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“50 हजार नहीं दोगी तो घर भेज दूंगी बाबू, वहीं से लेकर आना पैसा…” — महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा में भ्रष्टाचार का खुला खेल, डीपीओ रेनु प्रकाश और बाबू शिव शर्मा पर लगे गंभीर आरोप

कोरबा। महिला एवं बाल विकास विभाग कोरबा में भ्रष्टाचार, दबाव और अमानवीय व्यवहार की परतें खुलने लगी हैं। डीपीओ (जिला कार्यक्रम अधिकारी) रेनु प्रकाश और उनके भरोसेमंद लिपिक शिव शर्मा पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने कोरबा ग्रामीण परियोजना अधिकारी ममता तुली (60% दिव्यांग) से विभागीय कार्यों के नाम पर 50 हजार रुपये की अवैध मांग की, और पैसे नहीं देने पर आठ घंटे तक कार्यालय में बैठाकर अपमानित किया।

ममता तुली ने मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, मुख्य सचिव और कलेक्टर को भेजी गई 12 पेज़ की विस्तृत शिकायत में बताया है कि 8 अक्टूबर 2025 को रेनु प्रकाश ने जिला कार्यालय में बैठक बुलाई। शिकायत के अनुसार, “मीटिंग शाम 3 बजे शुरू हुई और रात 8 बजे तक मुझे बिठाए रखा गया। डीपीओ बोलीं — मैं जिला से बजट देती हूं, मेरे हिस्से का पचास हजार दो। मना करने पर कहा — मेरा बाबू शिव शर्मा तुम्हारे घर जाएगा, घर से पैसा लेकर आओ, जब तक नहीं दोगी, न तुम यहां से जाओगी और न मैं।”

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तुली के अनुसार, बैठक में जिले के अन्य परियोजना अधिकारी भी मौजूद थे, जिनके सामने डीपीओ ने उन्हें ‘अपाहिज’, ‘विकलांग’ जैसे शब्दों से अपमानित किया। गंभीर तनाव के चलते तुली को माइनर अटैक आया और उनके पति (जो खुद 50% दिव्यांग हैं) उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले गए।

शिकायत में आगे कहा गया है कि शिव शर्मा, जो डीपीओ के बेहद करीबी लिपिक बताए जा रहे हैं, अवकाश स्वीकृति फाइल और अन्य विभागीय कार्यों में भी रिश्वत की मांग करते हैं। तुली का कहना है कि उनसे 40,000 की मांग की गई, और पैसा न देने पर जानबूझकर नोटिस जारी कर परेशान किया गया। यहां तक कि उनका एक साल पुराना अवकाश प्रकरण, जो संचालक कार्यालय से निर्देशित है, आज तक स्वीकृत नहीं किया गया।

ममता तुली ने यह भी बताया कि डीपीओ रेनु प्रकाश के आदेश पर जब वे नोनी बाबू जतन केन्द्रों के संचालन का पालन कर रही थीं, तब भी उनसे हर आदेश मौखिक रूप में कराया जाता था, और किसी लिखित मार्गदर्शन की मांग करने पर सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई जाती थी।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है — “36 साल की सेवा में कभी किसी अधिकारी से विवाद नहीं हुआ, परंतु रेनु प्रकाश ने मेरे जैसे दिव्यांग अधिकारी का मानसिक और सामाजिक शोषण किया। यदि मेरे या मेरे पति के साथ कुछ भी होता है, तो उसकी जिम्मेदार रेनु प्रकाश और उनके बाबू शिव शर्मा होंगे।”

सूत्रों के मुताबिक, विभाग में यह कोई पहला मामला नहीं है। कई महिला कर्मचारियां डीपीओ की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं, परन्तु स्थानांतरण या प्रताड़ना के डर से खुलकर बोल नहीं पा रही हैं।

वहीं इस विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं। पहले यह विभाग बर्तन, रेडी टू ईट और खिलौना घोटाला के लिए मशहूर था, लेकिन अब यहां पानी टंकी स्थापना में बड़ा खेल किया गया है। एक ओर दुगने रेट में टंकी और कनेक्शन दिखाकर भुगतान कर दिया गया है, तो दूसरी ओर टंकी उन आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी लगा दी गई जहां न पानी है न बिजली का स्त्रोत।

इसी तरह वॉटर हार्वेस्टिंग में भी जमकर घोटाले की चर्चा है। पोटाई घोटाला पहले ही सुर्खियों में रहा है, वहीं अब आंगनबाड़ी विद्युतिकरण में भी खेला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड शिव शर्मा बताया जा रहा है, जो ऑफिस में बैठकर पूरे जिले की डोर हिलाता है। हर काम का “रेट” पहले से तय बताया जाता है, और डीपीओ खुद इस सिस्टम में बराबर की भागीदार हैं।

अब देखना यह है कि शासन इस शिकायत पर संज्ञान लेकर जांच बैठाता है या फिर विभागीय फाइलों में दबा देता है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ इस मामले की हर परत उजागर करेगा — चाहे वह रेनु प्रकाश का अफसराना दबदबा हो या बाबू शिव शर्मा की दलाली का नेटवर्क।


शिकायत के मुख्य बिंदु:

  • रेनु प्रकाश द्वारा 50,000 की मांग और आठ घंटे तक बैठाकर अपमान।
  • ‘अपाहिज’, ‘विकलांग’ कहकर दिव्यांग अधिकारी का सार्वजनिक अपमान।
  • लिपिक शिव शर्मा द्वारा 40,000 की रिश्वत मांग।
  • अवकाश स्वीकृति एक साल से लंबित रखी गई।
  • विभागीय आदेश मौखिक रूप से लेकर मनमानी का आरोप।

विवाद में शामिल अधिकारी:

  • रेनु प्रकाश – जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा
  • शिव शर्मा – लिपिक, जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय, कोरबा

मांग:

  • मुख्यमंत्री स्तर पर उच्च स्तरीय जांच।
  • रेनु प्रकाश और शिव शर्मा का निलंबन।
  • विभागीय घोटालों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच।

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