कोरबा में GST रिकवरी कार्रवाई पर उठे सवाल, टैक्स जमा होने के बाद भी बैंक खाते अटैच होने से व्यापारी परेशान

कोरबा। जिले में राज्य कर (GST) विभाग की रिकवरी कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि हाल के समय में बड़ी संख्या में नोटिस राज्य कर कार्यालय, GST सर्किल-02 के अधिकार क्षेत्र से जारी किए गए हैं, जिनके आधार पर कई व्यापारियों के बैंक खातों पर अटैचमेंट की कार्रवाई की गई है।
व्यापारियों का कहना है कि कई मामलों में उन्होंने विभाग को लिखित जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, लेकिन उन पर समय पर निर्णय नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है। अचानक बैंक खातों से राशि कटने के कारण कई व्यापारियों को आर्थिक और व्यावसायिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे
1. टैक्स जमा होने के बाद भी रिकवरी की शिकायत
व्यापारियों का कहना है कि कई मामलों में मूल कर (Tax) की राशि पहले ही जमा कर दी गई है, इसके बावजूद बैंक खातों से राशि वसूली की कार्रवाई की गई है।
2. 20 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट के बाद भी बैंक अटैचमेंट
कुछ व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपील के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक प्री-डिपॉजिट (लगभग 20 प्रतिशत) जमा कर दिया है, इसके बावजूद बैंक खातों पर रिकवरी की कार्रवाई होने की शिकायतें सामने आई हैं।
3. सर्किल-02 से बड़ी संख्या में नोटिस
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि हाल के समय में बड़ी संख्या में नोटिस राज्य कर कार्यालय सर्किल-02 से जारी हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार इन नोटिसों के संबंध में विभाग को जवाब भी प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन उन पर अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
4. समान राशि के साथ कई नोटिस जारी होने का आरोप
कुछ व्यापारियों का कहना है कि कई मामलों में समान राशि दर्शाकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए, जिससे व्यापारियों के बीच भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।
5. अंतिम आदेश से पहले रिकवरी पर सवाल
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि GST कानून के अनुसार किसी भी मांग की अंतिम पुष्टि सामान्यतः FORM GST DRC-07 के माध्यम से की जाती है। व्यापारियों का कहना है कि विधिसम्मत आदेश और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कठोर रिकवरी कार्रवाई की जानी चाहिए।
6. व्यापारिक गतिविधियों पर असर
अचानक बैंक खाते अटैच होने से कई व्यापारियों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जिनमें चेक बाउंस होना, व्यापारिक भुगतान रुकना और बाजार में नकदी प्रवाह प्रभावित होना शामिल है।
7. छोटे व्यापारियों पर बढ़ता दबाव
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अचानक वित्तीय दबाव पड़ने से उनके व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
GST कानून और सर्कुलर का संदर्भ
व्यापारियों ने इस मामले में CBIC Circular No. 224/18/2024-GST दिनांक 11 जुलाई 2024 का हवाला दिया है। सर्कुलर में उल्लेख है कि यदि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का आदेश हो चुका है और GST अपीलीय अधिकरण (Tribunal) अभी तक कार्यरत नहीं है, तो करदाता द्वारा धारा 112 के अंतर्गत निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा करने और संबंधित अधिकारी को अंडरटेकिंग देने के बाद शेष मांग की रिकवरी को स्थगित माना जा सकता है।
इसी प्रकार GST कानून की धारा 78 में देय कर की वसूली की समयसीमा तथा धारा 79 में रिकवरी की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।
व्यापारियों की मांग
व्यापारिक संगठनों ने शासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि GST कानून, नियमों और जारी सर्कुलरों के अनुरूप ही कार्रवाई की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि विभाग और करदाताओं के बीच पारदर्शिता और संवाद बनाए रखना आवश्यक है, ताकि कर प्रणाली में विश्वास बना रहे और व्यापारिक वातावरण सकारात्मक बना रहे।
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