राज्य समाचार

कोरबा में बत्ती का रौब: अनुमति का कागज कहाँ है? सुशासन के नाम पर अफसरी ठसक कब तक?

Spread the love

 

कलेक्टर–SP की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अपनी जगह; बाकी अधिकारियों की गाड़ियों पर बहुरंगी बत्ती किस आदेश से? दस्तावेजों के साथ जल्द खुलेगा राज

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क | कोरबा
संपादक – अब्दुल सुल्तान

 

कोरबा में सरकारी वाहनों की छत पर लगे चेतावनी उपकरणों ने जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है। जनता जानना चाहती है—इनका इस्तेमाल वास्तविक आपात ड्यूटी के लिए हो रहा है या अफसरी रौब चमकाने के लिए? सरकारी गाड़ी मिलना, सड़क पर विशेषाधिकार का पट्टा मिलना नहीं है।

जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की कानून-व्यवस्था, संकट प्रबंधन और जनसुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियाँ महत्वपूर्ण हैं। आपात परिस्थिति में उनके काम की प्राथमिकता समझ आती है। लेकिन बाकी अधिकारियों से सवाल सीधा है: आपका वाहन किस निर्धारित आपात ड्यूटी के लिए अधिकृत है? अनुमति आदेश कहाँ है? या पद की नेम प्लेट को ही कानून की अनुमति समझ लिया गया है?

बत्ती की पात्रता कुर्सी से नहीं, नियम से तय होती है

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108(4) के तहत जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना S.O. 1374(E), दिनांक 1 मई 2017 बहुरंगी लाल–नीली–सफेद बत्ती के उपयोग को निर्धारित आपात एवं आपदा प्रबंधन ड्यूटी से जोड़ती है।

इसमें अग्निशमन, कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस, रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों की ड्यूटी तथा प्राकृतिक और मानवजनित आपदा प्रबंधन के लिए निर्धारित वाहन शामिल हैं। वाहन निर्धारित ड्यूटी पर नहीं हो तो बहुरंगी बत्ती का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। अधिसूचना में संबंधित श्रेणियों के लिए परिवहन विभाग की सार्वजनिक अनुमति सूची और वाहन पर निर्धारित स्टिकर का प्रावधान भी है। कलेक्टर अथवा SP का पद भी इन शर्तों से स्वतः मुक्त नहीं करता।

मोटर वाहन चालन विनियम, 2017 के विनियम 27(1) के अनुसार निर्धारित आपात सेवा वाहन का सायरन और बहुरंगी फ्लैशर आपात कॉल या अलार्म का प्रत्युत्तर देते समय ही चलाया जाना चाहिए। रोजमर्रा की आवाजाही को आपात अभियान का रूप देने की छूट इससे नहीं मिलती।

रौब का प्रदर्शन है तो कानून की कसौटी पर जाँच हो

जिस अधिकारी के पास वैध अनुमति और निर्धारित ड्यूटी का रिकॉर्ड है, वह उसे सामने रखे। जिसके पास नहीं है, वह कथित विशेषाधिकार का प्रदर्शन बंद करे। जनसेवा की पहचान काम से बनेगी; गाड़ी की छत पर लगे उपकरण से नहीं। छत्तीसगढ़ की सुशासन की प्रतिबद्धता की परीक्षा ऐसे ही मामलों में होती है। यदि कोई अधिकारी नियमों के बाहर बत्ती का उपयोग करता है तो सवाल केवल उसकी गाड़ी का नहीं—उस निगरानी व्यवस्था का भी है, जो आम नागरिक से नियम पालन माँगती है और सरकारी वाहन की जाँच करने में हिचकती है।

हालाँकि उपलब्ध फोटो में छत पर उपकरण दिखना अपने आप में अवैध उपयोग का निर्णायक प्रमाण नहीं है। उसका प्रकार, अनुमति, वास्तविक संचालन और संबंधित ड्यूटी जाँचना आवश्यक है। जाँच से पहले दोष तय नहीं; लेकिन जाँच से बचने की छूट भी नहीं।

मोटर वाहन अधिनियम में दंड का प्रावधान

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 177 के अनुसार, अधिनियम या उसके नियम, विनियम अथवा अधिसूचना के ऐसे उल्लंघन में, जहाँ अलग दंड निर्धारित नहीं है, पहली बार ₹500 तक और दूसरे अथवा बाद के उल्लंघन पर ₹1,500 तक जुर्माने का प्रावधान है। वास्तविक मामले में लागू धारा और कार्रवाई उल्लंघन के तथ्यों के अनुसार तय होगी।

कलेक्टर–SP प्राथमिकता से संज्ञान लें: अनुमति सूची सार्वजनिक हो

जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा है कि परिवहन विभाग तथा यातायात पुलिस के माध्यम से संबंधित वाहनों की जाँच सुनिश्चित कराएँ। जनता के सामने स्पष्ट किया जाए:

– कौन-से वाहन बहुरंगी चेतावनी बत्ती के लिए अधिकृत हैं?

– अनुमति किस अधिकारी ने, किस ड्यूटी और किन शर्तों पर दी?

– क्या वाहन पर आवश्यक अनुमति स्टिकर मौजूद है?

– क्या बत्ती निर्धारित ड्यूटी से बाहर इस्तेमाल हुई?

– उल्लंघन मिलने पर चालान और आवश्यक विभागीय कार्रवाई कब होगी?

 

जल्द खुलेगा राज—नाम और वर्तमान पद, दस्तावेजों के साथ

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क अनुमति और उपयोग के रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद संबंधित अधिकारियों के नाम तथा वर्तमान पद सामने रखेगा। संबंधित पक्षों का जवाब भी प्रकाशित किया जाएगा।  इस बीच अधिकारियों के लिए संदेश स्पष्ट है: अनुमति है तो कागज दिखाइए; अनुमति नहीं है तो उपयोग से परहेज कीजिए। सुशासन का नाम लेकर नियमों से ऊपर बैठने की कोशिश जनता के सवालों से नहीं बच सकती।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button