THE BALCO PAPERS : बॉक्साइट, भारत और बंद फाइलों का सच SESSION–2 | FINAL EPISODE–1 BALCO–VEDANTA का काला सच

एक ही छह वर्षों के लिए उत्पादन के तीन अलग-अलग आंकड़े — आखिर सच कौन सा है?
विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा | नई दिल्ली। भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) और उसके रणनीतिक साझेदार वेदांता समूह से जुड़े दस्तावेजों के अध्ययन में एक ऐसा तथ्य सामने आया है, जो केवल एक कंपनी का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति, सरकारी हिस्सेदारी और नियामक निगरानी से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन सकता है।
2006-07 से 2011-12 की समान अवधि के लिए अलग-अलग विभागों में प्रस्तुत दस्तावेजों में एल्यूमिनियम उत्पादन के अलग-अलग आंकड़े दर्ज दिखाई देते हैं। यदि ये दस्तावेज वास्तविक हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि सरकारी एजेंसियों के समक्ष एक ही अवधि के लिए अलग-अलग उत्पादन आंकड़े क्यों प्रस्तुत किए गए?
पहला बड़ा तथ्य
दस्तावेजों के अनुसार
CG Environment Conservation Board के समक्ष एक अवधि में लगभग 17.96 लाख मीट्रिक टन एल्यूमिनियम उत्पादन का उल्लेख मिलता है।
जबकि अन्य दस्तावेजों एवं उत्पादन विवरणों में इसी अवधि के लिए लगभग 22.03 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का उल्लेख दिखाई देता है।
दोनों के बीच लगभग 4.24 लाख मीट्रिक टन का अंतर दिखाई देता है।
यह अंतर सामान्य लेखांकन त्रुटि नहीं माना जा सकता और इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक हो सकती है।
दूसरा बड़ा तथ्य
उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि
कवार्धा एवं मैनपाट की खदानों से लगभग 63.84 लाख मीट्रिक टन बॉक्साइट प्राप्त हुई।
उसी आधार पर लगभग 31.92 लाख मीट्रिक टन एलुमिना बनने का अनुमान लगाया गया।
जबकि कंपनी द्वारा 10.07 लाख मीट्रिक टन आयातित एलुमिना का भी उपयोग दर्शाया गया है।
यहीं से सबसे बड़ा प्रश्न उठता है—
जब घरेलू बॉक्साइट से पर्याप्त मात्रा में एलुमिना उपलब्ध थी, तब अतिरिक्त आयात की आवश्यकता क्यों पड़ी?
तीसरा बड़ा तथ्य
इसी अवधि के दस्तावेजों में विभिन्न विभागों के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है।
यही कारण है कि वर्षों पहले इस विषय पर शिकायतें विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंचीं और आरटीआई के माध्यम से कस्टम तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग से भी सूचनाएं प्राप्त की गईं।
सरकार की भी हिस्सेदारी
यह याद रखना आवश्यक है कि 2001 के विनिवेश के बाद भी BALCO में भारत सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रही।
इसलिए यदि सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी से संबंधित उत्पादन, आयात अथवा स्टॉक के आंकड़ों में कोई विसंगति सिद्ध होती है, तो उसका प्रभाव केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक हित और सरकारी हिस्सेदारी से भी जुड़ सकता है।
सात सवाल जिनका जवाब देश जानना चाहता है
1. एक ही अवधि के लिए अलग-अलग उत्पादन आंकड़े क्यों दिखाई देते हैं?
2. वास्तविक उत्पादन कितना था?
3. घरेलू बॉक्साइट उपलब्ध होने के बावजूद एलुमिना आयात क्यों किया गया?
4. आयातित एलुमिना का वास्तविक उपयोग कहाँ हुआ?
5. क्या सभी आंकड़े नियामक एजेंसियों के समक्ष एक समान प्रस्तुत किए गए थे?
6. क्या उस समय किसी स्वतंत्र तकनीकी या फोरेंसिक ऑडिट की आवश्यकता थी?
7. यदि दस्तावेजों में विसंगतियां हैं, तो उनकी जवाबदेही किसकी होगी?
ग्राम यात्रा की मांग
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहा है।
हम केवल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह मांग करते हैं कि—
पूरे प्रकरण की स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए।
उत्पादन, आयात और डिस्पैच के सभी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए।
संबंधित केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियां सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखें।
यदि कोई विसंगति नहीं है तो उसे प्रमाण सहित स्पष्ट किया जाए।
अगले एपिसोड में...
THE BALCO PAPERS – SESSION–2 | FINAL EPISODE–2
“10.07 लाख टन आयातित एलुमिना, 7.13 लाख टन स्टॉक का अंतर और दस्तावेजों में छिपा सबसे बड़ा सवाल”
क्या वास्तव में आयातित एलुमिना की आवश्यकता थी, या दस्तावेज़ किसी और कहानी की ओर संकेत करते हैं?
पढ़िए अगला अंतिम एपिसोड — केवल ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क पर।
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