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CGPSC घोटाला: स्पेशल कोर्ट ने 6 आरोपियों को भेजा जेल…

रायपुर । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) फर्जीवाड़े की जांच कर रही सीबीआई ने गुरुवार को स्पेशल कोर्ट में इस घोटाले से जुड़े छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप पत्र में पेपर लीक कराने और सिलेक्शन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की बात सामने आई है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का निर्देश दिया है।

 

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छह आरोपियों के खिलाफ चालान दाखिल

सीबीआई की जांच में तत्कालीन CGPSC चेयरमैन, एग्जाम कंट्रोलर, पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के रिश्तेदार, और उद्योगपति श्रवण अग्रवाल के बेटे शशांक अग्रवाल और बहू भूमिका कटियार को शामिल किया गया है। इन दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। जांच एजेंसी के अनुसार, इन नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।

 

पेपर लीक का खेल और पहचान छिपाने की कोशिश

सीबीआई ने खुलासा किया है कि सिलेक्शन लिस्ट में कुछ अभ्यर्थियों की पहचान छिपाने के प्रयास किए गए। नितेश सोनवानी, जो पूर्व चेयरमैन के भतीजे हैं, उनका चयन सातवीं रैंक पर हुआ। सिलेक्शन लिस्ट में उनका सरनेम छिपाकर केवल नाम दर्ज किया गया। दस्तावेजों की जांच से पता चला कि यह सीजीपीएससी के आला अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया।

 

18 संदिग्ध नाम, नेता और अफसरों के रिश्तेदार शामिल

सीबीआई ने सिलेक्शन लिस्ट में 18 ऐसे नाम चिन्हित किए हैं, जो गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। इनमें अफसरों और नेताओं के रिश्तेदार प्रमुख हैं। कांग्रेस नेताओं के बेटा-बेटी भी इस लिस्ट का हिस्सा बने। यह घोटाला उच्च स्तर पर प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता को दर्शाता है।

 

ललित गणवीर और आरती वासनिक की भूमिका संदिग्ध

एग्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर को पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी का विश्वासपात्र बताया जा रहा है। गणवीर की गिरफ्तारी से पहले पूर्व एग्जाम कंट्रोलर आरती वासनिक से पूछताछ में कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। सीबीआई का दावा है कि गणवीर ने प्रभावशाली लोगों को प्रश्न पत्र पहले ही लीक कर दिए थे।

 

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की याचिका बनी जांच की वजह

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर इस फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने 18 संदिग्ध नामों की सूची पेश की थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच शुरू हुई और सीबीआई ने इन नामों पर फोकस किया।

 

2003 से लेकर 2021 तक, घोटाले की लंबी परंपरा

यह पहली बार नहीं है जब CGPSC विवादों में घिरी हो। 2003 में पहली बार आयोजित परीक्षा में भी गड़बड़ी सामने आई थी। ईओडब्ल्यू की जांच में फर्जीवाड़ा प्रमाणित हुआ था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण दोषी अधिकारी आज भी उच्च पदों पर काबिज हैं।

 

सीबीआई के राडार पर अन्य हाई-प्रोफाइल लोग

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एक पूर्व आईएएस अधिकारी और कांग्रेस नेता के बेटे और बेटी के नाम भी जांच के दायरे में हैं। सीबीआई ने संकेत दिया है कि जल्द ही इनकी गिरफ्तारी हो सकती है।

 

न्यायिक कार्रवाई और भविष्य की राह

सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर स्पेशल कोर्ट ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग भी की जा रही है।

 

छत्तीसगढ़ में CGPSC की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए इस घोटाले पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। न्यायिक फैसले का देश भर में एक बड़ा संदेश जाएगा।

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