पीथमपुर में रंगपंचमी पर निकली बाबा कलेश्वरनाथ की भव्य शिव बारात, नागा साधुओं की टोली बनी आकर्षण का केंद्र

जांजगीर-चांपा। रंगपंचमी के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले के पीथमपुर गांव में आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां बाबा कलेश्वरनाथ की भव्य शिव बारात धूमधाम से निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने भाग लिया। इस धार्मिक आयोजन में नागा और वैष्णव साधुओं की टोली विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
होली के पांचवें दिन आयोजित इस परंपरागत कार्यक्रम में मंदिर से भगवान शिव की पंचमुखी प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान कर पूरे गांव में नगर भ्रमण कराया गया। श्रद्धालुओं ने पालकी को कंधों पर उठाकर गाजे-बाजे के साथ पूरे उत्साह के साथ शिव बारात में हिस्सा लिया।
बारात में शामिल नागा और वैष्णव साधु बैंड, ताशा और डीजे की धुन पर नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। नागा साधुओं की टोली ने विभिन्न धार्मिक करतब और शक्ति प्रदर्शन भी किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य का आनंद लिया और पूरे मार्ग में रंग-गुलाल उड़ाते हुए भगवान शिव के जयकारे लगाए।

पीथमपुर गांव जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर दूर के किनारे स्थित है। यहां एक स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जिसे श्रद्धालु बाबा कलेश्वरनाथ के रूप में पूजते हैं। यह मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
मंदिर में श्रद्धालु भगवान शिव को बेलपत्र, कनेर के फूल और धतूरा अर्पित कर पूजा करते हैं। खासकर सावन माह और के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा करने पर पेट से संबंधित रोगों से राहत मिलती है, निःसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
रंगपंचमी के अवसर पर निकली शिव बारात में श्रद्धालु रंग-गुलाल खेलते हुए हसदेव नदी तट तक पहुंचे। यहां नागा साधुओं ने पारंपरिक शाही स्नान किया। इसके बाद भगवान शिव की पंचमुखी प्रतिमा को पुनः मंदिर परिसर में स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
रंगपंचमी के साथ ही पीथमपुर में 15 दिवसीय मेले की भी शुरुआत हो जाती है। इस दौरान आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और धार्मिक आस्था के साथ मेले का आनंद लेते हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाली बाबा कलेश्वरनाथ की यह शिव बारात क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
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