फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सरकारी खजाने तक! महिला डॉक्टर गिरफ्तार, 15 संदिग्ध मामलों की जांच में स्वास्थ्य तंत्र के कई चेहरे रडार पर
सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी न्यायिक रिमांड पर जेल भेजी गईं, कई डॉक्टर, अधिवक्ता, बैंककर्मी और सरकारी कर्मचारी जांच के घेरे में
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
बिलासपुर छत्तीसगढ़ में सरकारी मुआवजा व्यवस्था से जुड़े सबसे सनसनीखेज मामलों में से एक फर्जी स्नेक बाइट (सर्पदंश) मुआवजा घोटाले में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने दो अलग-अलग मामलों में कथित रूप से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शाया, जिसके आधार पर सरकारी मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी घोटाले की सबसे अहम कड़ी
पुलिस जांच के अनुसार, तोरवा थाना क्षेत्र में तहसील कार्यालय के नायब नाजीर की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामलों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले। जांच में सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सिम्स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था और कथित तौर पर सर्पदंश से मौत की रिपोर्ट तैयार की गई।
इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकारी मुआवजा लेने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिससे पूरे मामले ने आपराधिक साजिश का रूप ले लिया।
एक-एक कर खुल रही नेटवर्क की परतें
इस मामले में मृतकों के परिजनों के साथ-साथ एक अधिवक्ता को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस के अनुसार पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताए जा रहे अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी फरार हैं।
इसके अलावा हाल ही में अधिवक्ता, बैंककर्मी, कथित वकील और तहसील कार्यालय के दैनिक वेतनभोगी चालक सहित कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
एक और मामले में भी डॉक्टर पर कार्रवाई की तैयारी
डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी अलग प्रकरण दर्ज है। आरोप है कि एक व्यक्ति की मौत को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश बताया गया, जबकि बाद की जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक सामने आया। इस मामले में भी पुलिस डॉक्टर से प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ करेगी।
पुराना रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2025 में भी बिल्हा क्षेत्र में एक मामले में जहर से हुई मौत को कथित रूप से सर्पदंश दर्शाने के आरोप में डॉ. प्रियंका सोनी का नाम सामने आया था। उस मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई की थी।
15 संदिग्ध मामलों की जांच, कई डॉक्टर रडार पर
बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में सर्पदंश से फर्जी मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा लेने के कम से कम 15 मामलों की जांच जारी है। दस्तावेजों की समीक्षा, पोस्टमार्टम रिपोर्टों का परीक्षण और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, सिम्स के 4 से 5 चिकित्सक भी जांच के दायरे में हैं। यदि जांच में उनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह मामला केवल एक फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का नहीं, बल्कि सरकारी मुआवजा व्यवस्था, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, चिकित्सा नैतिकता और प्रशासनिक निगरानी की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग के सबसे गंभीर मामलों में से एक माना जाएगा।
अब निगाहें अगली कार्रवाई पर
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में नए साक्ष्यों के आधार पर और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
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