धमेचा बंधुओ का शहर में आतंक ??

एक के बाद एक विवादों में धमेचा बंधु! अब सरकारी अधिकारी को धमकी देने के मामले में एफआईआर, पुराने भूमि विवाद भी फिर चर्चा में
इनके द्वारा सरकारी कर्मचारी को इस तरह धमकियां दी गई
मंत्री लखन लाल देवांगन
जय सिंह अग्रवाल
संजू देवी राजपूत
भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ा सकते
तो क्या ये यहा के बाहुबली बन गए अपने आप को शासन प्रशासन से उपर समझ बैठे..?
जिन लोगों का नाम से एक सरकारी कर्मचारी को इन लोगों धमकी दी और शहर के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधियों के नाम उछाला उन्हें कोरबा की जनता ने अपने वोट देकर सम्मानित किया है!
राजस्व अभिलेख, सीमांकन विवाद और अब आपराधिक मामला—क्या प्रशासन करेगा समग्र जांच?
विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। शहर के चर्चित धमेचा बंधु राहुल बैग दिन दयाल मार्केट के पास एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर पालिक निगम कोरबा के एक स्वच्छता निरीक्षक को कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में थाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर क्रमांक 0657/2026 के अनुसार, अजय धामेचा एवं दीपक धामेचा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 3(5) एवं 351(3) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। शिकायत नगर निगम के स्वच्छता निरीक्षक उत्तम दास महंत ने दर्ज कराई है।
शिकायत के अनुसार, सरकारी ड्यूटी के दौरान मुख्य मार्ग पर कचरा फेंकने से रोकने पर कथित रूप से गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और प्रभाव का हवाला देकर डराने का प्रयास किया गया। एफआईआर में नगर निगम के अन्य कर्मचारियों का भी घटना के समय उपस्थित होना दर्ज है।
पुराने भूमि विवाद भी फिर सुर्खियों में… इन बाहुबली के कारनामे
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क द्वारा देखे गए राजस्व दस्तावेज़ों से यह सामने आता है कि धमेचा बंधुओं से संबंधित भूमि को लेकर पूर्व में सीमांकन, निर्माण रोकने, राजस्व जांच तथा खसरा संबंधी प्रशासनिक कार्यवाहियां की गई थीं। उपलब्ध अभिलेखों में तहसील कार्यालय द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने, सीमांकन कराने तथा निर्माण कार्य रोकने जैसे निर्देशों का उल्लेख है।
सुत्र बताते हैं कि जिस जगह दुकान का संचालन किया जा रहा है उस दुकान पर भी विवाद चल रहा है कब्जा का।
इन दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट है कि संबंधित भूमि मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही हुई है। हालांकि, इन मामलों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायालयों या सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही निर्धारित किया जाएगा।
अब उठ रहे हैं गंभीर सवाल
क्या सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान कथित रूप से धमकाने के मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई करेगी?
जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को ऐसे शहर के दबंगों पर विशेष ध्यान रखना उचित प्रतीत होता है।
क्या राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि विवादों और वर्तमान आपराधिक प्रकरण के बीच किसी पैटर्न की जांच की जाएगी?
क्या प्रशासन संबंधित भूमि मामलों की स्थिति और अनुपालन की स्वतंत्र समीक्षा करेगा?
फिलहाल पुलिस विवेचना जारी है और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इसी प्रकार, भूमि संबंधी विवादों पर अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व एवं न्यायिक मंचों द्वारा किया जाना शेष है।
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