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BALCO में “खटिया खड़ी आंदोलन” से पहले दमन के आरोप : नोटिस से शुरू हुआ विवाद अब बिजली काटने, सस्पेंड करने और घर खाली कराने तक पहुँचा, देखिए VIDEO…

कोरबा। BALCO में आज होने वाले “खटिया खड़ी आंदोलन” से ठीक पहले औद्योगिक क्षेत्र में माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा जारी सख्त नोटिस के बाद अब आंदोलन से जुड़े लोगों पर दबाव बनाने, धमकाने और कार्रवाई करने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए डर का ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कोई भी कर्मचारी खुलकर सामने आने की हिम्मत न कर सके।

दरअसल BALCO प्रबंधन ने 13 तारीख को प्रस्तावित आम सभा और आंदोलन को लेकर पहले ही कड़ा संदेश दे दिया था। जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया कि उस दिन सभी कर्मचारियों को नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहना होगा और केवल वही अवकाश मान्य होगा जो पहले से अधिकृत हो। बिना अनुमति के अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

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इतना ही नहीं, नोटिस में यह भी कहा गया कि दोषी पाए जाने पर अधिकतम आठ दिनों तक का वेतन काटा जा सकता है और भविष्य में मिलने वाले लाभों, जिसमें LTS Benefit भी शामिल है, से वंचित किया जा सकता है। इस नोटिस के सामने आने के बाद से ही मजदूरों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब जो आरोप सामने आ रहे हैं उन्होंने पूरे मामले को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है।

आरोप है कि आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को चिन्हित कर उन्हें अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सुशील निर्मलकर, जो अमित जोगी के समर्थक बताए जाते हैं, उन्हें साफ तौर पर कहा गया कि वे प्रस्तावित धरने में शामिल न हों। आरोप है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने आंदोलन का समर्थन किया तो उन्हें परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

लेकिन जब उन्होंने यह चेतावनी मानने से इंकार कर दिया तो उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि आंदोलन को रोकने के लिए एक तरह से संदेश दिया जा रहा है—जो भी आवाज उठाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई तय है।

मामले में सबसे गंभीर आरोप बिजली कनेक्शन काटे जाने को लेकर सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जिन लोगों के बारे में यह माना जा रहा है कि वे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, उनके घरों के बिजली कनेक्शन तक काटे जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के तहत नहीं बल्कि दबाव बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।

इसी क्रम में सरोजनी गोयल के घर का बिजली कनेक्शन काटे जाने का आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित रूप से बिल जमा होने के बावजूद अचानक बिजली काट दी गई, जिससे इलाके में गुस्सा और नाराजगी दोनों बढ़ गए हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा उस घटना की हो रही है जिसमें कथित तौर पर घर खाली कराने के लिए एक टीम भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद लोगों और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हो गई। माहौल इतना गरमा गया कि स्थिति टकराव के करीब पहुंच गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जो अब तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि मजदूर डर जाएं और आंदोलन में शामिल होने से पीछे हट जाएं। उनका आरोप है कि पहले नोटिस के जरिए चेतावनी दी गई और अब जमीन पर कार्रवाई कर डर का माहौल बनाया जा रहा है।

इस पूरे मामले में पहले ही जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी BALCO प्रबंधन पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कंपनी के नोटिस को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा था कि मुंबई में बैठा कॉर्पोरेट प्रबंधन छत्तीसगढ़ के मजदूरों को धमकाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।

अब जब आज “खटिया खड़ी आंदोलन” होना है, तो कोरबा का औद्योगिक इलाका पूरी तरह उबाल पर है। एक तरफ कंपनी अनुशासन और उत्पादन का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ मजदूर और आंदोलन से जुड़े लोग इसे सीधा-सीधा दमन और दबाव की राजनीति बता रहे हैं।

अब सवाल सिर्फ BALCO का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या एक औद्योगिक कंपनी अपने कर्मचारियों को इस तरह चेतावनी देकर आंदोलन से रोक सकती है? और अगर मजदूर डरने के बजाय सड़कों पर उतर आए, तो यह टकराव किस दिशा में जाएगा।

कोरबा में आज होने वाला “खटिया खड़ी आंदोलन” अब सिर्फ एक विरोध कार्यक्रम नहीं रह गया है। यह उस संघर्ष का प्रतीक बन गया है जिसमें एक तरफ कॉर्पोरेट ताकत है और दूसरी तरफ अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का दावा करने वाले मजदूर। आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे कि यह लड़ाई नोटिस तक सीमित रहती है या फिर औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों तक फैल जाती है।

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