कोरबा कांग्रेस में सड़क पर ‘सियासी गड्ढे’!

एक मुद्दा, दो मोर्चे—लखन देवांगन के तिलिस्म को तोड़ने निकले कांग्रेसी पहले आपस में ही उलझे?
जिला कांग्रेस कमेटी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, उधर ‘श्याम सेना’ ने निगम घेराव का बजाया बिगुल—सवाल: शहर में कांग्रेस का असली सियासी इंजन किसके हाथ?
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की राजनीतिक विरासत बनाम श्यामनारायण सोनी का नया तेवर; इधर विधायक और कैबिनेट मंत्री लखन देवांगन विकास के मुद्दे पर बढ़ा रहे अपनी पकड़
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कोरबा की राजनीति में इन दिनों सड़कों के गड्ढों से ज्यादा दिलचस्प कांग्रेस के भीतर दिखाई दे रहे सियासी गड्ढे हैं।
मुद्दा एक है—शहर की जर्जर सड़कें, गड्ढे, जलभराव और जल निकासी।
मांग भी लगभग एक जैसी है—सड़क सुधरे, गड्ढे भरें और जनता को राहत मिले।
लेकिन लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस के मैदान अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं!
एक तरफ जिला कांग्रेस कमेटी शहर, कोरबा के अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर के लेटरहेड से कलेक्टर को ज्ञापन देकर शहर की जर्जर एवं दुर्घटनाजनक सड़कों के तत्काल पुनर्निर्माण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच और औद्योगिक परिवहन से बालको क्षेत्र में सड़कों के प्रबंधन में वित्तीय सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
दूसरी तरफ पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्यामनारायण सोनी ने इसी सड़क, गड्ढे और जल निकासी के मुद्दे को लेकर 27 अगस्त 2026 को नगर निगम साकेत भवन के शांतिपूर्ण सांकेतिक घेराव एवं प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है।
यानी जनता पूछ सकती है—
“मुद्दा एक… कांग्रेस दो क्यों?”
एक तरफ ज्ञापन, दूसरी तरफ घेराव—कांग्रेस में चल क्या रहा है?
जिला कांग्रेस कमेटी के ज्ञापन में वार्ड क्रमांक 31 अंतर्गत एसईसीएल से परिवर्तित रेलवे लाइन के समीप बनी सीसी सड़क की स्थिति सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों की खराब हालत का उल्लेख किया गया है।
इनमें चेक पोस्ट–लालघाट–रिंग रोड, रिंग रोड–गायत्री मंदिर–बालको बस स्टैंड, ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र, आरपी नगर, पुष्पलता कॉलोनी सहित अन्य मार्गों का उल्लेख दिखाई देता है।
मांगें भी स्पष्ट हैं—गड्ढों की स्थायी मरम्मत, निर्माण गुणवत्ता की जांच, नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करना।
लेकिन इसी बीच श्यामनारायण सोनी की ओर से नगर निगम आयुक्त को दिए गए पत्र में शहर की जर्जर सड़कों और जलभराव को लेकर सीधे घेराव एवं प्रदर्शन का रास्ता चुना गया है।
अब राजनीतिक सवाल बड़ा सीधा है—
क्या यह कांग्रेस की संयुक्त रणनीति है या एक ही मुद्दे पर राजनीतिक श्रेय की अलग-अलग दुकानें सज रही हैं?
डूबी कश्ती में रस्साकशी!
कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में कोरबा सीट गंवानी पड़ी। ऐसे समय में पार्टी के सामने पहली चुनौती सत्ता पक्ष से लड़ने से पहले अपने संगठन को एकजुट और धारदार दिखाने की है। लेकिन सड़क के एक ही मुद्दे पर अलग-अलग मोर्चेबंदी ने राजनीतिक गलियारों को चर्चा का मसाला दे दिया है।
व्यंग्य में स्थिति कुछ ऐसी दिख रही है—
कश्ती पहले ही मझधार में है, पानी अंदर आ रहा है और नाविक यह तय करने में लगे हैं कि चप्पू किसके हाथ रहेगा! कोई ज्ञापन लेकर कलेक्टर के पास पहुंच रहा है, कोई नगर निगम घेरने निकल रहा है।
जनता शायद पूछे—
“भैया, पहले तय तो कर लो कप्तान कौन है!”
असल मुकाबला तो लखन देवांगन से है
इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पक्ष यह है कि कांग्रेस की असली लड़ाई आपस में नहीं, बल्कि कोरबा विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन से है। देवांगन ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले कोरबा किले को भेदकर जीत दर्ज की और सरकार बनने के बाद कैबिनेट में जगह बनाई। अब सड़क और नगरीय विकास जैसे मुद्दों पर भी उनकी राजनीतिक परीक्षा है।
हाल में शहर के प्रमुख मार्गों के डामरीकरण के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास मद से लगभग साढ़े 17 करोड़ रुपये की स्वीकृति की बात सामने आने के बाद भाजपा और मंत्री समर्थकों के पास यह कहने का राजनीतिक आधार तैयार हो रहा है कि मंत्री शहर की सड़कों के लिए राशि ला रहे हैं। यही वह जगह है जहां कांग्रेस की चुनौती और कठिन हो जाती है।
कांग्रेस यदि सड़क को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है तो उसे सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता के सामने यह भी साबित करना होगा कि सरकार की स्वीकृतियों के बावजूद जमीन पर काम कहां अटका है, किस सड़क की क्या स्थिति है और जिम्मेदार कौन है।
जयसिंह बनाम ‘श्याम सेना’—अब शहर देखेगा किसमें कितना दम?
कोरबा कांग्रेस की राजनीति लंबे समय तक पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के इर्द-गिर्द प्रभावशाली रही है। संगठन, समर्थकों और चुनावी नेटवर्क में उनका पुराना अनुभव है। दूसरी ओर अब श्यामनारायण सोनी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतरने का ऐलान कर रहे हैं। ऐसे में यह आंदोलन केवल सड़क के गड्ढों की परीक्षा नहीं रहेगा।
यह कहीं न कहीं कांग्रेस के भीतर भी बताएगा कि—
जमीन पर कार्यकर्ता किसके साथ खड़ा है?
भीड़ जुटाने की क्षमता किसके पास है?
जनता के मुद्दे को आंदोलन में बदलने का दम किसमें है?
और सबसे बड़ा— लखन देवांगन के सामने कांग्रेस की तरफ से वास्तविक राजनीतिक चुनौती कौन खड़ी करेगा?
कांग्रेस के लिए खतरा—मंत्री कहीं दोनों गुटों की लड़ाई का राजनीतिक लाभ न उठा लें राजनीति में विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता होती है और सत्ता पक्ष के लिए विपक्ष की अंदरूनी खींचतान से बेहतर राजनीतिक अवसर शायद ही कोई हो। यदि कांग्रेस सड़क, गड्ढे और जलभराव जैसे सीधे जनहित के मुद्दे पर भी अलग-अलग ताकत दिखाती रही, तो मंत्री लखन देवांगन के लिए स्थिति राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो सकती है। वे विकास कार्यों और स्वीकृत राशि को सामने रखकर कह सकते हैं—
“आप लड़ते रहिए, हम काम करते हैं।”। और यदि स्वीकृत सड़क कार्य तेजी से जमीन पर उतर गए तो कांग्रेस के हाथ से मुद्दा भी निकल सकता है। इसलिए कांग्रेस के सामने समय कम और चुनौती बड़ी है। मंत्री के सामने भी सवाल कम नहीं हालांकि इस राजनीतिक रस्साकशी का अर्थ यह नहीं कि शहर की जर्जर सड़कों पर उठ रहे सवाल समाप्त हो जाते हैं। सत्ता में होने के कारण शहर विधायक और मंत्री लखन देवांगन से भी जनता परिणाम मांगेगी। स्वीकृति आना महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की अंतिम कसौटी सड़क पर चले वाहन का झटका है। यदि पैसा स्वीकृत होने के बाद भी सड़कें जर्जर रहती हैं, गड्ढे बने रहते हैं और बारिश में जलभराव होता है तो विपक्ष को मुद्दा मिलता रहेगा। इसलिए मंत्री के लिए भी असली राजनीतिक जीत तब होगी जब कागज की स्वीकृति सड़क पर डामर बनकर दिखाई दे।
कोरबा की राजनीति का नया एपिसोड—‘गड्ढा पुराण’
फिलहाल तस्वीर बड़ी रोचक है—
कांग्रेस का मुद्दा एक है।
ज्ञापन अलग है।
आंदोलन अलग है।
नेतृत्व के दावेदार कई हैं।
और सामने मंत्री लखन देवांगन हैं।
अब 27 अगस्त का प्रस्तावित प्रदर्शन यह भी बताएगा कि श्यामनारायण सोनी का यह दांव महज एक कार्यक्रम है या शहर कांग्रेस की राजनीति में किसी नई शक्ति के उभरने का संकेत। उधर पुराने राजनीतिक खिलाड़ी भी निश्चित रूप से पूरा खेल देख रहे होंगे। इसलिए कोरबा की जनता की नजर अब केवल सड़क के गड्ढों पर नहीं बल्कि कांग्रेस की इस सियासी रस्साकशी पर भी रहेगी। और इस पूरी कहानी पर फिलहाल सबसे सटीक व्यंग्य शायद यही है— “लखन का तिलिस्म तोड़ने निकले थे… पहले यह तय कर लो हथौड़ा किसके हाथ में है!”
अब देखना दिलचस्प होगा—कोरबा में किस कांग्रेसी में कितना दम: जयसिंह अग्रवाल की पुरानी राजनीतिक ताकत, संगठन की आधिकारिक कमान या मैदान में उतरती ‘श्याम सेना’? और इन सबके बीच यदि मंत्री लखन देवांगन सड़कें बनवाकर निकल गए, तो कांग्रेस की पूरी रस्साकशी कहीं ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ बनकर न रह जाए!
— ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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