कोरबा में राजस्व व्यवस्था पर बड़ा सवाल: एक ही जिले में दो नियम क्यों? ऑनलाइन शासन के दावों के बीच जनता को अब भी कार्यालयों के चक्कर!

विशेष खोजी रिपोर्ट – ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार लगातार डिजिटल प्रशासन, पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस की बात कर रही है। मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व विभाग तक दावा किया जाता है कि आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, इसलिए राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है। लेकिन कोरबा जिले से सामने आए दो राजस्व आदेश अब कई असहज और गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
एक आदेश में ऑनलाइन आवेदन, ऑनलाइन जांच रिपोर्ट और ऑनलाइन निराकरण का उल्लेख मिलता है, जबकि दूसरे प्रकरण में पारंपरिक कार्यालयीन प्रक्रिया दिखाई देती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोरबा जिले में राजस्व नियम व्यक्ति, क्षेत्र या परिस्थितियों के हिसाब से बदल रहे हैं, या फिर शासन की ऑनलाइन व्यवस्था धरातल पर समान रूप से लागू नहीं हो रही है?
क्या कोरबा में अलग चल रहा है राजस्व प्रशासन?
यदि राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन करना है, तो फिर एक ही जिले में दो प्रकार की प्रक्रिया क्यों दिखाई दे रही है?
यदि एक नागरिक का कार्य ऑनलाइन हो सकता है, तो दूसरे नागरिक को कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
यदि दोनों प्रक्रियाएं वैधानिक हैं, तो जनता को यह स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही कि किस स्थिति में कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
एसडीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिरकार कोरबा जिले में राजस्व प्रकरणों के संचालन में एकरूपता क्यों नहीं दिखाई दे रही।
जनता के मन में स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठ रहे हैं—
क्या सभी आवेदकों को समान सुविधा मिल रही है?
क्या ऑनलाइन प्रणाली का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है?
क्या कुछ मामलों में अनावश्यक रूप से कार्यालयीन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है?
क्या राजस्व अधिकारियों द्वारा शासन के डिजिटल मॉडल को पूरी तरह लागू किया जा रहा है?
यह प्रश्न सीधे-सीधे संबंधित राजस्व प्रशासन और एसडीएम स्तर की कार्यप्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं।
सुशासन की भावना पर लग सकता है प्रश्नचिह्न
छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य प्रशासन को पारदर्शी, सरल और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी व्यवस्था में नागरिक को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं।
यही कारण है कि शासन ने अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने का निर्णय लिया था। यदि इसके बावजूद अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है, तो यह विषय केवल एक प्रकरण तक सीमित नहीं रह जाता बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर देता है।
कलेक्टर कोरबा से उठ रही हस्तक्षेप की मांग
जनहित में अब यह अपेक्षा की जा रही है कि कलेक्टर कोरबा इस पूरे विषय का संज्ञान लें और जिले की सभी तहसीलों एवं राजस्व न्यायालयों में अपनाई जा रही प्रक्रिया की समीक्षा कराएं।
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि—
✔ किन मामलों में ऑनलाइन प्रक्रिया अनिवार्य है?
✔ किन परिस्थितियों में कार्यालयीन प्रक्रिया अपनाई जाती है?
✔ क्या सभी नागरिकों को समान सुविधा मिल रही है?
✔ क्या शासन के निर्देशों का पूर्ण पालन हो रहा है?
✔ यदि नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
सबसे बड़ा सवाल
“जब छत्तीसगढ़ सरकार डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की बात कर रही है, तो कोरबा में अब भी आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?”
और यदि वास्तव में ऑनलाइन व्यवस्था लागू है, तो फिर एक ही जिले में दो अलग-अलग तस्वीरें क्यों दिखाई दे रही हैं?
क्या कोरबा में राजस्व प्रक्रिया में एकरूपता नहीं? एसडीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, कलेक्टर से जांच की मांग”
यह रिपोर्ट उपलब्ध राजस्व आदेशों के आधार पर जनहित में प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े प्रश्न उठाती है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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