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इन 23 सचिवों पर कार्रवाई कहाँ और क्यों अटकी…?

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 15वें वित्त राशि की में व्यापक बंदरबाट,जांच में पूर्ण असहयोग

जनपद CEO की अनुशंसा व अभिमत के बाद भी दबी फाईल

अब राज्यपाल, मुख्य सचिव तक पहुँची शिकायत

 

कोरबा -पाली। सुशासन की सरकार में आकांक्षी जिला कोरबा के पाली ब्लॉक के 23 ग्राम पंचायतों के विकास, बुनियादी
आवश्यकताओं के लिए प्रदत्त 15 वें वित्त की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। कलेक्टर से हुई लिखित शिकायत उपरांत जनपद सीईओ को दिए गए जांच के दरम्यान भी संबंधित पंचायत सचिवों ने न दस्तावेज उपलब्ध कराया न ही उपस्थित हुए। जनपद सीईओ के अनुशंसा,अभिमत के उपरांत भी सम्बंधित पंचायत सचिवों के खिलाफ एक माह से अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी। जिससे सक्षम अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।

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दरअसल, पूरा मामला 15वें वित्त के तहत प्राप्त आबंटन में कराए गए कार्यों एवं भुगतान प्रक्रिया से जुड़ा है। सूचना के अधिकार के तहत जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाले 23 ग्राम पंचायतों क्रमशः बतरा, उड़ता, पुलालीकला, केराझरिया, पोटापानी, तिवरता, धौराभांठा, सिरकीखुर्द, नगोई, केराकछार, नुनेरा, खैराडूबान, धतूरा, दमिया, चोढ़ा, चैतमा, सगुना, डोड़की, सेंद्रीपाली, उतरदा, रंगोले, मुरली, बक्साही एवं सराईपाली के जनसूचना अधिकारी सह पंचायत सचिवों से वित्तीय वर्ष 2024-25 में कराए गए कार्यों का पंचायत प्रस्ताव एवं देयक व्हाउचर की सत्यप्रतिलिपि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

वांछित जानकारी के संदर्भ में निर्धारित मियाद में किसी भी प्रकार का पत्र व्यवहार नहीं करने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पाली के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की गई है। अपीलीय अधिकारी ने अपीलार्थी का आवेदन विधिसम्मत पाया। जनसूचना अधिकारी द्वारा सेवाओं में कमी किया जाना पाया। लिहाजा जनसूचना अधिकारी को वांक्षित जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश पारित किया। लेकिन 15 वें वित्त की राशि का बंदरबांट कर चुके पंचायत सचिवों ने अपीलीय अधिकारी के आदेशों की अवहेलना कर वांक्षित जानकारी ही प्रदान नहीं की । यहीं से लगभग स्पष्ट हो गया था कि 15 वें वित्त के लाखों रुपए के फंड का बंदरबांट किया गया है।

 

कलेक्टर से शिकायत, उप संचालक पंचायत ने दिए थे जांच आदेश

पंचायत सचिवों की अपीलीय आदेश की अवहेलना एवं विश्वस्त सूत्रों से अनियमितता की मिल रही सूचना पर शिकायतकर्ता द्वारा कलेक्टर के यहां दिनांक 17.04.2026 को लिखित शिकायत की गई थी। जिसके तहत जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाले संबंधित पंचायतों के द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त के तहत प्राप्त आबंटन में कराए गए कार्यों की व्यापक लोकहित में ग्रामसभा कार्यवाही पंजी ,उपस्थिति पंजी ,व्यय प्रमाणक, देयक व्हाउचर, इनवाईस बिल, टी.डी.एस. कटौती,जमा राशि एवं गुणवत्ता का परीक्षण कर भौतिक सत्यापन कराए जाने का अनुरोध किया गया था। उक्त पत्र के संदर्भ में कार्यालय उपसंचालक पंचायत जिला- कोरबा (छ.ग.) के द्वारा कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पाली जिला कोरबा (छ.ग.) को कार्यालयीन पत्र क्र. 3036 दिनांक 23.06.2026 के माध्यम से उक्त ग्राम पंचायतों में प्राप्त शिकायतों की जांच कर प्रतिवेदन अधोहस्ताक्षर कार्यालय को अविलंब प्रेषित करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।

 

जांच में असहयोग ,दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं कराए

पत्र के परिपालन में जांच अधिकारी सह कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-पाली, जिला- कोरबा (छ.ग.) ने प्रकरण में सहायक विकास विस्तार अधिकारी के नेतृत्व में करारोपण अधिकारियों की 3 सदस्यीय जांच समिति गठित कर संबंधित पंचायत सचिवों को अभिलेखों के साथ जनपद पंचायत में जांच के लिए बुलाया था। जिसमें 8 ग्राम पंचायतों बतरा, उड़ता, पुलालीकला, केराझरिया , पोटापानी, तिवरता,धौराभांठा एवं सिरकीखुर्द के सचिवों द्वारा आधी अधूरी अभिलेखों की जांच कराई गई।इनवाइस बिल, टीडीएस कटौती,एवं जमा राशि संबंधी महत्वपूर्ण अभिलेख जांच दल को उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं 16 ग्राम पंचायतों नगोई,केराकछार ,नुनेरा, खैराडूबान ,धूतुरा ,दमिया,चोढा, चैतमा ,सगुना ,डोड़की,सेन्द्रीपाली ,उतरदा, रंगोले ,मुरली,बकसाही एवं सराईपाली के द्वारा वांछित अभिलेख जांच दल को उपलब्ध ही नहीं कराया गया।

 

जनपद सीईओ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करने अभिमत समेत की अनुशंसा

पंचायत सचिवों के द्वारा जांच दल को जांच में असहयोग,अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर जनपद सीईओ ने इसे घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा। उप संचालक पंचायत को जांच दल के प्रतिवेदन के साथ प्रकरण में जांच दल के समक्ष वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने आधा/अधूरा अभिलेख उपलब्ध कराने अथवा अपना बयान प्रस्तुत नहीं करने वाले उपरोक्त 23 ग्राम पंचायतों के जनसूचना अधिकारी सह पंचायत सचिवों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित आवश्यक कार्यवाही हेतु कार्यालयीन जांच प्रतिवेदन पत्र क्र. 3801 दिनांक 03 सितम्बर 2026 के माध्यम से पत्र भेज दिया था । जिसकी प्रतिलिपि शिकायतकर्ता को भी प्रदाय की गई है।

 

1 माह से कार्रवाई लंबित ,उप संचालक पंचायत ने नहीं दिखाई संजीदगी

अभिमत समेत जांच प्रतिवेदन प्राप्ति के एक माह उपरांत भी प्रकरण में आज पर्यन्त संबंधित अनुशासनहीन पंचायत सचिवों के विरूद्ध कार्रवाई नहीं होना घोर लापरवाही ,प्रशासनिक अक्षमता को प्रदर्शित करता है। उप संचालक पंचायत ने लंबे अर्से तक जिला पंचायत सीईओ के समक्ष कार्रवाई हेतु नोटशीट तक प्रस्तुत न कर लोकसेवक के पदीय दायित्वों के विपरीत कार्य व्ययवहार किया था। जिससे संबंधित के कार्यशैली पर ही सवाल उठ रहे।

एक ही विभाग में दोहरी नीति पर उठे सवाल ?

विभागीय जांच में असहयोग करने,जांच दल को अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने जैसे गंभीर अनुशासनहीनता पर पर जिले के कई पंचायत सचिवों के विरुद्ध हाल ही में निलंबन ,वेतन वृद्धि रोकने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है। लेकिन इस मामले में 23 पंचायत सचिवों के विरूद्ध अभिमत समेत जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होना दोहरी नीति को प्रदर्शित करता है।

 

तो क्या यह डर सता रहा ?

एक साथ 23 पंचायत सचिवों के विरूद्ध कार्रवाई करने की मजबूरी शायद इस प्रकरण में सामने आ रही। लेकिन निलंबन न सही वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई नहीं करने पर जिम्मदारों पर सवाल उठना लाजिमी है।

जीरो टॉलरेंस की नीति को झटका ,राज्यपाल ,मुख्य सचिव के यहाँ पहुंची शिकायत

अभिमत समेत जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर जिम्मेदारों की कार्यशैली 15वें वित्त जैसे केंद्रीय मद का बंदरबांट करने वालों को प्रश्रय/संरक्षण प्रदान करने तुल्य है। जो कि राज्य शासन के जीरो टॉलरेंस की मंशा के विपरीत है। लिहाजा प्रकरण में त्वरित पारदर्शी अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु महामहिम राज्यपाल महोदय,छग शासन एवं मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन के यहाँ लिखित शिकायत की गई है। जिसकी प्रतिलिपि सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग,महानदी भवन अटल नगर नवा रायपुर, आयुक्त(कमिश्नर) बिलासपुर संभाग,कलेक्टर कोरबा,एवं जिला पंचायत सीईओ को दी गई है।

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