SECL की संपत्ति या अफसरों की निजी जागीर? तीन पेट्रोल पंपों पर कथित ‘आशीर्वाद’—GM–CGM की जवाबदेही कब

संचालकों को संरक्षण देने का आरोप; शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति अस्पष्ट—पंपों के दस्तावेजों के साथ अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग
कोरबा/कुसमुंडा। SECL की संपत्ति किसी अधिकारी की निजी जागीर नहीं है कि उसकी रक्षा करना या विवादों को अनदेखा करना व्यक्तिगत पसंद का विषय बन जाए। कुसमुंडा के तीन पेट्रोल पंपों से जुड़े भूमि, लीज और अनुमति के सवाल अब क्षेत्रीय प्रबंधन की जवाबदेही तक पहुंच चुके हैं। सवाल सीधा है—सरकारी संपत्ति की रखवाली हो रही है या शिकायतों को फाइलों में थकाया जा रहा है? ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के अनुसार, कोरबा सर्विस स्टेशन, मुस्कान पेट्रोल पंप और शिवम फ्यूल्स/शिवम सर्विस स्टेशन पर खबरें प्रकाशित करने के साथ शिकायतें भी दी जा चुकी हैं। नेटवर्क का आरोप है कि जांच और कार्रवाई की स्पष्ट स्थिति सामने नहीं रखी गई है। संचालकों को SECL अधिकारियों का कथित ‘आशीर्वाद’ प्राप्त होने का आरोप भी उठ रहा है। यह आरोप जांच से सिद्ध होना बाकी है। लेकिन इसका जवाब केवल खंडन से नहीं मिलेगा—शिकायतों पर की गई कार्रवाई, फाइलों की टिप्पणियां और निर्णय सामने रखने होंगे।
कुर्सी SECL की—फैसला निजी मर्जी से?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने SECL की संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति समझ लिया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि शिकायतकर्ता कार्रवाई का हिसाब मांग रहे हैं, जबकि उन्हें स्पष्ट दस्तावेजी उत्तर नहीं मिलने का आरोप है। यदि संबंधित भूमि SECL की नहीं है, तो प्रमाणित रिकॉर्ड देकर स्थिति स्पष्ट कीजिए। यदि कंपनी की भूमि या अधिकार प्रभावित हैं, तो उनकी रक्षा के लिए उठाए गए कदम बताइए। चुप्पी न स्वामित्व का प्रमाण है, न कार्रवाई का विकल्प। सरकारी जिम्मेदारी को मौन के पर्दे में नहीं छिपाया जा सकता।
तीन पंप—हर मामले का अलग हिसाब चाहिए
कोरबा सर्विस स्टेशन के मामले में भूमि-भवन खाली कराने संबंधी SECL पत्रों और न्यायिक कार्यवाही का मिलान जरूरी है। नवीनतम हाईकोर्ट आदेश सामने रखकर प्रबंधन बताए कि आज कौन-सा निर्देश प्रभावी है और उसके अनुसार क्या किया गया। अदालत के नाम का उल्लेख पर्याप्त नहीं—आदेश और अनुपालन दोनों दिखाइए। मुस्कान पेट्रोल पंप के मामले में कथित SECL अर्जन, पुराने भूमि रिकॉर्ड और वर्तमान निजी प्रविष्टि की जांच मांगी गई है। अर्जन का दावा सही है या गलत—इसका उत्तर मूल अभिलेख देंगे। शिवम पंप पर क्षेत्रफल, डायवर्सन, मौके की सीमा और कथित अतिरिक्त कब्जे से जुड़े सवाल हैं। संबंधित खसरों का सत्यापन और संयुक्त सीमांकन हो। माप से सुलझने वाला सवाल आखिर फाइलों में क्यों उलझा रहे? तीनों मामलों में आरोपों की प्रकृति अलग है। इसलिए प्रत्येक शिकायत पर अलग, कारण सहित निर्णय जरूरी है।
केवल संचालक क्यों—फाइल रोकने वालों की भूमिका भी जांचिए
जांच पंप के बोर्ड और जमीन की सीमा पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या किया, यह भी जांच का हिस्सा बने। यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर जांच टाली, तथ्य छिपाए, गलत रिपोर्ट दी या अनुचित संरक्षण दिया, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सरकारी संपत्ति की रक्षा में प्रमाणित लापरवाही को सामान्य कार्यालयी देरी बताकर छोड़ना जवाबदेही का मजाक होगा। SECL मुख्यालय शिकायतों की प्राप्ति से अंतिम निर्णय तक पूरा रिकॉर्ड मंगाए। जांच उन अधिकारियों तक सीमित न रहे, जिनकी भूमिका पर स्वयं सवाल उठ रहे हैं।
‘आशीर्वाद’ का सच फाइल खोलेगी
कथित संरक्षण का आरोप सही है या निराधार—यह दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच से तय होगा। लेकिन शिकायत दबाने का आरोप हो तो शिकायत की फाइल भी जांच का विषय बनेगी। किसने जांच के निर्देश दिए? किसने निरीक्षण किया? किसने निर्णय लंबित रखा? देरी का कारण क्या था? संबंधित संचालकों से क्या जवाब मांगा गया? इन सवालों का उत्तर देने के लिए नई घोषणा नहीं, उपलब्ध रिकॉर्ड खोलने की जरूरत है।
GM–CGM साहब, पद के साथ जवाबदेही भी आती है
SECL प्रबंधन से मांग है कि तीनों मामलों की जांच की स्थिति सार्वजनिक करे और समयबद्ध निर्णय दे। अधिकारियों की भूमिका में अनियमितता प्रमाणित होने पर विभागीय कार्रवाई तथा आपराधिक तत्व मिलने पर सक्षम जांच एजेंसी को मामला भेजा जाए। जांच और कार्रवाई जल्द सुनिश्चित करने की मांग अब संचालकों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों के लिए भी है। कार्रवाई होने की घोषणा तभी की जाएगी, जब उसका लिखित आदेश सामने आएगा। कुसमुंडा के GM–CGM बताएं—सरकारी अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी कलम चली कहां है? शिकायतों का जवाब फाइल का वजन नहीं, निर्णय का प्रमाण होगा। संचालकों को कथित संरक्षण और अधिकारियों द्वारा कार्रवाई टालने के आरोप जांचाधीन हैं। संबंधित पक्षों का उत्तर मिलने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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