केशला नदी में रासायनिक प्रदूषण का खतरा?

वार्ड 38 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच BALCO की कथित पाइपलाइन पर भी उठे सवाल
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्रमांक 38 लालघाट-रिस्दा क्षेत्र में अवैध निर्माणों के विरुद्ध चलाए गए बुलडोजर अभियान के बाद अब कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण मौजूद हैं, वहीं कार्रवाई केवल चुनिंदा मकानों पर ही की गई। इस दौरान कुछ महिलाओं द्वारा वार्ड प्रतिनिधि एवं पार्षद पर गंभीर आरोप भी लगाए गए, जिनकी सत्यता की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा सामने आए वीडियो में कुछ महिलाएं यह आरोप लगाती सुनाई दे रही हैं कि यदि उन्होंने पैसे दिए होते तो शायद उनका मकान नहीं टूटता। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसे आरोप सामने आना कई प्रश्न खड़े करता है।
अब बड़ा सवाल : क्या सिर्फ मकान टूटेंगे या प्रदूषण पर भी होगी कार्रवाई?
नगर निगम आयुक्त द्वारा क्षेत्र में मौजूद सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की बात कही गई है। लेकिन इसी बीच स्थानीय लोगों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है।
क्षेत्रवासियों का दावा है कि BALCO-वेदांता प्रबंधन द्वारा कथित रूप से पाइपलाइन के माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट अथवा रासायनिक युक्त गंदे पानी को केशला नदी (ढेंगुनाला) की ओर प्रवाहित किए जाने की तैयारी या गतिविधि की जा रही है। यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो यह केवल पर्यावरणीय नियमों का मामला नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल सकता है तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कथित अवैध गतिविधि की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जनता के बीच अब यह चर्चा है कि:
क्या केशला नदी की ओर कोई औद्योगिक पाइपलाइन बिछाई जा रही है?
उस पाइपलाइन की वैधानिक अनुमति किस विभाग से ली गई?
क्या पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने स्थल निरीक्षण किया है?
पाइपलाइन से छोड़े जाने वाले जल की गुणवत्ता की जांच हुई है या नहीं?
क्या नदी और आसपास के भूजल स्रोतों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है
प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अपेक्षा
यह मामला केवल अतिक्रमण या निर्माण का नहीं, बल्कि संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का भी है। ऐसे में जिला प्रशासन, नगर निगम, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल तथा संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
यदि पाइपलाइन और अपशिष्ट जल प्रवाह से संबंधित आरोप निराधार हैं, तो प्रशासन को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जनता पूछ रही है…
“गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चला, लेकिन क्या नदी और पर्यावरण को प्रभावित करने वाली कथित गतिविधियों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाई जाएगी?”
वार्ड 38 लालघाट-रिस्दा का यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता, पर्यावरणीय जवाबदेही और जनहित से जुड़ा बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है।
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