बिलासपुर निगम में ₹10 हजार पर ACB का शिकंजा—कोरबा में ‘पौधे, परमिशन और पावर’ की परतें कौन खोलेगा?

पौधे टेंडर से पहले पहुंचे, HIG-30 में “FAR अधिक” की आपत्ति के बाद भी अनुमति और BALCO–Vedanta के कथित अवैध निर्माण पर सवाल—क्या कोरबा नगर निगम ACB की नजरों से बाहर है?
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क बिलासपुर नगर निगम की सम्पदा शाखा में मकान नवीनीकरण की फाइल आगे बढ़ाने के बदले कथित रूप से ₹10 हजार की रिश्वत लेते कर्मचारी लक्ष्मीकांत कोका को ACB ने रंगे हाथ पकड़ लिया। जिस समय नगर निगम की सामान्य सभा में विकास के भाषण चल रहे थे, उसी समय ACB की टीम कथित रिश्वतखोरी का जाल काट रही थी।
अब कोरबा की जनता पूछ रही है—
बिलासपुर में ₹10 हजार पर रेड, तो कोरबा में करोड़ों के निर्माण, संदिग्ध अनुमतियों और ‘टेंडर से पहले आपूर्ति’ पर जांच कब?
कोरबा नगर निगम में सवाल किसी एक बाबू, एक फाइल या ₹10 हजार तक सीमित नहीं हैं। यहां पौधा खरीदी से लेकर भवन अनुज्ञा और बड़े औद्योगिक समूह के निर्माण तक ऐसी दस्तावेजी परतें सामने आ रही हैं, जिन पर स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
क्या कोरबा में भ्रष्टाचार लिफाफे से निकलकर टेंडर, भवन अनुज्ञा और तकनीकी अनुमोदन की फाइलों में स्थायी निवास बना चुका है?
पहला सवाल—टेंडर खुलने से पहले नगर निगम परिसर में पौधे कैसे पहुंच गए?
नगर निगम कोरबा ने 3,070 पौधों की खरीदी के लिए GeM Bid No. GEM/2026/B/7982716 जारी की। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 24 सितंबर 2026 रात 9 बजे तथा तकनीकी बोली खुलने की निर्धारित तिथि 25 सितंबर 2026 थी। लेकिन उपलब्ध फोटो, वीडियो और परिवहन विवरण के अनुसार पौधों से भरा वाहन CG 04 RB 0409 कथित रूप से 8 सितंबर 2026 को ही जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर पहुंच चुका था।
यानी बोली बंद होने से लगभग 16 दिन पहले कथित सामग्री नगर निगम के परिसर में मौजूद थी!
अब सवाल जहरीले हैं और जवाब दस्तावेजों से देना होगा—
– पौधे किसके मौखिक अथवा लिखित आदेश पर पहुंचे?
– आपूर्तिकर्ता कौन था?
– निविदा पूरी होने से पहले उसे मांग और मात्रा की जानकारी किसने दी?
– वाहन प्रवेश रजिस्टर, ई-वे बिल, नर्सरी पर्ची और सामग्री प्राप्ति पावती कहां है?
– क्या GeM निविदा वास्तविक प्रतिस्पर्धा थी या पहले हो चुकी खरीद पर बाद में कागजी पर्दा डालने का प्रयास?
दूसरा सवाल—HIG-30 की फाइल में “FAR अधिक”, फिर अनुमति कैसे हुई पार?
पंडित रविशंकर शुक्ल नगर, वार्ड क्रमांक 23 स्थित HIG-30 से संबंधित प्रस्ताव क्रमांक 2863, प्रोजेक्ट आईडी VISI-KMC-2025-0071, नगर निगम की भवन अनुज्ञा प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
दस्तावेजों के अनुसार—
– आवेदक: शांति सिंह एवं विकाश सिंह
– आवेदन की तारीख: 23 मई 2025
– अनुमति की तारीख: 4 जून 2026
– भूखंड का क्षेत्रफल: 252 वर्गमीटर
– प्रस्तावित/दर्शाया गया कुल निर्माण: लगभग 1,248.69 वर्गमीटर
– ग्राउंड कवरेज: लगभग 91.98 प्रतिशत
– FAR: लगभग 2.91
– निर्माण स्तर: ग्राउंड फ्लोर से पांचवीं मंजिल तक
नगर निगम पोर्टल की टिप्पणियों में कथित रूप से पहले स्पष्ट आपत्तियां दर्ज थीं—
“FAR is More” और “Ground Coverage and FAR is More”
फिर ऐसा कौन-सा तकनीकी चमत्कार हुआ कि FAR और ग्राउंड कवरेज की गंभीर आपत्तियों वाली फाइल को अंततः मंजूरी मिल गई?
क्या संशोधित नक्शा प्रस्तुत किया गया?
क्या निर्माण क्षेत्र घटाया गया?
क्या सेटबैक और पार्किंग नियमों का पालन कराया गया?
क्या सक्षम नियमितीकरण प्राधिकारी का अंतिम आदेश मौजूद है?
या फिर आपत्तियां फाइल में लिखी रहीं और अनुमति का दरवाजा किसी अदृश्य चाबी से खुल गया?
हाईकोर्ट ने भवन को वैध नहीं किया—सिर्फ आवेदन पर कानूनसम्मत निर्णय का निर्देश दिया था
Vikas Singh बनाम State of Chhattisgarh, WPC No. 1087/2025, न्यूट्रल साइटेशन 2025:CGHC:9889, आदेश दिनांक 27 फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने 4 जुलाई 2023 के नियमितीकरण आवेदन पर जिला नियमितीकरण प्राधिकारी को कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हाईकोर्ट ने—
– भवन को वैध घोषित नहीं किया;
– FAR 2.91 को स्वीकृति नहीं दी;
– 91.98 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज को अनुमोदित नहीं किया;
– सेटबैक नियमों में छूट नहीं दी;
– और नगर निगम को हर हाल में भवन अनुज्ञा जारी करने का निर्देश नहीं दिया।
फिर सवाल यह है—
क्या हाईकोर्ट के सीमित आदेश को “अनुमति का पासपोर्ट” बनाकर तकनीकी आपत्तियों को कुचल दिया गया?
हालांकि उपलब्ध न्यायालयीन आदेश में HIG-30 का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं देता। इसलिए नगर निगम को सार्वजनिक करना चाहिए कि HIG-30 को उक्त याचिका से जोड़ने वाला दस्तावेज, नियमितीकरण आवेदन का अंतिम निर्णय, स्वीकृत संशोधित नक्शा और तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट कहां है।
तीसरा सवाल—BALCO–Vedanta के लिए नियम अलग हैं क्या?
कोरबा नगर निगम सीमा में BALCO–Vedanta से जुड़े निर्माण मामलों ने भी निगम की भवन अनुज्ञा और प्रवर्तन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया है। पाड़ीमार–इंदिरा मार्केट क्षेत्र का बड़ा निर्माण
उपलब्ध भवन अनुज्ञा विवरण के अनुसार BALCO से संबंधित प्रकरण क्रमांक 2637, प्रोजेक्ट AJYA-KMC-2025-0001 में—
– आवेदन: 12 मार्च 2025
– अनुमति: 3 मई 2025
– प्रस्तावित निर्माण: 10 तल
– कुल निर्माण क्षेत्र: लगभग 66,181.95 वर्गमीटर
– मूल अनुमति अवधि: एक वर्ष
दस्तावेज में कथित रूप से भूखंड संख्या “0” दिखाई गई, जबकि खसरा विवरण तथा नगर एवं ग्राम निवेश की विकास अनुमति का क्रमांक और दिनांक स्पष्ट नहीं होने का प्रश्न पहले भी उठ चुका है। यदि मूल अनुमति मई 2026 में समाप्त हो चुकी थी, तो उसके बाद निर्माण किस वैध पुनर्वैधीकरण आदेश के आधार पर जारी रहा? नगर निगम को संबंधित नवीनीकरण आदेश, शुल्क और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। रिसदा का दस मंजिला निर्माण
BALCO से संबंधित एक अन्य प्रकरण क्रमांक 2391, प्रोजेक्ट PAGR-KMC-2024-0006 में—
– अनुमति की तारीख: 17 मई 2024
– स्थान: ग्राम रिसदा
– निर्माण: 10 तल
– कुल निर्माण क्षेत्र: लगभग 10,987.16 वर्गमीटर
अनुमति की शर्तों में एक वर्ष की वैधता और लिखित पुनर्वैधीकरण का प्रावधान बताया गया है। सवाल है कि मई 2025 के बाद का वैध नवीनीकरण आदेश कहां है और नगर निगम ने निर्माण की मौके पर जांच कब की?
कोहड़िया में सील किया गया बैचिंग प्लांट—फिर आगे क्या हुआ?
BALCO–Vedanta से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण में ग्राम कोहड़िया के खसरा क्रमांक 486/1 एवं 491/1 पर अस्थायी कंक्रीट बैचिंग प्लांट, श्रमिक झोपड़ियां, दीवार तथा अन्य निर्माण संबंधी आरोप सामने आए थे। रिकॉर्ड के अनुसार नगर निगम कोरबा द्वारा कथित रूप से 31 जनवरी 2023 को बैचिंग प्लांट स्थल सील करने और जुर्माना लगाने की कार्रवाई का उल्लेख है।
यदि निर्माण और संचालन वैध था तो सील क्यों किया गया?
यदि अवैध था तो सीलिंग के बाद जिम्मेदारों पर अंतिम कार्रवाई क्या हुई?
क्या अनुमति बाद में दी गई?
क्या जुर्माना वसूला गया?
क्या स्थल से अवैध निर्माण हटाया गया?
और सबसे बड़ा प्रश्न—नगर निगम ने पूरी कार्रवाई की फाइल आज तक सार्वजनिक क्यों नहीं की?
BALCO–Vedanta का पक्ष रहा है कि संबंधित सरकारी भूमि पूर्व में BALCO को आवंटित की गई थी और कब्जा 1968 से 1975 के दौरान सौंपा गया। वहीं विवादित उपयोग और निर्माण की वैधता के लिए राजस्व, वन तथा मौके की संयुक्त जांच आवश्यक बताई गई। ऐसे में निगम को भूमि-अधिकार और भवन-अनुमति—दोनों के दस्तावेज सामने रखने चाहिए।
क्या कोरबा में नियम आम आदमी के लिए हथकड़ी और रसूखदारों के लिए रबर की पट्टी हैं?
आम नागरिक मकान में एक कमरा बढ़ाए तो नोटिस।
छोटा व्यापारी बोर्ड लगाए तो जुर्माना।
गरीब ठेला रखे तो अमला बुलडोजर लेकर पहुंच जाता है।
लेकिन जब सवाल बड़े निर्माण, भारी FAR, लगभग 92 प्रतिशत कवरेज, समय-सीमा समाप्त अनुमति और औद्योगिक समूह के कथित अनधिकृत निर्माण का हो—तो निगम की आंखों पर फाइलों की पट्टी क्यों बंध जाती है?
क्या भवन अनुज्ञा शाखा नियमों की प्रहरी है, या प्रभावशाली लोगों के लिए नियमों को मोड़ने वाली सुविधा-खिड़की?
भ्रष्टाचार केवल नोट लेते पकड़ा जाना नहीं है भ्रष्टाचार केवल वह नहीं, जिसमें किसी कर्मचारी के हाथ पर रासायनिक घोल लगाकर नोट बरामद हो जाएं।
भ्रष्टाचार वह भी हो सकता है—
– जब सामग्री टेंडर से पहले पहुंच जाए;
– जब “FAR अधिक” की आपत्ति अनुमति में बदल जाए;
– जब हाईकोर्ट के सीमित आदेश का अर्थ बढ़ाकर प्रस्तुत किया जाए;
– जब समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी बड़ा निर्माण चलता रहे;
– और जब सीलिंग तथा जुर्माने की कार्रवाई फाइलों के अंधेरे में दफन हो जाए।
अब फाइल नहीं—डिजिटल ऑडिट और संयुक्त जांच चाहिए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मांग करता है कि EOW/ACB अथवा स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति निम्न रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित करे—
1. पौधा निविदा का संपूर्ण GeM डिजिटल ऑडिट ट्रेल;
2. वाहन CG 04 RB 0409 की एंट्री, CCTV, ई-वे बिल और चालान;
3. HIG-30 प्रस्ताव 2863 की सभी नोटशीट, मूल एवं संशोधित नक्शे;
4. FAR, कवरेज, सेटबैक, पार्किंग एवं नियमितीकरण की गणना;
5. जिला नियमितीकरण प्राधिकारी का अंतिम आदेश;
6. BALCO के प्रकरण 2637 और 2391 की मूल भवन अनुज्ञा एवं पुनर्वैधीकरण;
7. नगर एवं ग्राम निवेश की विकास अनुमतियां;
8. कोहड़िया बैचिंग प्लांट की सीलिंग, जुर्माना एवं बाद की कार्रवाई;
9. संबंधित भवन अधिकारियों, अभियंताओं और अनुमोदनकर्ता अधिकारियों की भूमिका; तथा
10. इन प्रकरणों से संबंधित भुगतान, शुल्क और डिजिटल लॉग।
बिलासपुर में ₹10 हजार पर ACB की रेड—कोरबा में पौधे, परमिशन और पावर के गठजोड़ पर कब पड़ेगा छापा?
कोरबा की जनता अब केवल स्पष्टीकरण नहीं, दस्तावेजों के साथ जवाब चाहती है।
“क्या कोरबा नगर निगम में भ्रष्टाचार पकड़ने के लिए नोटों का बंडल जरूरी है, या टेंडर की तारीख, पोर्टल की आपत्ति और समाप्त अनुमति भी जांच के लिए पर्याप्त होगी?”
स्पष्टीकरण: इस समाचार में कोरबा नगर निगम से संबंधित बिंदु उपलब्ध पोर्टल रिकॉर्ड, भवन अनुज्ञा दस्तावेज, न्यायालयीन आदेश, फोटो-वीडियो तथा पूर्व कार्रवाई के अभिलेखों पर आधारित जांच योग्य प्रश्न हैं। किसी व्यक्ति अथवा संस्था का अंतिम आपराधिक दायित्व सक्षम जांच एजेंसी और न्यायालय द्वारा निर्धारित होगा। संबंधित पक्ष दस्तावेजी उत्तर देता है तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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