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“ग्रीन ड्रामा, ग्राउंड पर कब्जा” — बलात कब्जा का BALCO का फॉर्मूला फिर एक्टिव, अब मितान भवन से लगी भूमि निशाने पर…

कोरबा। “पहले पौधरोपण करो, फिर उसी जमीन पर कब्जा जमाओ” — यह कोई आरोप भर नहीं, बल्कि BALCO पर बार-बार सामने आ रहा एक पैटर्न बनता जा रहा है। 2026 में एक बार फिर यही फॉर्मूला मितान भवन के पास देखने को मिल रहा है, जहां नर्सरी को उजाड़कर अवैध सड़क और थिएटर निर्माण के आरोप लगे हैं।

पहले हरियाली का शो, अब बुलडोज़र की एंट्री

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर आज निर्माण कार्य चल रहा है, वहीं दो वर्ष पहले बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। अधिकारियों की मौजूदगी में पौधे लगाए गए, फोटो खिंचवाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

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लेकिन अब वही जमीन पूरी तरह साफ कर दी गई है — न पौधे बचे, न नर्सरी — सिर्फ निर्माण गतिविधि।

बनाई जा रही सड़क पूरी तरह अवैध

जिस सड़क का निर्माण बालको के अधिकारी अपने निजी उपयोग के लिए करना चाह रहे है उसकी भी विधिवत अनुमति बॉण्डरीवाल के जैसे ही नहीं लिए है। हालांकि बिना अनुमति कार्य करने में बालको एक्सपर्ट है उसकी बानगी आपको वन विभाग से जुड़े एक अधिकारी को लेकर बताते है।

एसडीओ की चेतावनी के बावजूद जारी खेल

वन विभाग पहले ही BALCO प्रबंधन को चेतावनी दे चुका है। उपवनमंडलाधिकारी, उत्तर कोरबा के पत्र (01.10.2024) में हॉस्टल के लिए बिना अनुमति पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य को गंभीर वन अपराध बताया गया था।

इसके बावजूद, जमीनी हालात बताते हैं कि न तो निर्माण रुका और न ही विवाद सुलझा।

पौधारोपण की अनुमति, जमीन पर राखड़ बांध

इसी तरह बालको के अवैध मनसूबे का खुलासा स्पष्ट हुआ है। खसरा नंबर 543/1 का मामला इस पैटर्न को और साफ करता है। दस्तावेजों के अनुसार यहां पौधारोपण की अनुमति दी गई थी, लेकिन राजस्व अमले की जांच में सामने आया कि वहां राखड़ बांध बना दिया गया।

यानि कागजों में हरियाली, जमीन पर सिर्फ राख और कंक्रीट — यही असली तस्वीर सामने आ रही है।

 2024 का घटनाक्रम : एक महीने में बदला रुख ?

जानकारी के अनुसार, 2024 में तत्कालीन एसडीओ आशीष खैरवार द्वारा बालको को वृक्षारोपण में अनियमितताओं को लेकर पत्र जारी किया गया था।

लेकिन इसके महज एक महीने बाद, 05 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) को उसी क्षेत्र में उन्हीं की मौजूदगी में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

ऐसे में सवाल उठता है — एक महीने में ऐसा क्या बदल गया ?

 “लायजन सिस्टम” पर उठते सवाल

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कंपनी द्वारा विभिन्न विभागों से समन्वय के लिए एक लायजन नेटवर्क संचालित किया जाता है। आरोप यह भी हैं कि इसी तंत्र के जरिए विवादित कार्यों को नियमित स्वरूप देने की कोशिश होती है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन घटनाओं की कड़ी कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर रही है।

 “एक पेड़ के बदले तीन पौधे” — सिर्फ कागजों में ?

वृक्ष कटाई के बदले तीन गुना पौधारोपण का दावा भी जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा। न तो पर्याप्त पौधे दिखते हैं और न ही उनकी निगरानी का कोई ठोस प्रमाण।

इससे यह आशंका मजबूत होती है कि वृक्षारोपण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है

प्रशासन की चुप्पी या सिस्टम की मजबूरी ?

सबसे बड़ा सवाल अब प्रशासन पर है।

चेतावनी पत्र जारी हुए, जांच रिपोर्ट सामने आई… फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं ?

क्या यह महज लापरवाही है या फिर सिस्टम किसी दबाव में काम कर रहा है — यह जांच का विषय है।

 कोरबा के भविष्य पर असर

कोरबा पहले से ही प्रदूषण की गंभीर समस्या झेल रहा है। ऐसे में हरियाली को खत्म कर अवैध निर्माण करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी बड़ा खतरा है।

अगर यही “ग्रीन ड्रामा, ग्राउंड पर कब्जा” मॉडल चलता रहा, तो आने वाले समय में कोरबा की बची-खुची हरियाली भी खतरे में पड़ सकती है।

अब जरूरत है पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की — ताकि सच सामने आए और जिम्मेदारी तय हो सके।

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