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कोरबा DMF फाइल्स — एपिसोड 07 – पौधे जमीन पर उगे या फाइलों में भुगतान की हरियाली?

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छह Garden Tenders की जड़ तक जांच जरूरी

 

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NIT 1016, 1018, 1019, 1030, 1036 और 1040 जांच के केंद्र में—पौधा खरीदी, रोपण, सुरक्षा और Maintenance की पूरी Award-to-Payment Chain कहां है?

 

टेंडर खुलने से पहले सभागार कैसे पहुंचे पौधे? “Umesh Sir” वाली पर्ची, वाहन और CCTV रिकॉर्ड खोल सकते हैं पूरी कहानी

 

कोरबा। पौधारोपण प्रकृति की सेवा है, लेकिन पौधों की आड़ में सार्वजनिक पैसे की ऐसी बेल फैल जाए जिसकी जड़ें कई फाइलों और शाखाएं कई भुगतानों तक पहुंचें, तो हर पत्ते का नहीं—हर रुपये का हिसाब जरूरी हो जाता है।  प्रदूषण से जूझते कोरबा में सड़क किनारे हरियाली हो, खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ लगें और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिले—इससे कौन असहमत होगा? लेकिन जनता के पैसे से पौधारोपण हुआ है तो केवल “हजारों पौधे लगाए गए” कहना पर्याप्त नहीं है।

नगर निगम को बताना होगा—

पौधे कितने में खरीदे गए?
आपूर्तिकर्ता कौन था?
पौधे किसने लगाए?
Security और Maintenance पर कितना भुगतान हुआ?
और छह महीने अथवा एक वर्ष बाद उनमें कितने पौधे जीवित हैं?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की दस्तावेज आधारित विशेष श्रृंखला “कोरबा DMF फाइल्स” के एपिसोड-07 में जांच की सुई अब Garden–Plantation Procurement की ओर घूम रही है।  इस बार पौधों की तस्वीरें नहीं, फाइलों की परतें गिनी जाएंगी।  एक-दो नहीं—छह Garden Files जांच के केंद्र में  नगर पालिक निगम कोरबा से संबंधित उपलब्ध Tender Records की पड़ताल में Garden/Plantation प्रकृति के कई NIT/File Numbers सामने आए हैं।

इनमें विशेष रूप से—

NIT 1016 | 1018 | 1019 | 1030 | 1036 | 1040  की पूरी Sanction-to-Payment Chain जांचे जाने की जरूरत है।  केवल NIT Numbers का पास-पास होना अथवा Garden Section से संबंधित होना यह सिद्ध नहीं करता कि सभी कार्य DMF से ही वित्तपोषित थे। इसलिए प्रत्येक फाइल का मूल Administrative Sanction और Funding Head सार्वजनिक होना चाहिए।  यदि कोई काम DMF से नहीं हुआ तो नगर निगम बताए कि पैसा किस मद से आया। यदि DMF से हुआ तो यह भी स्पष्ट करे कि संबंधित खर्च का खनन प्रभावित आबादी और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं से क्या संबंध था।

NIT 1019: पौधे के साथ Maintenance और Security का भी खर्च

नगर निगम के उपलब्ध Tender Archive में NIT 1019/Garden/2025, दिनांक 10 अक्टूबर 2025, सड़क किनारे वृक्षारोपण से संबंधित रिकॉर्ड के रूप में सामने आया है।  इसमें Plantation के साथ एक वर्ष का Maintenance और Security जैसे घटक जुड़े दिखाई देते हैं।  यानी खर्च केवल पौधा खरीदने तक सीमित नहीं था।

अब वास्तविक गणना इस आधार पर होनी चाहिए—

Plant Cost + Transportation + Plantation + Tree Guard + Watering + Maintenance + Security = वास्तविक प्रति पौधा लागत  नगर निगम केवल कुल पौधों की संख्या बताकर जवाबदेही पूरी नहीं कर सकता। प्रत्येक मद की मात्रा, दर और भुगतान का आधार सामने आना चाहिए। एक पौधा—लेकिन बिल में कितनी शाखाएं?

पौधारोपण के नाम पर भुगतान की पूरी शृंखला हो सकती है—

– पौधे की खरीद
– परिवहन
– गड्ढा खोदना
– मिट्टी और खाद
– रोपण
– Tree Guard
– Watering
– Replacement
– Watch and Ward
– Security
– एक वर्ष का Maintenance

ऐसे में बाजार में सामान्य कीमत वाला पौधा सरकारी फाइल में पहुंचते-पहुंचते कितने रुपये का पड़ा, यह केवल पूरे BOQ और Final Payment को खोलने से पता चलेगा।  कहीं पौधे सस्ते और उनकी कागजी देखभाल पौधों से कई गुना महंगी तो नहीं पड़ गई?

₹35 लाख से ₹80 लाख की चर्चा—असली रकम दस्तावेज बताएंगे  स्थानीय स्तर पर पौधों और पौधारोपण से जुड़े खर्च को लेकर ₹35 लाख से ₹80 लाख तक की चर्चाएं सामने आई हैं। ग्राम यात्रा इन आंकड़ों को अभी प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रकाशित नहीं कर रहा।

वास्तविक राशि तभी स्थापित होगी जब निम्न दस्तावेज आपस में मिलेंगे—

– Administrative Sanction
– Technical Sanction और Estimate
– NIT तथा BOQ
– Bid Comparative Statement
– AOC/LOA और Work Order
– Measurement Book
– Maintenance एवं Survival Certificate
– Final Bill और वास्तविक भुगतान

यदि प्रशासन के पास छिपाने जैसा कुछ नहीं है तो छहों फाइलों के ये रिकॉर्ड एक साथ सार्वजनिक करने में हिचक क्यों होनी चाहिए?

 

बाजार की फुसफुसाहट नहीं—अब सरकारी दस्तावेज बोलेंगे सबसे विस्फोटक सवाल: टेंडर खुला नहीं, फिर सभागार में पौधे कैसे पहुंचे?  इस जांच का सबसे गंभीर बिंदु ग्राम यात्रा द्वारा पूर्व में प्रकाशित उस घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें नगर निगम के जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर में पौधों से भरा वाहन पहुंचने और पौधे उतारे जाने के दृश्य सामने आए थे।  उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार GeM Bid No. GEM/2026/B/7982716, Tender ID 9831335, लगभग 3,070 पौधों की खरीदी से संबंधित बताया गया। इसका प्रकाशन 3 सितंबर 2026 को हुआ, जबकि Bid जमा करने की अंतिम समय-सीमा 24 सितंबर 2026 और Technical Bid खुलने की निर्धारित तारीख 25 सितंबर 2026 बताई गई थी।  इसके विपरीत, 8 सितंबर 2026 को ही सभागार परिसर में पौधों की कथित आपूर्ति का घटनाक्रम सामने आया।  यदि उस समय तक Bid जमा करने की अवधि भी समाप्त नहीं हुई थी, Technical Evaluation नहीं हुई थी, L1 निर्धारित नहीं हुआ था और AOC/LOA जारी नहीं हुआ था, तो पौधे किस आदेश पर मंगाए गए?

नगर निगम बताए—

 

टेंडर खुलने से पहले पौधे सभागार कैसे पहुंच गए?

“Umesh Sir” वाली पर्ची—सिर्फ संयोग या पूर्व-आपूर्ति की अहम कड़ी?   उपलब्ध कथित Nursery Slip/Waybill पर “Umesh Sir” जैसा उल्लेख होने की बात सामने आई है। इसके साथ पौधे लाने वाले वाहन का नंबर CG 04 RB 0409 बताया गया।

नगर निगम को अब स्पष्ट करना चाहिए—

– “Umesh Sir” कौन हैं?
– क्या इसका संबंध ठेकेदार उमेश राठौर से है या किसी अन्य व्यक्ति से?
– पौधों का वास्तविक Supplier और Nursery कौन थी?
– वाहन किसके निर्देश पर सभागार पहुंचा?
– वाहन का Gate Register Entry कहां है?
– परिसर के CCTV में प्रवेश और पौधे उतारने का समय क्या है?
– पौधे किस अधिकारी अथवा कर्मचारी ने प्राप्त किए?
– Delivery Challan, GST Invoice और Stock Entry कहां है?
– पौधे किस Tender, Purchase Order अथवा Work Order के अंतर्गत आए थे?

किसी पर्ची पर नाम लिखा होना अपने आप किसी व्यक्ति को Supplier या दोषी सिद्ध नहीं करता। लेकिन Tender खुलने से पहले संभावित आपूर्ति और किसी संभावित Vendor से जुड़ा संकेत सामने आए तो निष्पक्ष जांच अनिवार्य हो जाती है।

क्या विजेता पहले तय था और निविदा बाद में औपचारिकता बनी?

यदि 8 सितंबर को सभागार पहुंचे पौधों का संबंध उसी GeM Bid से स्थापित होता है जिसकी प्रक्रिया 24–25 सितंबर तक पूरी ही नहीं हुई थी, तो मामला बेहद गंभीर होगा।

तब सवाल उठेंगे—

क्या पौधे पहले मंगा लिए गए और Tender बाद में खोला गया?
क्या किसी संभावित Supplier को पहले से काम मिलने का भरोसा था?
क्या Bid Parameters किसी पूर्व-चयनित Catalogue अथवा Firm के अनुरूप बनाए गए?
क्या अन्य Sellers Catalogue Mismatch के कारण प्रतियोगिता से बाहर हुए?
क्या सरकारी खरीद प्रक्रिया पहले लिए गए किसी निर्णय पर मुहर लगाने की औपचारिकता बन गई?   ये अभी जांच योग्य प्रश्न हैं—अंतिम निष्कर्ष नहीं।

लेकिन जवाब केवल बयान से नहीं मिलेगा। इसके लिए चाहिए—

Original Nursery Slip, Vehicle Record, Gate Register, CCTV Footage, Stock Register, GeM Audit Trail, Technical Evaluation, Comparative Statement, AOC/LOA, Work Order और Payment Details।  यदि सभागार पहुंचे पौधों का उक्त Bid से कोई संबंध नहीं था तो नगर निगम दस्तावेज जारी कर स्थिति स्पष्ट करे।   लेकिन यदि संबंध स्थापित हुआ तो यह केवल पौधा खरीदी का मामला नहीं रहेगा। यह निष्पक्ष प्रतियोगिता, पूर्व-निर्धारित आपूर्ति और पूरी सरकारी Procurement Process की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्न होगा।   Supplier कौन—Nursery का नाम और बिल सार्वजनिक क्यों नहीं?

यदि पौधे किसी Private Nursery अथवा खुले बाजार से खरीदे गए तो नगर निगम को सार्वजनिक करना चाहिए—

– Nursery/Vendor का नाम और पता
– GST तथा Nursery Registration
– Species-wise Quantity
– पौधों की निर्धारित ऊंचाई और आयु
– प्रति पौधा स्वीकृत दर
– GST Invoice और Delivery Challan
– Transportation Charges
– गुणवत्ता एवं प्राप्ति प्रमाणपत्र

प्रत्येक पौधा सार्वजनिक पैसे से खरीदा गया है। इसलिए उसकी जड़ से लेकर बिल तक का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए।  सरकारी नर्सरी में विकल्प था तो Private Purchase क्यों?   यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक योजना में हर पौधा सरकारी नर्सरी से मुफ्त उपलब्ध होता है। उपलब्धता, पात्रता, योजना और दर अलग-अलग हो सकती है।

लेकिन जांच का प्रश्न बिल्कुल स्पष्ट है—

क्या संबंधित समय पर वन विभाग, वन विकास निगम अथवा किसी सरकारी Nursery में समान प्रजाति और Specification के पौधे उपलब्ध थे?

यदि उपलब्ध थे तो—

– सरकारी दर क्या थी?
– Private Vendor की दर क्या थी?
– दरों में कितना अंतर था?
– सरकारी विकल्प क्यों नहीं अपनाया गया?
– अधिक खर्च हुआ तो उसका लिखित औचित्य क्या था?

यही Rate Comparison बताएगा कि नगर निगम ने सार्वजनिक पैसे को उचित मूल्य दिलाया या महंगे विकल्प का दरवाजा खोल दिया  Maintenance का पैसा लिया तो Survival Register कहां है?   यदि Contractor को एक वर्ष तक पौधों की देखभाल और सुरक्षा के लिए भुगतान किया गया तो प्रत्येक Site का Survival Record उपलब्ध होना चाहिए।

नगर निगम बताए—

– कुल कितने पौधे लगाए गए?

– तीन महीने बाद कितने जीवित थे?

– छह महीने बाद कितने बचे?

– एक वर्ष बाद Survival Percentage कितना रहा?

– कितने पौधे सूखे अथवा नष्ट हुए?

– कितने पौधे बदले गए?

– Replacement Contractor के खर्च पर हुआ या निगम के?

– स्थल सत्यापन किस अधिकारी ने किया?

– Final Payment किस प्रमाणपत्र पर जारी हुआ? 

यदि Maintenance का भुगतान हुआ लेकिन Survival Assessment नहीं हुआ, तो भुगतान का आधार क्या था?  100 प्रतिशत भुगतान और जमीन पर अधूरी हरियाली—तो जिम्मेदार कौन?

ग्राम यात्रा किसी परियोजना में पौधों के जीवित रहने का अप्रमाणित प्रतिशत दावा नहीं कर रहा।  लेकिन Audit का सिद्धांत सीधा है।

 

यदि हजारों पौधे लगाने और एक वर्ष तक Maintenance का Contract दिया गया, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में पौधे जीवित नहीं मिले, तो जांच करनी होगी—

– न्यूनतम Survival Condition क्या थी?
– Replacement Clause था या नहीं?
– Penalty लगाई गई या नहीं?
– Performance Security रोकी गई या लौटा दी गई?
– Final Bill किस अधिकारी ने प्रमाणित किया?

यदि भुगतान पूरा हुआ लेकिन परिणाम अधूरा मिला, तो सार्वजनिक धन किस उपलब्धि के बदले दिया गया?

एक ही काम कई पैकेजों में काटकर नियमों की धार कुंद तो नहीं की गई?

NIT 1016, 1018, 1019, 1030, 1036 और 1040 का Cross-Audit होना चाहिए—

– क्या कार्यों की प्रकृति समान थी?
– क्या कार्यस्थल एक-दूसरे से जुड़े थे?
– क्या Sanction और Tender Dates आसपास की थीं?
– क्या अनुमानित रकम किसी Approval अथवा Tender Threshold से नीचे रखी गई?
– क्या Executing Section और अधिकारी समान थे?
– क्या Vendors अथवा Competitor Firms बार-बार वही दिखाई दीं?

अलग-अलग स्वतंत्र परियोजनाएं होना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन यदि एक संयुक्त आवश्यकता को बिना पर्याप्त तकनीकी आधार छोटे पैकेजों में बांटा गया हो, तो उसका प्रशासनिक औचित्य सामने आना चाहिए।

हर फाइल अलग दिखाई दे सकती है—लेकिन उसकी भुगतान-नसें कहीं एक ही Vendor या एक ही निर्णय-श्रृंखला तक तो नहीं पहुंचतीं?
सफल ठेकेदार कौन—AOC और LOA कहां हैं?

 

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध Indexed Records से सभी लक्षित Garden Files के लिए निम्न जानकारी की समेकित तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है—

Successful Bidder + Quoted Amount + Comparative Statement + AOC/LOA + Final Payment  इसीलिए बिना निर्णायक रिकॉर्ड किसी Contractor को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।

लेकिन नगर निगम की जवाबदेही है कि वह बताए—

– किसने Bid किया?
– कितने Bidder पात्र पाए गए?
– L1 कौन था?
– किसे Work Order मिला?
– अनुबंधित राशि कितनी थी?
– Final Payment कितना और कब हुआ?

यदि एक ही Vendor बार-बार सामने आता है तो उसके साथ Competitor Firms, GST Addresses, Proprietors, Quoted Rate Difference और कुल Payment Concentration की भी जांच आवश्यक होगी।  खनन क्षेत्र प्रदूषण झेले और पौधे केवल सौंदर्यीकरण वाले इलाकों में लगें?  कोरबा देश के प्रमुख खनन और औद्योगिक क्षेत्रों में है। इसलिए Plantation Expenditure का मूल्यांकन केवल पौधों की संख्या से नहीं, उनके स्थान और पर्यावरणीय उपयोगिता से भी होना चाहिए।

नगर निगम बताए—

– पौधे खनन प्रभावित गांवों में लगे?
– धूल और प्रदूषण वाले Corridors में लगे?
– Industrial Buffer Zones में लगे?
– प्रभावित बस्तियों और स्कूलों के आसपास लगे?
– या अधिकांश खर्च Urban Beautification तक सीमित रहा?

यदि किसी कार्य का Funding Source DMF साबित होता है, तो Location का प्रश्न और गंभीर हो जाएगा। तब खर्च को Mining-Affected Population और Environmental Mitigation Priority की कसौटी पर जांचना होगा।  अब होगा ‘TREE AUDIT’—कागज नहीं, जमीन गवाही देगी

ग्राम यात्रा इन फाइलों की जांच इस क्रम में करेगा—

SANCTION → NIT → BOQ → BID → VENDOR → RATE → WORK ORDER → PLANTATION → SURVIVAL → BILL → PAYMENT

 

इसके बाद सीधी तुलना होगी—

PRIVATE NURSERY RATE बनाम GOVERNMENT RATE  और स्थल सत्यापन में—  PAID QUANTITY बनाम LIVE PLANTS  की गिनती की जाएगी।

 

प्रत्येक Plantation Cluster के लिए उपलब्ध होना चाहिए—

– GPS Location
– Plantation Date
– Species और Quantity
– Contractor का नाम
– Before Plantation Photo
– Plantation के बाद की Geo-tagged Photo
– छह और बारह महीने की Photo
– Survival Percentage
– Replacement Details

 

यदि ये रिकॉर्ड मौजूद हैं तो सार्वजनिक किए जाएं। यदि नहीं हैं तो Maintenance और Survival किस आधार पर प्रमाणित किया गया? 

छह फाइलें खोलिए—पता चल जाएगा हरियाली जमीन पर उगी या बिलों में  इस एपिसोड का उद्देश्य किसी अधिकारी अथवा Contractor को बिना जांच दोषी घोषित करना नहीं है।

मांग बिल्कुल स्पष्ट है—

NIT 1016, 1018, 1019, 1030, 1036 और 1040 की पूरी Award-to-Payment Chain सार्वजनिक की जाए।

इसके साथ सभागार में कथित रूप से पहले पहुंचे पौधों से जुड़े—  Nursery Slip, Vehicle Record, CCTV, Gate Register, Stock Entry और GeM Audit Trail भी सार्वजनिक किए जाएं।

प्रत्येक फाइल में बताया जाए—

– Funding Source क्या था?

– कुल स्वीकृत राशि कितनी थी?

– सफल Vendor कौन था?

– पौधे कितने और किस दर पर खरीदे गए?

– Plantation, Security और Maintenance पर अलग-अलग कितना भुगतान हुआ?

– जमीन पर आज कितने पौधे जीवित हैं?

– भुगतान प्रमाणित करने वाले अधिकारी कौन थे?

अब उद्घाटन की तस्वीर नहीं—Survival Report चाहिए।
दावे नहीं—Measurement Book चाहिए।
कागजी हरियाली नहीं—जीवित पौधों की गिनती चाहिए।

और सबसे बड़ा सवाल—

  टेंडर खुलने से पहले पौधे कैसे पहुंचे—क्या Supplier पहले तय था और प्रक्रिया बाद में पूरी की गई?

यदि काम नियमपूर्वक हुआ है तो दस्तावेज स्वयं उत्तर दे देंगे। लेकिन यदि पौधे पहले पहुंचे और Tender की प्रक्रिया बाद में चली, तो जांच केवल दरों की नहीं—पूरी Procurement Process की करनी होगी।

अंतिम सवाल जनता का है— 

पौधे जमीन पर लगाए गए थे… या उनके नाम पर फाइलों में भुगतान की फसल काटी गई?

अगले एपिसोड में—₹14.32 करोड़ का SYNTHETIC TRACK

खनन प्रभावितों की DMF निधि से करोड़ों का Track—प्राथमिकता और प्रक्रिया पर बड़े सवाल

Restricted Tender क्यों?
Non-SOR Rates का आधार क्या?
Bid Comparative कहां है?
L1 कौन था?
AOC/LOA किसे मिला?
₹14.32 करोड़ का Estimate आखिर बना कैसे?

पढ़िए—

“कोरबा DMF फाइल्स : एपिसोड 08”
सिर्फ ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पर।

संपादकीय एवं कानूनी नोट: Garden/Plantation से संबंधित उल्लिखित सभी NIT को DMF-funded मानकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। प्रत्येक कार्य का वास्तविक Funding Source, Vendor, Award Amount, Execution, Survival और Payment मूल सरकारी अभिलेखों से अलग-अलग प्रमाणित किया जाना आवश्यक है। सभागार परिसर में कथित पौधा आपूर्ति, Nursery Slip, वाहन और “Umesh Sir” संबंधी उल्लेख जांच योग्य सूचनाएं हैं; इनसे किसी व्यक्ति का दोष स्वतः सिद्ध नहीं होता। सरकारी Nursery से पौधे निःशुल्क अथवा रियायती दर पर मिलने की संभावना भी संबंधित योजना, पात्रता और उपलब्धता के रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थापित होगी। संबंधित विभाग, अधिकारी, Contractor अथवा अन्य पक्ष का तथ्यात्मक उत्तर मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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