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सुदूर अंचल में वन विभाग की ऐतिहासिक पहल, कूप कटाई और वन संसाधनों से ग्रामीणों को मिला नया सहारा

मोहला (ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के सुदूर अंचलों में वन विभाग की योजनाएँ अब जमीन पर उतर चुकी हैं और इसका प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। वन मंडल मोहला द्वारा वर्ष 2025 में की गई ऐतिहासिक कूप कटाई न केवल राजस्व के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित हुई है। बल्कि इसने ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को भी सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।

पूर्व में जहाँ 18 कूपों में से केवल 4.5 कूपों की ही कटाई हो पाती थी। वहीं वर्ष 2023 में वन मंडल के गठन के बाद यह संख्या लगातार बढ़ी और वर्ष 2025 में सभी 18 कूपों सहित पूर्व के 10 अतिरिक्त कूपों की कटाई कर नया रिकॉर्ड कायम किया गया है। यह सफलता ग्रामीणों की जागरूकता, प्रशासन और पुलिस की सहभागिता तथा जनप्रतिनिधियों के सहयोग से संभव हो पाई है।

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वन कूपों की कटाई केवल लकड़ी के उपयोग तक सीमित नहीं है बल्कि इससे प्राप्त राजस्व ग्रामीणों की जिंदगी को नई दिशा दे रहा है। कटाई से जहां रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ, वहीं वन प्रबंधन समिति को कुल राजस्व का 20 प्रतिशत लाभांश भी प्राप्त हुआ है, जिससे गांवों में अधोसंरचना विकास, रोजगार मूलक गतिविधियां और सामाजिक योजनाएँ गति पकड़ रही हैं।

इसके साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण, लघु वनोपज संग्रह, किसान वृक्ष मित्र योजना, नर्सरी विकास और वृक्षारोपण जैसी योजनाओं से भी ग्रामीणों की आमदनी में निरंतर वृद्धि हो रही है। इन योजनाओं के माध्यम से वन विभाग ने ग्रामीणों को वन संरक्षण में भागीदार बनाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया है।

20 जून 2025 को ऑनलाईन ऑक्शन से वनमंडल मोहला को 2.72 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक आमदनी हुई, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि सुदूर अंचल में भी यदि कार्ययोजना, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामुदायिक सहभागिता के साथ कार्य हो, तो वहाँ से भी राज्य के विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

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