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तीन दिन की अध्यक्षी! NSUI की नियुक्ति से ‘विराम’ तक पूरी कहानी फिल्मी

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‘नायक’ में एक दिन का मुख्यमंत्री… यहां तीन दिन के जिलाध्यक्ष!
20 अगस्त को आदेश—ढोल-नगाड़े, मिठाइयां, बैनर और स्वागत… 23 अगस्त को आया ‘विराम’; अब कार्यकर्ताओं में चर्चा—“कैसा लगा मेरा मजाक?”
युवा कांग्रेस चुनाव बना वजह; सवाल—चुनाव पहले से तय था तो नियुक्तियों की इतनी जल्दी क्यों?

 

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बिलासपुर/रायपुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क राजनीति में कुर्सी कब किसके पास आए और कब बिना आवाज किए खिसक जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। लेकिन NSUI छत्तीसगढ़ में 20 से 23 अगस्त 2026 के बीच जो घटनाक्रम सामने आया, उसकी पटकथा किसी राजनीतिक व्यंग्य फिल्म से कम दिलचस्प नहीं दिखाई देती।  फिल्म ‘नायक’ में अनिल कपूर का किरदार एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनता है। यहां कहानी कुछ आगे निकली—कुछ नेताओं को जिलाध्यक्ष बनने की खुशी पूरे तीन दिन नसीब हुई! 20 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के हस्ताक्षर से कार्यालय आदेश जारी हुआ। संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण का हवाला देते हुए विभिन्न जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां घोषित की गईं।  आदेश निकला तो स्वाभाविक रूप से समर्थकों में उत्साह छा गया। कहीं मिठाइयां बंटीं, कहीं स्वागत की तैयारियां हुईं, कहीं फ्लेक्स-बैनर छप गए। समर्थकों ने मान लिया कि वर्षों की संगठनात्मक मेहनत का फल आखिर मिल गया। लेकिन राजनीतिक कहानी में असली ‘ट्विस्ट’ अभी बाकी था।

20 अगस्त—“बधाई हो, आप जिलाध्यक्ष हैं!”

23 अगस्त—“फिलहाल रुक जाइए!”

महज तीन दिन बाद, 23 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नाम से दूसरा पत्र सामने आया। इसमें कहा गया कि 20 अगस्त को विधानसभा एवं जिला अध्यक्षों की गई नियुक्तियों को वर्तमान छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय कार्यालय से हुई चर्चा के अनुसार ‘होल्ड’ किया जाता है। यानी न स्पष्ट रूप से बर्खास्तगी, न नियुक्ति जारी रहने की स्थिति—बस ‘होल्ड’! और इसी एक शब्द ने तीन दिन पहले शुरू हुए राजनीतिक जश्न को प्रतीक्षा कक्ष में पहुंचा दिया।

‘गजब बेइज्जती है…’ वाला सीन!  सोशल मीडिया की भाषा में कहें तो नवनियुक्त पदाधिकारियों और उनके समर्थकों के मन में शायद वेब सीरीज पंचायत का चर्चित भाव घूम रहा होगा— “गजब बेइज्जती है भाई…!” क्योंकि जिन्हें तीन दिन पहले बधाइयां मिल रही थीं, जिनके स्वागत के पोस्टर-बैनर तैयार हो चुके थे और जिनके समर्थक नई जिम्मेदारी का जश्न मना रहे थे, अब वही पूछ रहे हैं—

भैया… अध्यक्ष हैं, पूर्व अध्यक्ष हैं या अभी होल्ड पर अध्यक्ष हैं?”

राजनीति में शायद यह भी एक नई श्रेणी है—तीन दिवसीय जिलाध्यक्ष!  सबसे बड़ा सवाल—युवा कांग्रेस चुनाव अचानक तो घोषित नहीं हुआ? यहां व्यंग्य से हटकर एक गंभीर संगठनात्मक सवाल भी खड़ा होता है। यदि छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के चुनाव के कारण इन नियुक्तियों को होल्ड करना आवश्यक था, तो क्या 20 अगस्त को नियुक्ति आदेश जारी करते समय चुनाव की जानकारी संगठन को नहीं थी?यदि जानकारी थी तो नियुक्तियां क्यों की गईं? और यदि राष्ट्रीय कार्यालय से चर्चा आवश्यक थी, तो वह चर्चा नियुक्ति से पहले क्यों नहीं हुई?  इन सवालों का स्पष्ट जवाब ही पूरे घटनाक्रम पर छाए भ्रम को दूर कर सकता है।

फ्लेक्स संभालकर रखिए… शायद फिर काम आ जाएं!  बताया जा रहा है कि कुछ समर्थकों को अब भी उम्मीद है कि युवा कांग्रेस चुनाव के बाद उन्हीं नामों पर फिर मुहर लग सकती है। ऐसे में जिन्होंने स्वागत के लिए फ्लेक्स-बैनर बनवा लिए हैं, उनके लिए राजनीतिक व्यंग्य में एक ही सलाह निकलती है— “फेंकिए मत… संभालकर रखिए! राजनीति है साहब, कब दोबारा काम आ जाएं, कहा नहीं जा सकता।” नियुक्तियों में ‘बड़ी रकम’ के लेन-देन की चर्चा भी—लेकिन प्रमाण सामने नहीं

इस घटनाक्रम के बीच सूत्रों के हवाले से नियुक्तियों में बड़ी रकम के कथित लेन-देन की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के पास फिलहाल इस आरोप की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है और हम इस आरोप की पुष्टि नहीं करते।

यदि ऐसा कोई आरोप सार्वजनिक रूप से लगाया जाता है तो संबंधित पक्ष का जवाब और प्रमाण सामने आना भी आवश्यक है। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति पर आर्थिक लेन-देन का आरोप तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

फिलहाल क्लाइमेक्स बाकी है…

अब असली सवाल यही है कि यह ‘होल्ड’ कुछ दिनों का इंटरवल है या पूरी कहानी का ‘द एंड’?

क्या युवा कांग्रेस चुनाव के बाद इन्हीं पदाधिकारियों की कुर्सियां वापस आएंगी?

या नई सूची आएगी और तीन दिन की अध्यक्षी संगठन की राजनीतिक डायरी में एक दिलचस्प किस्सा बनकर रह जाएगी?

फिलहाल 20 अगस्त का नियुक्ति आदेश और 23 अगस्त का ‘होल्ड’ पत्र आमने-सामने हैं—और राजनीतिक गलियारों में व्यंग्यात्मक सवाल तैर रहा है—। “कैसा लगा मेरा मजाक…?”। और जवाब शायद फ्लेक्स-बैनर बनवा चुके समर्थकों के पास होगा—

“गजब… तीन दिन में ही इंटरवल आ गया!”

— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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