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दो साल से अटका भुगतान, ठेकेदारों का धैर्य जवाब पर — कोरबा से उठी चेतावनी, अब सरकार के पाले में फैसला

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रायपुर के महाआंदोलन के बाद कोरबा में ज्ञापन; कहा—भुगतान नहीं मिला तो निर्माण व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

 

कोरबा।  छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का लंबित भुगतान अब केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि मानवीय और प्रशासनिक संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है। लगभग दो वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण प्रदेशभर के पी.एच.ई. ठेकेदारों में गहरा असंतोष है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में 6 जुलाई 2026 को रायपुर में हुए राज्यव्यापी आंदोलन के बाद अब जिलों में भी दबाव की रणनीति शुरू हो गई है।

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इसी क्रम में 9 जुलाई 2026 को कोरबा कांट्रेक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में जिले के ठेकेदारों ने अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतानों का तत्काल निराकरण करने की मांग की। इस दौरान कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल को भी ज्ञापन सौंपा गया।

 

 

भुगतान नहीं, तो विकास कैसे?

एसोसिएशन का कहना है कि भुगतान में लगातार हो रही देरी ने ठेकेदारों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। संगठन के अनुसार कई ठेकेदार भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। कुछ मामलों में आत्महत्या, गंभीर मानसिक अवसाद, हार्ट अटैक और लकवे जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। यदि यह स्थिति बनी रही तो विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।

सरकार से निर्णायक हस्तक्षेप की मांग

 

ज्ञापन में राज्य सरकार से मांग की गई है कि लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटारा किया जाए ताकि निर्माण कार्य बाधित न हों और ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति सामान्य हो सके।

 

एसोसिएशन ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग तथा श्रम मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन से भी मुलाकात का समय लिया गया है। उनके मुख्यालय लौटने के बाद प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप का अनुरोध करेगा।

 

कोरबा में बड़ी संख्या में जुटे ठेकेदार

 

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, सचिव असलम खान, कोषाध्यक्ष संतोष खरे सहित जिले के अनेक ठेकेदार उपस्थित रहे।

अब निगाह सरकार के फैसले पर

 

यह मामला केवल ठेकेदारों के भुगतान का नहीं, बल्कि उन विकास परियोजनाओं का भी है जिन पर जनता की बुनियादी सुविधाएं निर्भर करती हैं। यदि भुगतान का संकट जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो इसका प्रभाव निर्माण कार्यों, रोजगार और विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

 

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—

क्या सरकार ठेकेदारों की इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर लंबित भुगतानों पर त्वरित निर्णय लेगी, या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा?

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