पत्रों में चलता रहा समाधान, जमीनी हकीकत में जस की तस समस्या! नहर किनारे टूटी बाउंड्री वॉल पर महीनों से विभागों के बीच पत्राचार, लेकिन खतरा अब भी बरकरार जन शिकायत के बाद निरीक्षण, जिम्मेदारी तय हुई, फिर भी पुनर्निर्माण अधूरा — आखिर कब मिलेगी राहत?


पत्रों में चलता रहा समाधान, जमीनी हकीकत में जस की तस समस्या!
नहर किनारे टूटी बाउंड्री वॉल पर महीनों से विभागों के बीच पत्राचार, लेकिन खतरा अब भी बरकरार
जन शिकायत के बाद निरीक्षण, जिम्मेदारी तय हुई, फिर भी पुनर्निर्माण अधूरा — आखिर कब मिलेगी राहत?
कोरबा। प्रशासनिक फाइलों में कार्रवाई दर्ज होती रही, विभागों के बीच पत्राचार चलता रहा, निरीक्षण भी हुए, लेकिन सोनालिया रेलवे क्रॉसिंग से कोरबा रेलवे स्टेशन मार्ग पर नहर किनारे स्थित क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल का स्थायी समाधान अब तक अधूरा दिखाई देता है। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि यह मामला कई महीनों से सरकारी तंत्र में विचाराधीन है।

दस्तावेज़ों के अनुसार इस संबंध में जन शिकायत दर्ज होने के बाद हसदेव बराज जल प्रबंधन संभाग, रामपुर/कोरबा ने 25 फरवरी 2026 को नगर निगम कोरबा को पत्र भेजकर बताया कि संबंधित बाउंड्री वॉल का निर्माण नगर निगम द्वारा कराया गया था, इसलिए आवश्यक कार्रवाई नगर निगम स्तर पर की जानी चाहिए।

इसके बाद नगर निगम ने स्थल निरीक्षण कराया। निरीक्षण में यह तथ्य दर्ज किया गया कि नहर के दोनों किनारों का कंक्रीट उखड़ने से मिट्टी का कटाव हो रहा है, जिसके कारण बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त होकर गिर गई। नगर निगम ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि दोनों किनारों का कंक्रीटीकरण होने के बाद ही सीमा दीवार का पुनर्निर्माण संभव होगा। इस संबंध में जल संसाधन विभाग को पूर्व में पत्र भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
फाइलों में कार्रवाई, लेकिन जमीनी सवाल कायम
दस्तावेज़ यह संकेत देते हैं कि विभागों के बीच जिम्मेदारियों को लेकर संवाद हुआ, लेकिन आम नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर पुनर्निर्माण कब होगा?
यदि नहर किनारे मिट्टी का कटाव लगातार जारी रहता है, तो बारिश के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा, आवागमन और आसपास की संरचनाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
दस्तावेज़ क्या बताते हैं?
- जन शिकायत के आधार पर मामला प्रशासन तक पहुंचा।
- जल प्रबंधन विभाग ने नगर निगम को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा।
- नगर निगम ने स्थल निरीक्षण कर क्षति की पुष्टि की।
- निरीक्षण में मिट्टी कटाव और कंक्रीट उखड़ने का उल्लेख।
- जल संसाधन विभाग को पूर्व में पत्र भेजे जाने का हवाला।
- पुनर्निर्माण से पहले तकनीकी कार्य पूरे होने की आवश्यकता बताई गई।
अब जनता पूछ रही है…
- जब क्षति की पुष्टि हो चुकी है तो पुनर्निर्माण में देरी क्यों?
- जिम्मेदार विभाग कौन है और अंतिम कार्रवाई कौन करेगा?
- बारिश के मौसम में यदि कोई दुर्घटना होती है तो जवाबदेही किसकी होगी?
- क्या विभागीय पत्राचार से आगे बढ़कर अब जमीनी कार्रवाई का समय नहीं आ गया है?
जनहित में अपेक्षा
यह विषय केवल एक टूटी हुई दीवार का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय का भी है। संबंधित विभाग यदि समयबद्ध समन्वय के साथ कार्य करें, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क इस विषय पर आगे भी निगरानी रखेगा और पुनर्निर्माण की वास्तविक प्रगति से पाठकों को अवगत कराता रहेगा।

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