राज्य समाचार

रायगढ़ कलेक्टोरेट में ACB की बड़ी कार्रवाई: राहत राशि जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने वाला बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार

Spread the love

 

सर्पदंश पीड़ित परिवार की सहायता राशि पर भी रिश्वतखोरी! 50 हजार रुपये के चेक के बदले मांगी गई घूस, ACB ने बिछाया जाल

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

रायगढ़।   छत्तीसगढ़ में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में रायगढ़ कलेक्टोरेट कार्यालय में पदस्थ एक क्लर्क को राहत एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित सहायता राशि जारी करने के एवज में कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।

 

 

मिली जानकारी के अनुसार, राहत एवं आपदा प्रबंधन शाखा में पदस्थ क्लर्क राजकुमार सिदार पर आरोप है कि उसने एक पीड़ित परिवार की स्वीकृत आर्थिक सहायता राशि बैंक खाते में हस्तांतरित कराने के लिए रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद ACB ने सत्यापन कर ट्रैप की योजना बनाई और आरोपी को कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार कर लिया।

क्या है पूरा मामला?

 

जानकारी के अनुसार, बुलाकी गांव निवासी विजय सिदार की पत्नी का सर्पदंश से निधन हो गया था। घटना के बाद शासन की राहत योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया गया था।

 

आवेदन का परीक्षण होने के बाद सहायता राशि स्वीकृत हो गई, लेकिन आरोप है कि राशि लाभार्थी के खाते में भेजने की प्रक्रिया पूरी करने के बदले संबंधित क्लर्क ने रिश्वत की मांग की।

 

50 हजार रुपये के चेक के साथ ACB का ट्रैप

 

शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी ACB को दी। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ACB ने ट्रैप की योजना बनाई।

बताया गया कि शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपये का धनादेश (चेक) लेकर संबंधित कर्मचारी के पास भेजा गया। इसी दौरान ACB की टीम ने आरोपी क्लर्क को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के बाद कलेक्टोरेट परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।

भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल

 

यह कार्रवाई एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए यदि पीड़ितों को भी रिश्वत देनी पड़े, तो व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं में केवल आरोपी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई ही नहीं, बल्कि संबंधित शाखा की कार्यप्रणाली की भी विभागीय समीक्षा आवश्यक है, ताकि भविष्य में पात्र हितग्राहियों को बिना किसी अवैध मांग के योजनाओं का लाभ मिल सके।

 

जांच जारी

 

ACB द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले में जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही दोष सिद्ध होना तय होगा।

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की टिप्पणी

सरकारी राहत किसी अधिकारी या कर्मचारी की कृपा नहीं, बल्कि पात्र नागरिक का वैधानिक अधिकार है। यदि राहत राशि के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि पीड़ित परिवार के साथ संवेदनहीनता का भी गंभीर उदाहरण है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है।”

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button