भिलाई निगम के अभियंताओं को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत: कार्रवाई के निर्देश और वसूली संबंधी नोटिस पर रोक

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी, अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक और अपूर्वा निगम ने रखा याचिकाकर्ताओं का पक्ष; जांच में सुनवाई का अवसर नहीं मिलने का उठाया मुद्दा
बिलासपुर/भिलाई। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। नगर पालिक निगम भिलाई के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में अभियंताओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। न्यायालय ने दुर्ग कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र तथा उसके आधार पर जारी 16 सितंबर 2026 के कारण बताओ नोटिसों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने ‘अर्पित बंजारे एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’, डब्ल्यूपीएस क्रमांक 7572/2026 में 15 अक्टूबर 2026 को यह आदेश दिया। उत्तरवादियों को जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को निर्धारित है।
अधिवक्ताओं ने उठाया सुनवाई के अधिकार का सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के साथ अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक और अधिवक्ता अपूर्वा निगम उपस्थित हुईं। अधिवक्ताओं ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर अभियंताओं के खिलाफ कदम उठाए गए, उस जांच में उन्हें अपना पक्ष रखने और बचाव करने का अवसर नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क रखा गया कि पहले कार्रवाई और वसूली के निर्देश जारी करना तथा उसके बाद कारण बताओ नोटिस देना, निष्पक्ष सुनवाई की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उनके अनुसार, संबंधित पत्राचार से पूर्वनिर्धारित मानसिकता का संकेत मिलता है, क्योंकि पक्ष सुने जाने से पहले ही कार्रवाई की दिशा तय कर दी गई थी।
यह दलील भी दी गई कि जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज होने से पहले संबंधित अभियंताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका मिलना चाहिए था।
पेवर ब्लॉक कार्यों की जांच से शुरू हुआ विवाद
आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, मामला वर्ष 2023–2024 में कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों से जुड़ा है। इन शिकायतों पर तैयार 27 अगस्त 2026 की जांच रिपोर्ट में याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल थे।
इसी रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर दुर्ग ने 3 सितंबर 2026 को संबंधित अधिकारियों को जांच में दोषी पाए गए अभियंताओं और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य अभियंता, नगर पालिक निगम भिलाई ने 16 सितंबर 2026 को याचिकाकर्ताओं को कथित राशि की वसूली प्रस्तावित करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए।
याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर के पत्र और उसके परिणामस्वरूप जारी नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
शासन ने कार्रवाई को बताया वैध
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि कलेक्टर का पत्र कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर कराई गई जांच के आधार पर जारी हुआ है। इसलिए संबंधित पत्र और कारण बताओ नोटिसों में कोई अवैधता नहीं है।
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता एस.एस. बघेल तथा उत्तरवादी क्रमांक 3 से 5 की ओर से अधिवक्ता आर.के. झा उपस्थित हुए। उत्तरवादियों के अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
न्यायालय ने अगली सुनवाई तक दी राहत
दोनों पक्षों की दलीलों और अभिलेखों पर विचार करते हुए न्यायालय ने विशेष रूप से उस पत्र का संज्ञान लिया, जिसमें जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। साथ ही याचिकाकर्ताओं के इस तर्क पर विचार किया कि उन्हें जांच के दौरान सुनवाई अथवा बचाव का अवसर नहीं मिला।
न्यायालय ने विशुद्ध रूप से अंतरिम व्यवस्था के तौर पर कलेक्टर के विवादित पत्र और उससे संबंधित कारण बताओ नोटिसों पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई है।
यह आदेश याचिकाकर्ता अभियंताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत है। हालांकि, यह आरोपों से दोषमुक्ति या जांच निष्कर्षों को अंतिम रूप से निरस्त करने का फैसला नहीं है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय अभी शेष है।
समाचार का आधार: उपलब्ध कराया गया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का 15 अक्टूबर 2026 का चार पृष्ठीय आदेश।
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