छत्तीसगढ़ के 36 हजार अधिवक्ताओं के हित में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री को सौंपा गया 11 सूत्रीय मांग पत्र


अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने की मांग हुई तेज, मुख्यमंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ के हजारों अधिवक्ताओं के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार पाराशर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से मुलाकात कर अधिवक्ताओं के हितों से संबंधित 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में विधि व्यवसाय कर रहे लगभग 36 हजार अधिवक्ताओं के सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक हितों की सुरक्षा के लिए विभिन्न योजनाओं एवं कानूनी प्रावधानों को लागू करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने मांगों पर सकारात्मक चर्चा करते हुए आवश्यक पहल का आश्वासन दिया है।

अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम की मांग बनी प्रमुख मुद्दा
मांग पत्र में सबसे महत्वपूर्ण मांग छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की रही। परिषद का कहना है कि प्रदेश में अधिवक्ताओं को उनके कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान कई बार अनावश्यक दबाव, धमकी, उत्पीड़न एवं पूर्वाग्रहपूर्ण कार्यवाहियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अधिवक्ताओं की सुरक्षा और स्वतंत्र कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून की आवश्यकता है।
परिषद ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण विधेयक-2020 के प्रारूप को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। बताया गया कि 2 मार्च 2026 को विधि एवं विधायी कार्य मंत्री Gajendra Yadav की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विधेयक के महत्वपूर्ण प्रावधानों को अनुमोदन मिल चुका है और अब इसे आगामी विधानसभा सत्र में पारित किया जाना शेष है।
कर्नाटक और तेलंगाना की तर्ज पर कानून की मांग
विधिज्ञ परिषद ने मांग की कि जिस प्रकार Karnataka और Telangana में अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू है, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी यह कानून लागू किया जाए ताकि अधिवक्ताओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जा सके।
न्याय व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान केवल किसी एक वर्ग का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरी न्याय व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ प्रश्न है। अधिवक्ता न्यायालय और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, इसलिए उनके अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत बनाती है।
अधिवक्ता समाज की उम्मीदें बढ़ीं
मुख्यमंत्री द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर अब ठोस निर्णय लिया जा सकता है। यदि अधिवक्ता संरक्षण विधेयक विधानसभा में पारित होता है तो यह छत्तीसगढ़ के विधिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।
मुख्य बिंदु
प्रदेश के लगभग 36 हजार अधिवक्ताओं के हित में 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।
अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की प्रमुख मांग।
मुख्यमंत्री ने मांगों पर सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया।
अधिवक्ता संरक्षण विधेयक-2020 का प्रारूप पूर्व में अनुमोदित।
आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक पारित होने की उम्मीद।
अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर प्रदेशभर में बढ़ी अपेक्षाएं।
“अधिवक्ताओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा ही मजबूत न्याय व्यवस्था की आधारशिला है।”
– ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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