देखिए मुख्यमंत्री महोदय, स्वास्थ्य मंत्री महोदय… क्या यही है सुशासन? Emergency Ward में मरीज भगवान भरोसे? एम एस की व्यवस्था ! परिजनों से यूरिन बैग खाली कराने का निर्देश, कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर गंभीर सवाल


देखिए मुख्यमंत्री महोदय, स्वास्थ्य मंत्री महोदय… क्या यही है सुशासन?
Emergency Ward में मरीज भगवान भरोसे? एम एस की व्यवस्था ! परिजनों से यूरिन बैग खाली कराने का निर्देश, कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर गंभीर सवाल
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
“सरकारी अस्पताल में यदि ICU के मरीज की देखभाल भी परिजन करेंगे, तो फिर अस्पताल का जिम्मेदार स्टाफ आखिर किसलिए?”
कोरबा। जिला मेडिकल कॉलेज सह जिला चिकित्सालय, कोरबा एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला ICU/इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मरीज की देखभाल से जुड़ा है। मरीज के परिजनों का आरोप है कि यूरिन कैथेटर बैग पूरी तरह भर जाने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने अपेक्षित सहायता देने के बजाय कथित रूप से यह कह दिया कि यह कार्य परिजन या अटेंडर करें।

ग्राम यात्रा न्यूज़ के पास ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से हुई पूरी बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित है, जिसे वे कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, मानवाधिकार आयोग तथा अन्य सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। जिसमें साफ तौर पर यही व्यवस्था सभी मरीजों के लिए लागू होने की बात पूरी जिम्मेदारी से कही जा रही है। वहीं विरोध करने पर डॉक्टर कहते है अगर बेहतर उपचार और सुविधाएं चाहिए तो सरकारी अस्पताल में भर्ती क्यों करवाये हो निजी अस्पताल ले जाते !

सबसे बड़ा सवाल— ICU और एमरजेंसी वार्ड में जिम्मेदार कौन?
ICU और एमरजेंसी वार्ड ऐसी जगह है जहाँ भर्ती अधिकांश मरीज स्वयं अपनी देखभाल करने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में यदि आवश्यक नर्सिंग देखभाल के लिए भी परिजनों पर निर्भर रहना पड़े, तो यह केवल एक मरीज का मामला नहीं बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
यदि मरीज के साथ कोई अटेंडर मौजूद न हो…
तो उसकी देखभाल कौन करेगा?
यदि मरीज के परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हों, दूर रहते हों या अस्पताल में लगातार उपस्थित न रह सकें…
तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
40 से अधिक वार्ड बॉय आखिर कर क्या रहे हैं?
शिकायतकर्ताओं का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मरीजों के परिजनों को ही यूरिन बैग खाली करना पड़े, अपशिष्ट फेंकना पड़े और बुनियादी देखभाल करनी पड़े, तो अस्पताल में तैनात 40 से अधिक वार्ड बॉय और सहायक स्टाफ की भूमिका आखिर क्या रह जाती है?
क्या वार्ड बॉय केवल कागजों में मौजूद हैं?
क्या ड्यूटी के समय पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध था?
यदि स्टाफ मौजूद था तो मरीज के परिजनों को यह कार्य क्यों करना पड़ा?
कथित ऑडियो में डॉक्टर की टिप्पणी ने बढ़ाए सवाल
शिकायतकर्ता का दावा है कि डॉक्टर से बातचीत के दौरान कथित रूप से कहा गया कि यदि बेहतर सुविधाएं चाहिए तो मरीज को निजी अस्पताल ले जाएं।
यदि जांच में ऑडियो की सत्यता स्थापित होती है, तो यह सरकारी अस्पतालों की संवेदनशीलता, मरीजों के अधिकार और सेवा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
संक्रमण हुआ तो जिम्मेदार कौन?
ICU में भर्ती मरीज संक्रमण के सबसे अधिक जोखिम वाले मरीजों में होते हैं। यदि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के बजाय परिजनों से ऐसे कार्य कराए जाते हैं और इससे संक्रमण या अन्य चिकित्सीय जटिलता उत्पन्न होती है, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
क्या अस्पताल प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है?
अब एमएस डॉ. गोपाल कंवर से सीधे सवाल
- आपने वार्डो में यह कैसी व्यवस्था लागू की है की परिजन ही अपशिष्ट ले जाएंगे।
- रात्रि समय मे एमरजेंसी वार्ड में कितने वार्ड बॉय और नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर रहते है?
- यदि स्टाफ मौजूद था तो परिजनों को यह कार्य क्यों करना पड़ रहा है?
- क्या ICU में मरीजों का अपशिष्ट प्रबंधन परिजनों से कराने का कोई लिखित प्रोटोकॉल है?
- यदि नहीं, तो संबंधित कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
- यदि इस दौरान मरीज को संक्रमण होता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
- क्या अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगा?
सरकार से भी जवाब जरूरी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री से भी अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की ICU औए एमरजेंसी वार्ड के सेवाओं की नियमित निगरानी हो रही है?
यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?
जनहित में मांग
- पूरे ऑडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- CCTV फुटेज एवं ड्यूटी रोस्टर की जांच की जाए।
- ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ एवं वार्ड बॉय की भूमिका की जांच हो।
- यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास कायम रहे।
संपादकीय टिप्पणी
सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल आम नागरिक की अंतिम उम्मीद होते हैं। यदि ICU और एमरजेंसी वार्ड जैसे अत्यंत संवेदनशील वार्ड से भी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, तो उनका निष्पक्ष परीक्षण होना आवश्यक है। शिकायतकर्ता द्वारा ऑडियो साक्ष्य होने का दावा किया गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक कर्मचारी की नहीं बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही का विषय होगा।

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