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BALCO राखड़ डैम जांच रिपोर्ट का बड़ा खुलासा! 2023 में जांच में मिला अतिरिक्त कब्जा, 2026 तक कार्रवाई नहीं – आखिर किसके संरक्षण में दबी है फाइल?

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ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क | विशेष खोजी रिपोर्ट

कोरबा। कोरबा जिले में BALCO के राखड़ डैम को लेकर वर्ष 2023 में तैयार राजस्व जांच प्रतिवेदन अब प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। जांच रिपोर्ट में राखड़ डैम क्षेत्र में अतिरिक्त कब्जा एवं अतिरिक्त प्रभावित भूमि का उल्लेख किया गया, लेकिन सवाल यह है कि यदि जांच में तथ्य मिले थे तो कार्रवाई कहां है?

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करीब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक हुई और न ही जनता को यह बताया गया कि जांच रिपोर्ट का अंतिम निष्कर्ष क्या निकला।


🔥 सबसे बड़ा सवाल – क्या उद्योगों के लिए अलग कानून है?

जब किसी गरीब किसान, आदिवासी या आम नागरिक पर राजस्व नियमों के उल्लंघन का आरोप लगता है तो नोटिस, सीमांकन और कार्रवाई तत्काल शुरू हो जाती है।

लेकिन यदि किसी बड़ी औद्योगिक इकाई के संबंध में जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो फाइलें वर्षों तक धूल क्यों फांकती रहती हैं?

  • क्या कानून केवल कमजोर लोगों के लिए है?
  • क्या बड़ी कंपनियों के मामलों में प्रशासन की गति धीमी पड़ जाती है?

⚠️ जांच रिपोर्ट कहती है एक बात, कार्रवाई क्यों नहीं दिखती?

दस्तावेज़ के अनुसार जांच दल ने राखड़ डैम क्षेत्र का निरीक्षण कर अतिरिक्त प्रभावित भूमि का उल्लेख किया।

  • यदि रिपोर्ट गलत थी तो उसे निरस्त क्यों नहीं किया गया?
  • यदि रिपोर्ट सही थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • यदि मामला लंबित है तो जनता को स्थिति बताने में प्रशासन को हिचकिचाहट क्यों?

🌳 वन भूमि और पर्यावरण पर भी उठ रहे सवाल

रिपोर्ट में जिन क्षेत्रों का उल्लेख है, उनमें वन क्षेत्र प्रभावित होने का संदर्भ भी सामने आता है।

ऐसे में पर्यावरण संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली व्यवस्था को स्पष्ट करना चाहिए—

  • क्या वन विभाग ने स्वतंत्र जांच की?
  • क्या पर्यावरणीय अनुमति की समीक्षा हुई?
  • क्या प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन हुआ?
  • क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई?

🚨 मौन क्यों है प्रशासन?

कोरबा देश के सबसे बड़े औद्योगिक जिलों में गिना जाता है।

ऐसे जिले में यदि किसी जांच रिपोर्ट पर वर्षों तक अंतिम निर्णय न हो तो यह केवल एक फाइल का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न बन जाता है।

जनता पूछ रही है—

“जांच हुई, रिपोर्ट बनी, तथ्य दर्ज हुए, फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

“कोरबा में कानून सबके लिए बराबर है या बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था?”

“2023 की रिपोर्ट, 2026 का इंतजार – आखिर किसकी मेहरबानी?”


📢 छत्तीसगढ़ सरकार से जनहित में मांग

  • ✔ जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  • ✔ कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताई जाए।
  • ✔ राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त रिपोर्ट जारी की जाए।
  • ✔ यदि कोई अनियमितता नहीं मिली तो उसका स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया जाए।
  • ✔ यदि अनियमितता मिली थी तो दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सबसे बड़ा प्रश्न

यदि 2023 की जांच रिपोर्ट में अतिरिक्त कब्जा और अतिरिक्त प्रभावित भूमि का उल्लेख किया गया था, तो 2026 तक उस पर अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जब तक प्रशासन इस प्रश्न का स्पष्ट और दस्तावेज़ी उत्तर नहीं देता, तब तक यह मामला जनचर्चा और सार्वजनिक जवाबदेही का विषय बना रहेगा।


नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व जांच प्रतिवेदन के उल्लेखों तथा सार्वजनिक रूप से उठाए गए प्रश्नों पर आधारित है। किसी भी कथित अनियमितता अथवा कब्जे के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी, न्यायालय अथवा वैधानिक जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित तथ्यों के आधार पर ही माना जाएगा।

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