रिटायरमेंट से 10 दिन पहले सम्मान! टेंडर के ‘बंटवारे’ से लेकर होटल की महफिल तक, ईई साहब पर उठे सवाल”

रिटायरमेंट से 10 दिन पहले ठेकेदारों ने किया RES के ईई का सम्मान। टेंडर के कथित बंटवारे और होटल की महफिल को लेकर विभागीय गलियारों में उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की चर्चा।
कोरबा। पुरानी कहावत है, “सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को।” अब यह कहावत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग के ईई साहब पर कितनी सटीक बैठती है, इसका फैसला तो किसी निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकता है। मगर रिटायरमेंट से महज दस दिन पहले टीपी नगर के एक होटल में ठेकेदारों की ओर से हुआ सम्मान समारोह विभागीय गलियारों में प्रश्नों की ऐसी घंटी जरूर बजा गया है, जिसकी गूंज अब दूर तक सुनाई दे रही है।
असल में साहब छत्तीसगढ़ी कहावतों यानी हाना के भी किंग बताए जाते हैं। लिहाजा, कहते हैं कि उन्होंने हाना को ही अपना हथियार बनाया और पर्दे के पीछे ऐसा खेल रचा कि काम का बंटवारा भी चर्चा में आ गया। खबरीलाल बताते हैं कि साहब के कार्यकाल में कामों का बंटवारा कुछ ऐसा हुआ कि ठेकेदार खुश और फाइलें गुलजार रहीं। मानो सरकारी टेंडर नहीं, रेवड़ी का प्रसाद बांटा जा रहा हो।
चर्चा तो यह भी है कि पिछले दो साल के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हुई, तो ईई साहब की फाइलों के साथ डीए से लेकर टेंडर प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है, इसका फैसला जांच के बाद ही होगा।
साहब की मधुर वाणी और शाम की महफिलों में अगरबत्ती सुलगाने के शौक की भी विभाग में खूब चर्चा रही। सवाल बस इतना है कि अगरबत्ती की खुशबू आखिर टेंडर की फाइलों तक कैसे पहुंच गई?
काम भी मिला और रिटायरमेंट से ठीक पहले सम्मान भी। अब यह सम्मान महज आत्मीयता थी या पुरानी ‘सेवा’ का आभार, यह तो सम्मान करने वाले ठेकेदार ही बेहतर जानते होंगे।
फिलहाल फाइलें खामोश हैं और विभाग में चर्चाएं गर्म हैं। अगर कभी जांच की हवा चली, तो सम्मान की माला से लेकर टेंडर की फाइल तक, कई गांठें खुल सकती हैं।
और साहब के कार्यकाल को करीब से समझने वाले कुछ एसडीओ तो मुस्कुराते हुए बस इतना ही कहते नजर आ रहे हैं…“सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को…”
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