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क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है? BALCO में सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल, जिला प्रशासन से लेकर केंद्र तक जवाबदेही की मांग

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विशेष खोजी रिपोर्ट

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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कोरबा।

देश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल BALCO परिसर को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, कोरबा द्वारा वर्ष 2023 में तैयार निरीक्षण रिपोर्टों एवं कारण बताओ नोटिसों में ऐसी अनेक कमियों और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है, जो सीधे तौर पर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी हुई हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि निरीक्षण में इन कमियों का उल्लेख किया गया था तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? यदि कमियों का निराकरण नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के विरुद्ध कौन-सी दंडात्मक कार्रवाई की गई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई?


निरीक्षण में क्या-क्या सामने आया?

दस्तावेज़ों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कथित रूप से निम्न बिंदु चिन्हित किए गए—

  • अत्यधिक तापमान वाले क्षेत्रों में श्रमिक कार्यरत पाए गए।
  • अग्निशमन उपकरणों के रखरखाव एवं रिफिलिंग तिथि संबंधी कमियां।
  • प्रेशर वेसल्स पर आवश्यक सुरक्षा मार्किंग का अभाव।
  • दुर्घटना एवं खतरनाक घटनाओं के रजिस्टर का संधारण नहीं।
  • निरीक्षण रजिस्टर उपलब्ध नहीं होना।
  • योग्य चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति संबंधी सवाल।
  • एलपीजी टैंक एवं हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसे खतरनाक पदार्थों पर आवश्यक पहचान चिन्ह एवं लेबलिंग की कमी।
  • श्रमिकों के चिकित्सीय परीक्षण अभिलेखों में अनियमितताओं का उल्लेख।
  • कुछ क्षेत्रों में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) के उपयोग एवं उपलब्धता को लेकर आपत्तियां।
  • निर्माण परियोजना में सुरक्षा हेलमेट, ओवरटाइम भुगतान, रजिस्टर संधारण एवं आपदा प्रबंधन योजना संबंधी प्रश्न।

यदि दस्तावेज़ों में वर्णित ये कमियां वास्तव में मौजूद थीं, तो यह केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि श्रमिक सुरक्षा का गंभीर मामला बन जाता है।


सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है?

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक मामलों में श्रमिक सुरक्षा को मौलिक अधिकारों से जोड़ा है।

Consumer Education and Research Centre vs Union of India (1995) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षित कार्यस्थल और स्वास्थ्य संरक्षण संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

M.C. Mehta vs Union of India (Oleum Gas Leak Case, 1987) में न्यायालय ने यह सिद्धांत स्थापित किया कि खतरनाक उद्योगों पर उच्चतम स्तर की जिम्मेदारी (Absolute Liability) लागू होती है और वे सुरक्षा चूक के लिए उत्तरदायी होते हैं।

BALCO Employees Union vs Union of India (2002) में भी सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि औद्योगिक गतिविधियों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और कानूनों का पालन अनिवार्य है।


उद्योग नीति और कानून क्या कहते हैं?

भारत की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था निम्न प्रमुख प्रावधानों पर आधारित है—

  • कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7A – श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करना।
  • धारा 41B, 41C – खतरनाक प्रक्रियाओं में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय।
  • धारा 38 – अग्नि सुरक्षा प्रबंधन।
  • धारा 107 एवं 109 – दुर्घटना अभिलेख और सुरक्षा रिकॉर्ड।
  • भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 – निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा एवं सेवा शर्तें।
  • Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 – सुरक्षित कार्यस्थल की वैधानिक जिम्मेदारी।

सबसे बड़ा सवाल

यदि निरीक्षण रिपोर्टों में इतने गंभीर बिंदुओं का उल्लेख हुआ था तो—

  • क्या सुधारात्मक कार्रवाई समय पर हुई?
  • क्या संबंधित विभागों ने अनुपालन की जांच की?
  • क्या जिला प्रशासन को अंतिम अनुपालन रिपोर्ट मिली?
  • क्या राज्य शासन को इसकी जानकारी दी गई?
  • क्या केंद्र सरकार के श्रम एवं उद्योग मंत्रालय तक रिपोर्ट पहुंची?
  • या फिर फाइलें केवल कागजों तक सीमित रह गईं?

क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार?

कोरबा पहले भी औद्योगिक दुर्घटनाओं का गवाह रहा है। ऐसे में यदि निरीक्षण में चिन्हित कमियों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती तो यह जनहित का गंभीर विषय बनता है।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क यह प्रश्न उठाता है कि श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता क्यों नहीं है? यदि सभी कमियों का निराकरण हो चुका है तो उसकी सार्वजनिक जानकारी सामने लाई जानी चाहिए। और यदि नहीं हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।


हमारी मांग

  1. जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच।
  2. राज्य शासन के श्रम एवं उद्योग विभाग द्वारा अनुपालन ऑडिट।
  3. केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा विशेष निरीक्षण।
  4. सभी अनुपालन रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए।
  5. श्रमिक सुरक्षा की वर्तमान स्थिति पर संयुक्त तकनीकी जांच कराई जाए।

(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध निरीक्षण दस्तावेज़ों एवं कारण बताओ नोटिसों पर आधारित है। BALCO प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व संबंधित विभागों, निरीक्षण रिपोर्टों एवं अनुपालन अभिलेखों का स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है।)

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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