए जा रहे पंप पर भूमि-अधिकार और संचालन के सवाल; GM–CGM के कथित संरक्षण के आरोपों पर स्वतंत्र जांच की मांग

 

कोरबा/कुसमुंडा। कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन मोड जरूरी है। मेहनतकश कर्मचारियों का सम्मान भी जरूरी है। लेकिन सार्वजनिक उपक्रम की प्रतिष्ठा केवल उत्पादन के आंकड़ों से नहीं बनती—उसकी जमीन, संपत्ति और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता से भी बनती है। कोल इंडिया चेयरमैन बी. साईराम के क्षेत्रीय दौरे के बीच कुसमुंडा पेट्रोल पंप प्रकरण यही सवाल सामने रखता है: उत्पादन की समीक्षा के साथ अधिकारियों की जवाबदेही की समीक्षा कब होगी?  दौरे से जुड़ी प्रकाशित खबरों में उत्पादन की समीक्षा, श्रमिकों से संवाद और कुसमुंडा के कर्मचारी के सम्मान का उल्लेख है। कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने की यह पहल स्वागतयोग्य है। अब अपेक्षा है कि विवादित भूमि और कथित प्रशासनिक संरक्षण की शिकायतों पर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जाए।

जमीन खाली करने के पत्र के बाद आगे क्या हुआ?

ग्राम यात्रा की पूर्व प्रकाशित रिपोर्ट में उद्धृत 3 सितंबर 2024 और 27 जनवरी 2025 के SECL पत्रों के अनुसार, कुसमुंडा स्थित मेसर्स कोरबा सर्विस स्टेशन की भूमि और भवन के लिए नया अनुबंध देने से इनकार तथा परिसर खाली करने के निर्देश का उल्लेख है। बाद के पत्र में कब्जा नहीं सौंपे जाने और जमा किराया लौटाने के लिए बैंक खाते की जानकारी मांगने की बात भी दर्ज बताई गई है।   यदि ये पत्र SECL की अधिकृत स्थिति बताते हैं, तो प्रबंधन सार्वजनिक करे कि उनके बाद कौन-सी कार्रवाई हुई, किस स्तर पर निर्णय लिया गया और वर्तमान संचालन का आधार क्या है।  सरकारी कंपनी अपनी संपत्ति पर अधिकार जताए और उसी संपत्ति के इस्तेमाल पर उठे सवालों का स्पष्ट उत्तर सामने न आए—तो संदेह बढ़ना स्वाभाविक है। पत्र जारी कर देना जवाबदेही की अंतिम सीढ़ी नहीं है। उसके अनुपालन का हिसाब भी देना पड़ता है।

देबजानी मजूमदार और अशोक तीवरता समूह की भूमिका स्पष्ट हो

प्रकरण में देबजानी मजूमदार की भूमिका और अशोक तीवरता समूह द्वारा वर्तमान संचालन किए जाने के आरोप उठाए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का उत्तर अभी आवश्यक है।  सवाल सीधे हैं: वर्तमान अधिकृत डीलर कौन है? संचालन कौन कर रहा है? यदि कोई हस्तांतरण, साझेदारी अथवा संचालन परिवर्तन हुआ है, तो उसके स्वीकृति दस्तावेज कहां हैं? भूमि-अधिकार और पेट्रोल पंप संचालन की अनुमतियां किस व्यक्ति अथवा संस्था के नाम हैं?  कारोबार का आकार जवाबदेही से छूट नहीं देता। प्रभावशाली कारोबारी का नाम जुड़ने से सरकारी जमीन के सवाल छोटे नहीं हो जाते।  देबजानी मजूमदार और अशोक तीवरता समूह को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वैध दस्तावेज हैं तो उन्हें संबंधित जांच प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर विवाद का तथ्यात्मक उत्तर दिया जाए।

GM–CGM का कथित संरक्षण: आरोप का जवाब रिकॉर्ड से दीजिए

शिकायतों में स्थानीय GM–CGM स्तर पर संरक्षण मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। यह आरोप जांच का विषय है; इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। लेकिन इसका उत्तर केवल सामान्य खंडन से भी पूरा नहीं होगा।  किस अधिकारी ने फाइल संभाली? भूमि संबंधी पत्रों के बाद क्या निर्देश दिए गए? किसने निरीक्षण कराया? किसने वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया? कोई कार्रवाई लंबित है तो उसका कारण क्या है?   प्रबंधन और कारोबारी के इस कथित रिश्ते को नाम देने से पहले उसकी फाइल खोलिए। संबंध की वास्तविक प्रकृति दस्तावेज बताएंगे—चुप्पी नहीं।  चेयरमैन के सामने उत्पादन की उपलब्धियां रखने वाले अधिकारियों को विवादित संपत्ति का हिसाब भी रखना चाहिए। उपलब्धियों की प्रस्तुति में चमक हो और शिकायतों की फाइल में अंधेरा—यह व्यवस्था सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करती है।

अदालत की वर्तमान स्थिति भी साफ की जाए

पूर्व रिपोर्ट में 25 मार्च 2025 के अंतरिम आदेश का उल्लेख है। उससे मुकदमे की आज की स्थिति अथवा अंतिम परिणाम तय नहीं किया जा सकता। नवीनतम आदेश प्राप्त कर यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वर्तमान में कौन-सा न्यायिक निर्देश प्रभावी है।  इसीलिए SECL को अदालत के प्रभावी आदेश, भूमि-अधिकार और संबंधित अनुमतियों का परीक्षण कर विधिसम्मत कार्रवाई का स्पष्ट विवरण देना चाहिए।

चेयरमैन साहब, जवाबदेही को भी मिशन मोड में लाइए

बी. साईराम से अपेक्षा है कि इस मामले की जांच स्थानीय आरोपित निर्णय प्रक्रिया से स्वतंत्र स्तर पर कराई जाए। भूमि और अनुबंध के मूल अभिलेख, संचालन परिवर्तन के दस्तावेज तथा संबंधित अधिकारियों की नोटशीट सुरक्षित रखकर परीक्षण किया जाए। संबंधित कारोबारी पक्षों को उत्तर देने का अवसर मिले और जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारी तय हो।  कोयला निकालने वाले श्रमिक सम्मान के हकदार हैं। सार्वजनिक संपत्ति पर उठे सवालों का जवाब देना अधिकारियों का दायित्व है। दोनों काम साथ होने चाहिए।  कुसमुंडा का सवाल स्पष्ट है—पेट्रोल पंप किस अधिकार से चल रहा है, संबंधित अधिकारियों ने क्या किया और कथित संरक्षण के आरोपों का दस्तावेजी जवाब कहां है?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क संबंधित पक्षों का दस्तावेज सहित उत्तर प्रकाशित करेगा।

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