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छत्तीसगढ़ महिला संगठन (एन एफ आई डब्लू) कोरबा द्वारा 115 वां महिला दिवस मनाया गया।

 

कोरबा –  बालको एटक एवं छत्तीसगढ़ महिला संगठन (एन एफ आई डब्लू )जिला कोरबा द्वारा बालको एटक कार्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च शाम 4:00 बजे से मनाया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कामरेड महेश बाई,सुनीता बाई,कुंवर बाई,शिवा मांडवी,यशोदा बाई,बुदेश्वरा बाई,कविता राठौर द्वारा किया गया तत्पश्चात वरिष्ठ महिला साथियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ महिला संगठन (एन एफ आई डब्लू) राज्य सहायक सचिव कामरेड विजय लक्ष्मी चौहान ने कहा कि हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन होता है. लेकिन यह क्यों मनाया जाता है? और कब इसकी शुरुआत हुई? सभी बहनों को जानना जरूरी है।

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन एक श्रम आंदोलन था, इस आयोजन की शुरुआत का बीज 1908 में तब पड़ा, जब न्यूयॉर्क शहर में 15 हज़ार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और वोट देने की माँग के साथ विरोध प्रदर्शन निकाला था.

 

 

इसके एक साल बाद अमेरिकी सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की लेकिन इस दिन को अंतरराष्ट्रीय बनाने का विचार क्लारा जेटकिन नाम की महिला के दिमाग़ में आया था. उन्होंने अपना ये आइडिया 1910 में कॉपेनहेगन में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑफ़ वर्किंग वीमेन में दिया था.

 

 

इस कांफ्रेंस में 17 देशों की 100 महिला प्रतिनिधि हिस्सा ले रही थीं, इन सबने क्लारा के सुझाव का स्वागत किया था. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी, स्विट्जरलैंड में मनाया गया इसका शताब्दी आयोजन 2011 में मनाया गया था, इस लिहाज़ से 2026 में हम लोग 115 वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं
मेहनतकश भाइयों बहनों महिलाओं पर खास तौर से शोषित पीड़ित वर्ग की महिलाओं पर लगातार अत्याचार बढ़ता जा रहा है। शोषक वर्ग के लोगों ने महिलाओं का उपभोग की वस्तु बना दिया है। शोषक वर्ग ने एक ऐसा माहौल बना रखा है की हर जगह महिलाओं पर खतरा न सिर्फ बना हुआ है बल्कि बढ़ता जा रहा है। ऑफिसों, बाजरो, दुकानों, स्कूलों , अस्पतालो, कारखानों, रेलो ,सड़कों, हवाई जहाजों ,कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है मौजूदा सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण का नारा लगा रही है दूसरी तरफ महिलाओं के श्रम का जबरदस्त शोषण कर रही है।

 

 

छत्तीसगढ़ महिला संगठन एन एफ आई डब्लू के कामरेड संतोषी बरेढ ने कहा किआज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, हम सभी को यह याद दिलाने की आवश्यकता है कि महिला सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारे राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि की कुंजी है। हमारे समाज में महिलाओं की भूमिका अनमोल है, और उनके अधिकारों का संरक्षण एवं सम्मान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 

कामरेड कविता राठोर ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन हमें यह प्रेरणा देता है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तब राष्ट्र भी सशक्त होता है। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ हर महिला को अपनी क्षमता के अनुसार उड़ान भरने का पूरा अवसर मिले, और वह अपने सपनों को साकार कर सके।

 

 

इसके साथ कई महिला साथियों ने अपनी बात को राखी और इस अवसर पर बैठक के प्रदेश महासचिव कामरेड हरिनाथ सिंह ने कहा की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सैकंडौ वर्षों से मनाया जा रहा महिलाओं पर अत्याचार आज भी हो रहा है उसको रोकने के लिए बड़े-बड़े कानून बनाए गए फिर भी अपराध की संख्या कम नहीं हो रहा बालकों में सबसे पहले अभी तक नहीं महिला दिवस मनाया जाने का कार्यक्रम शुरू किया बाल को कारखाना में महिला श्रमिकों को जो सुविधा नहीं मिलती थी वह सुविधा दिलवाया गया आज महिलाओं के स्थिति शिक्षित देश होने के बाद भी 100% सही नहीं है भारत देश में बहुत सारी ऐसी घटनाएं घटी जिसको व्यान करना पर आज रोंगटे खड़ी हो जाती हैं एटक यूनियन के महासचिव सुनील सिंह ने अपने संबोधन में कहा की 8 मार्च महिला दिवस पर महिलाओं के योगदान, बलिदान, और संघर्ष को याद दिलाता है आज महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में, डाक्टर, इंजीनियर, नेता , खेल,कलाकार, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली है महिलाओं को अपने अधिकार पाने के लिए हर पल हर समय संघर्ष करना पड़ेगा।

 

भाकपा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस पावन अवसर पर,आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, समान और सम्मानजनक वातावरण तैयार करेंगे। नारीशक्ति के उत्थान के लिए शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, और राजनीतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में ठोस कदम उठाने होंगे। और शोषण, दमन अत्याचार के खिलाफ आवाज को बुलंद करेंगे।, बालको एटक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष एस के सिंह ने कहा की महिलाओं को जन्म से ही संघर्ष करना पड़ता है महिलाओं को शिक्षा में ,समाज में , हर जगह संघर्ष करना पड़ता है महिलाओं पर अत्याचार आजादी के पहले और आजादी के बाद भी हो रहा है आज भी महीला भ्रुण की हत्या कर दी जाती है जबकि आज भारत शिक्षित देश है

 

इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी में उपस्थित और भी महिला साथीयो ने संबोधित किया ।

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