SECL की जमीन पर ₹2.5 करोड़ का कथित ‘पंप सौदा’—कागजों में लीज बेदम, जमीन अटकी; फिर किसकी शह पर धधक रहा पेट्रोल का कारोबार?

नई लीज से इनकार, कब्जा लौटाने का आदेश, किराया भी वापस—फिर कथित खरीदार दुलानी के हाथों में संचालन कैसे?
हाईकोर्ट की “अगली तारीख तक” वाली अंतरिम राहत को क्या बना लिया गया स्थायी लाइसेंस? आबादी के सामने बारूद का कारोबार—कलेक्टर कोरबा तत्काल रोक लगाकर खोलें पूरे सौदे की नस-नस!
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क जमीन SECL की। भवन पर दावा SECL का। नई लीज से साफ इनकार। कब्जा खाली करने का लिखित आदेश। जमा किराया तक वापस करने की कार्रवाई। हाईकोर्ट का अंतरिम संरक्षण भी केवल “अगली सुनवाई तक”—फिर कुसमुंडा में यह पेट्रोल पंप आखिर किस अदृश्य कानून, किस रहस्यमयी अनुमति और किस मजबूत संरक्षण की ऑक्सीजन पर धधक रहा है?
मामला अब लीज के पुराने कागजों में दबा कोई मामूली विवाद नहीं रहा। यह सरकारी जमीन पर कथित ₹2.5 करोड़ के निजी सौदे, डीलरशिप के संदिग्ध हस्तांतरण, भूमि नामांतरण अटकने और आबादी के सामने अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों का कारोबार जारी रहने का विस्फोटक मामला बन चुका है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क को प्राप्त गंभीर सूचना के अनुसार मेसर्स कोरबा सर्विस स्टेशन को लेकर लगभग ₹2.5 करोड़ का कथित बिक्री एग्रीमेंट हो चुका है। भूमि नामांतरण और SECL की सहमति का पेंच फंसा हुआ है, फिर भी कथित खरीदार दुलानी द्वारा पेट्रोल पंप का वर्तमान संचालन किए जाने की सूचना है। यदि यह सूचना सही है तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं—सरकारी संपत्ति और जनसुरक्षा के सीने पर खुलेआम चलती व्यावसायिक मशीन का मामला है।
जब जमीन नाम नहीं हुई तो कारोबार हाथ में कैसे आया?
किसी दुकान की चाबी बदलना और पेट्रोल पंप की डीलरशिप हस्तांतरित करना एक बात नहीं है। पेट्रोल पंप में जमीन का वैध अधिकार, तेल कंपनी की अनुमति, PESO लाइसेंस, अग्निशमन सुरक्षा और वर्तमान संचालक की कानूनी पहचान अनिवार्य होती है।
यहाँ सवाल जहरीले हैं और जवाब दस्तावेजों में चाहिए:
– जमीन का नामांतरण नहीं हुआ तो कथित खरीदार ने कब्जा किस अधिकार से लिया?
– SECL ने नई लीज नहीं दी तो पेट्रोलियम भंडारण किस भूमि-अधिकार पर जारी है?
– क्या IOCL ने दुलानी के नाम डीलरशिप हस्तांतरण अथवा पुनर्गठन स्वीकृत किया?
– क्या वर्तमान PESO लाइसेंस दुलानी अथवा वर्तमान संचालक के नाम है?
– ₹2.5 करोड़ में वास्तव में क्या बेचा गया—मशीनें, व्यवसाय, डीलरशिप या SECL की जमीन और भवन भी?
– कथित एग्रीमेंट में SECL की संपत्ति पर अधिकार किस आधार पर दिखाया गया?
– भुगतान बैंक से हुआ या सौदे को कागजों के अंधेरे में रखा गया?
– IOCL को SECL की कौन-सी NOC दिखाई गई?
– कहीं पावर ऑफ अटॉर्नी या संचालन अनुबंध की आड़ में असली हस्तांतरण तो नहीं छिपाया गया?
सरकारी जमीन किसी की निजी तिजोरी नहीं कि बिना मालिक की मंजूरी ₹2.5 करोड़ का सौदा लिख दिया जाए और फिर पेट्रोल की मशीनों से मुनाफा निचोड़ा जाता रहे!
SECL ने कहा—जमीन खाली करो; संचालक ने कहा—कारोबार चलता रहेगा?
SECL के पत्र क्रमांक SECL/KSM/G.M./Per./2024/416, दिनांक 03 सितंबर 2024 में भूमि और भवन 30 दिनों के भीतर खाली कर कब्जा SECL को सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था।
SECL के अनुसार:
– मूल अनुबंध 27 मार्च 1991 को हुआ था;
– मूल प्रोपराइटर शांति पटेल थे;
– उनका निधन 21 अगस्त 2021 को हो चुका था;
– देबजानी मजूमदार ने 28 मई 2024 को नवीनीकरण मांगा;
– SECL ने नया अनुबंध/लीज देने से इनकार कर दिया;
– भूमि SECL को अपनी आवश्यकता के लिए चाहिए थी।
इसके बाद 27 जनवरी 2025 के पत्र में SECL ने दर्ज किया कि आदेश के बावजूद कब्जा नहीं लौटाया गया। बाद में जमा किराया भी स्वीकार करने योग्य नहीं माना गया और उसे लौटाने के लिए बैंक विवरण मांगा गया। जब मालिकाना संस्था किराया लेने से इनकार कर रही है, नई लीज नहीं दे रही और कब्जा वापस मांग रही है—तब कारोबार की वैधता पर प्रशासन की चुप्पी स्वयं एक चीखता हुआ सवाल है।
हाईकोर्ट ने पंप को वैधता का अमृतपत्र नहीं दिया
WPC No. 1559/2025 में हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2025 को SECL के 03.09.2024 के पत्र के प्रभाव पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगाई थी।
यह आदेश:
– स्थायी लीज नहीं था;
– जमीन का मालिकाना प्रमाणपत्र नहीं था;
– IOCL डीलरशिप हस्तांतरण की अनुमति नहीं था;
– कथित खरीदार के नाम संचालन आदेश नहीं था;
– PESO अथवा अग्निशमन लाइसेंस नहीं था।
यदि प्राप्त सूचना के अनुसार न्यायालयीन प्रकरण समाप्त हो चुका है और अंतरिम आदेश आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पुराने स्टे की लाश को कंधे पर रखकर वर्तमान कारोबार चलाने का कोई औचित्य नहीं बचता।
SECL और संचालक तत्काल अंतिम ऑर्डरशीट सार्वजनिक करें। जनता को बताया जाए—मामला किस तारीख को, किस आदेश से और किन शर्तों पर समाप्त हुआ?
वैशाली नगर के सामने पेट्रोल का भंडार—हादसा हुआ तो फाइलें बुझाएंगी आग?
पेट्रोल पंप वैशाली नगर, SECL की बसाहट और आबादी वाले क्षेत्र के सामने संचालित बताया जा रहा है। यहाँ पेट्रोल और डीजल का भंडारण कोई साधारण व्यावसायिक गतिविधि नहीं—यह हर क्षण उच्च सुरक्षा और वैधानिक निगरानी मांगता है। यदि वर्तमान संचालक के नाम भूमि-अधिकार, IOCL प्राधिकार, PESO लाइसेंस और अग्निशमन NOC नहीं है तो प्रशासन को यह बताना होगा कि जनता की जान को किस भरोसे छोड़ा गया है।
क्या अधिकारी किसी दुर्घटना की प्रतीक्षा कर रहे हैं? क्या आग लगने के बाद फाइलों से पानी निकाला जाएगा? क्या जनहानि होने पर जिम्मेदारी पुराने लीजधारक, कथित खरीदार, IOCL, SECL या जिला प्रशासन—किसके सिर रखी जाएगी?
कलेक्टर साहब, तत्काल संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई का हेतु आदेशित करें !
कलेक्टर कोरबा को तत्काल:
1. पेट्रोल पंप का संयुक्त स्थल निरीक्षण कराना चाहिए।
2. हाईकोर्ट की अंतिम ऑर्डरशीट मंगानी चाहिए।
3. वर्तमान लीज और SECL की NOC सत्यापित करनी चाहिए।
4. दुलानी द्वारा कथित संचालन का कानूनी आधार जांचना चाहिए।
5. ₹2.5 करोड़ के कथित एग्रीमेंट को जब्त कर वित्तीय जाँच करानी चाहिए।
6. IOCL से डीलरशिप पुनर्गठन की पूरी फाइल मंगानी चाहिए।
7. PESO लाइसेंस में दर्ज नाम, वैधता और भूमि दस्तावेज जांचने चाहिए।
8. अग्निशमन, विद्युत सुरक्षा और विधिक माप विज्ञान की अनुमति जांचनी चाहिए।
9. बैंकिंग लेन-देन, आयकर, GST और स्टाम्प शुल्क की जाँच करानी चाहिए।
10. जाँच पूरी होने तक, जनसुरक्षा को खतरा पाए जाने पर, सक्षम विधिक प्रावधानों के तहत ईंधन भंडारण एवं बिक्री तत्काल रोकनी चाहिए।
दस्तावेज दिखाओ—वरना पंप पर ताला लगाओ!
कथित खरीदार दुलानी, पूर्व संचालक, IOCL और SECL चारों को जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा:
«वर्तमान पेट्रोल पंप किस वैध लीज, किस NOC, किस डीलरशिप आदेश, किस PESO लाइसेंस और किस जीवित न्यायालयीन संरक्षण पर चल रहा है?»
कागज वैध हैं तो सार्वजनिक किए जाएं। यदि कागजों में छेद हैं, नामांतरण अटका है और अधिकारों की जमीन खिसक चुकी है, तो पेट्रोल पंप की मशीनों से निकलने वाली हर बूंद प्रशासनिक जवाबदेही पर गिरता जलता हुआ सवाल है। यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों तथा प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जनहित में प्रकाशित किया जा रहा है। ₹2.5 करोड़ के कथित एग्रीमेंट और दुलानी द्वारा संचालन की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी अपेक्षित है। संबंधित पक्षों का दस्तावेज-समर्थित पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मांग—पहले लीज दिखाओ, फिर पेट्रोल बेचो; पहले लाइसेंस साबित करो, फिर जनता के सामने बारूद का कारोबार चलाओ!
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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