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मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में भीषण आग, एमएस डॉ. गोपाल कंवर की लापरवाही पर उठे सवाल

कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अस्पताल के पीछे खड़ी पुरानी कबाड़ गाड़ियों में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया और अस्पताल परिसर में धुएं का गुबार फैल गया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग अस्पताल परिसर के उस हिस्से में लगी जहां लंबे समय से पुरानी और अनुपयोगी वाहनों का कबाड़ पड़ा हुआ था। इन गाड़ियों में अचानक आग भड़क उठी और कुछ ही देर में लपटें तेज हो गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. गोपाल कंवर की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आग लगने की सूचना दमकल विभाग को देर से दी गई, जिसके कारण आग पर काबू पाने में समय लग गया। यदि समय रहते दमकल को सूचना दी जाती तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।

गौरतलब है कि जिस स्थान पर आग लगी, उसके ठीक पास ही डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की आवासीय कॉलोनी स्थित है। ऐसे में आग फैलने का खतरा और भी अधिक बढ़ गया था। यदि आग कॉलोनी की ओर बढ़ती तो बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि दमकल की टीम के पहुंचने के बाद कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में लंबे समय से कबाड़ के रूप में पुरानी गाड़ियां पड़ी हुई थीं, जिन्हें हटाने के लिए कई बार आवाज उठाई गई थी, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही लापरवाही अब आग की घटना के रूप में सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक जिस स्थान पर ये वाहन खड़े थे, उसके पास ही ओएसटी सेंटर भी संचालित होता है। यहां उपचार के लिए आने वाले कुछ नशे के आदी युवक अक्सर इन गाड़ियों के पास बैठकर जमावड़ा लगाए रहते थे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि किसी असामाजिक तत्व द्वारा आग लगाई गई हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह कबाड़ के ढेर पड़े रहें और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहे, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि आग कैसे लगी। साथ ही अस्पताल परिसर में पड़े कबाड़ को तुरंत हटाया जाए तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फिलहाल आग लगने की घटना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है और लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

 
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