कोरबा DMF फाइल्स – भाग 5 (फाइनल)

“अब जवाबदेही से बचना मुश्किल: CAG रिपोर्ट के बाद क्या होगी कार्रवाई या फाइलों में दब जाएगा हजारों करोड़ का सवाल?”
राष्ट्रीय खोजी श्रृंखला | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
EXCLUSIVE | CAG REPORT EXPOSES – FINAL PART
“₹13,101 करोड़ का सवाल… जवाब किसके पास?“
कोरबा/रायपुर। पांच भागों की इस खोजी श्रृंखला में हमने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की Performance Audit Report No. 05 of 2026 के आधार पर जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े उन तथ्यों को सामने रखा, जिन्होंने देशभर में चल रहे DMF मॉडल की पारदर्शिता, प्राथमिकता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करती, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देती है कि प्रक्रियाओं, योजना निर्माण, प्राथमिकता निर्धारण और निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमियां थीं, जिन पर सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या CAG रिपोर्ट केवल अभिलेख बनकर रह जाएगी?
भारत में CAG की रिपोर्टें केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं होतीं। वे संसद, विधानसभा, सरकार और लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के लिए जवाबदेही का आधार होती हैं।
ऐसे में अब प्रश्न यह है—
क्या इस रिपोर्ट पर समयबद्ध कार्रवाई होगी?
या… यह रिपोर्ट भी अन्य रिपोर्टों की तरह सरकारी फाइलों में दब जाएगी?
कोरबा ही नहीं… पूरे देश का प्रश्न यह केवल कोरबा की कहानी नहीं है। देश के सैकड़ों खनन जिलों में हजारों करोड़ रुपये DMF के माध्यम से खर्च किए जा रहे हैं। यदि CAG ने प्रक्रियागत कमियां चिन्हित की हैं, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर नीति सुधार का विषय भी बनता है।
अब किन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी?
राज्य सरकार
क्या CAG की प्रत्येक आपत्ति पर अनुपालन रिपोर्ट तैयार होगी?
क्या जिम्मेदारी तय की जाएगी?
क्या सुधारात्मक दिशा-निर्देश जारी होंगे?
जिला प्रशासन
क्या ग्रामवार परियोजनाओं की समीक्षा होगी?
क्या अधूरी योजनाएं पूरी की जाएंगी?
क्या 44 प्रतिशत वंचित गांवों के लिए अलग कार्ययोजना बनेगी?
DMF ट्रस्ट
क्या सभी निर्णय सार्वजनिक किए जाएंगे?
क्या सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा?
क्या प्रत्येक परियोजना का परिणाम सार्वजनिक होगा?
जनप्रतिनिधि
,जनता यह जानना चाहती है—
क्या अब वे CAG रिपोर्ट पर सार्वजनिक चर्चा करेंगे?
क्या विधानसभा और अन्य मंचों पर खनन प्रभावित गांवों के मुद्दे को प्राथमिकता देंगे?
ग्राम यात्रा की 10 जनहित मांगें
1. CAG रिपोर्ट पर समयबद्ध Action Taken Report (ATR) सार्वजनिक की जाए।
2. कोरबा DMF की सभी परियोजनाओं का Third Party Audit कराया जाए।
3. सभी DMF बैठकों के कार्यवृत्त सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएं।
4. ग्रामवार और परियोजनावार व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
5. 44 प्रतिशत वंचित गांवों के लिए विशेष विकास पैकेज तैयार किया जाए।
6. सभी अधूरी परियोजनाओं की समयसीमा तय कर उन्हें पूरा कराया जाए।
7. सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) अनिवार्य किया जाए।
8. प्रत्येक वर्ष DMF का सार्वजनिक “जन लेखा-जोखा” प्रस्तुत किया जाए।
9. खनन प्रभावित ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
10. CAG की सभी सिफारिशों के अनुपालन की निगरानी राज्य स्तर पर की जाए।
देश के लिए एक संदेश
कोयला केवल ऊर्जा नहीं देता…
वह उन गांवों की कीमत पर निकलता है—
जहां धूल उड़ती है…
जहां भूजल प्रभावित होता है…
जहां खेत और जंगल बदल जाते हैं…
जहां लोगों का जीवन खनन से सीधे प्रभावित होता है…
इसलिए DMF कोई सरकारी अनुदान नहीं— यह खनन प्रभावित नागरिकों का वैधानिक अधिकार है।
ग्राम यात्रा का अंतिम संपादकीय
यदि— ₹13,101 करोड़ जमा हुए,
₹10,253 करोड़ खर्च हुए,
और फिर भी बड़ी संख्या में प्रभावित गांव विकास से वंचित रहे... तो अब बहस केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि जवाबदेही की होनी चाहिए। यह समय आरोप लगाने का नहीं… बल्कि सत्य सामने लाने, व्यवस्था सुधारने और जनता का विश्वास मजबूत करने का है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की राष्ट्रीय मांग
“DMF की हर फाइल जनता के लिए खुले।”
“हर खर्च का सामाजिक अंकेक्षण हो।”
“हर जिम्मेदार संस्था CAG की आपत्तियों पर सार्वजनिक जवाब दे।”
“और खदान प्रभावित गांवों को उनका पहला अधिकार मिले।”
श्रृंखला समाप्त नहीं… अभियान जारी रहेगा। अगली खोजी श्रृंखला:
“THE KORBA PAPERS“
DMF, पर्यावरण, वन भूमि, CSR, पुनर्वास और सार्वजनिक धन से जुड़े दस्तावेज़ों का राष्ट्रीय स्तर पर दस्तावेज़-आधारित विश्लेषण।
सिर्फ ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क पर।
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