कोरबा प्रेस क्लब के मंच से गरजी राजनीति! “कोरबा प्रेस क्लब के मंच से सियासी विस्फोट!” • जय सिंह का शहर विधायक पर हमला… • अरुण साव का पलटवार • पत्रकारों के शपथ समारोह में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
कोरबा प्रेस क्लब के मंच से गरजी राजनीति!
“कोरबा प्रेस क्लब के मंच से सियासी विस्फोट!” • जय सिंह का शहर विधायक पर हमला… • अरुण साव का पलटवार • पत्रकारों के शपथ समारोह में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा।
कोरबा प्रेस क्लब का शपथ ग्रहण समारोह शुक्रवार को पत्रकारिता के सम्मान का मंच बनकर शुरू हुआ, लेकिन कार्यक्रम के समापन तक यह प्रदेश की चर्चित राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गया। मंच पर सत्ता और विपक्ष के शीर्ष चेहरे एक साथ मौजूद थे और कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह राजनीतिक हो गया।
कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव, उद्योग, वाणिज्य एवं श्रम मंत्री तथा कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन और पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जय सिंह अग्रवाल एक ही मंच पर उपस्थित थे।
प्रेस क्लब ने लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए सत्ता और विपक्ष दोनों को समान सम्मान और स्थान दिया।
सबसे बड़ा सवाल
क्या यह केवल भाषण था या कोरबा की राजनीति का नया संदेश?
धन्यवाद से शुरू हुआ भाषण, राजनीतिक हमले पर खत्म हुआ
पूर्व राजस्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रेस क्लब और पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए की। इसके बाद उन्होंने शहर के विकास, नगर सरकार के कार्यकाल और पिछले ढाई वर्षों के कार्यों को लेकर राज्य सरकार तथा विशेष रूप से कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन पर राजनीतिक सवाल उठाए।
मंच पर बैठे मंत्री, जनप्रतिनिधि और सभागार में मौजूद पत्रकारों सहित सभी लोग कुछ क्षणों के लिए अचंभित रह गए। पत्रकारों के सम्मान का मंच अचानक राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
अरुण साव ने भी दिया जवाब
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पत्रकारों ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से जय सिंह अग्रवाल के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया मांगी। उपमुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। इस तरह मंच पर शुरू हुई राजनीतिक बहस मीडिया से बातचीत तक जारी रही।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव की कही पंक्तियां
“असफलता एक चुनौती है, उसे स्वीकार करो। कमी क्या रह गई, देखो और विचार करो। संघर्ष का मैदान छोड़कर न भागो तुम, जब तक सफल न हो नींद-चैन त्यागो तुम। कुछ किए बिना किसी की जय-जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।”
सबसे बड़ी चर्चा
- क्या पत्रकारों के मंच से जनता तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति बनाई गई थी?
- क्या यह कोरबा की आगामी राजनीतिक लड़ाई का संकेत है?
- क्या प्रेस क्लब का मंच अनजाने में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया?
इन सवालों पर राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन इतना तय है कि इस कार्यक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
प्रेस क्लब ने दिया लोकतंत्र का संदेश
राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी रहा कि कोरबा प्रेस क्लब ने सत्ता और विपक्ष दोनों को एक ही मंच पर आमंत्रित कर लोकतांत्रिक संवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की निष्पक्ष परंपरा का परिचय दिया।
यही इस समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि भी रही।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क का विश्लेषण
पत्रकारों का मंच संवाद का मंच होता है। यदि उसी मंच से सत्ता और विपक्ष जनता के सामने अपने-अपने विचार रखते हैं, तो यह लोकतंत्र की जीवंतता का भी संकेत है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऐसे मंच पत्रकारिता की गरिमा, निष्पक्षता और सार्वजनिक विमर्श के मूल उद्देश्य को बनाए रखें।
कार्यक्रम में व्यक्त राजनीतिक विचार संबंधित वक्ताओं के हैं। यदि किसी पक्ष की ओर से अतिरिक्त स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादक
अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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