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कटघोरा में जायसवाल समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला: मुख्यमंत्री ने तहसीलदार को लगाई फटकार, तुरंत कार्रवाई के निर्देश

कोरबा/कटघोरा, 8 नवम्बर 2024: कटघोरा के वार्ड 10 मल्दा घाट क्षेत्र में जायसवाल समाज की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य का मामला अब तूल पकड़ चुका है। जायसवाल समाज द्वारा इस अवैध कब्जे के खिलाफ पहले भी तहसीलदार के पास शिकायत की जा चुकी थी, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस मुद्दे को जायसवाल समाज ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष उठाया, जिन्होंने तत्परता से इस मामले का संज्ञान लिया और तहसीलदार को फटकार लगाते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

दरअसल, यह विवाद जमीन के खसरा नंबर 481, 479, और 485 पर है। इन खसरों में से खसरा नंबर 481 और 479 की जमीन, जिसे जायसवाल समाज के उपयोग के लिए छोड़ा गया था, पर पिछले कुछ समय से कटघोरा के एक रसूखदार व्यक्ति, प्रशांत अग्रवाल द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है। इसी प्रकार, खसरा नंबर 485 की जमीन, जो जायसवाल समाज भवन के पास स्थित है, पर भी अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस निर्माण के कारण समाज के लोगों के पार्किंग और अन्य सामुदायिक उपयोग की जगह पर अतिक्रमण हुआ है, जिससे समाज के सदस्यों में गहरी नाराजगी है।

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मुख्यमंत्री ने तहसीलदार को लगाई फटकार

जायसवाल समाज की शिकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तुरंत मौके पर मौजूद तहसीलदार से इस मामले में जानकारी मांगी और उनके कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री ने तहसीलदार को सख्त लहजे में फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए और इसके लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि इस भूमि का उपयोग समाज के जनकल्याण कार्यों के लिए किया जाए, ताकि यह जमीन समाज के लिए सार्थक साबित हो सके।

मुख्यमंत्री की इस सख्त प्रतिक्रिया से जायसवाल समाज के लोगों ने राहत महसूस की और मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। समाज के लोगों ने आशा जताई कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होगी और उक्त जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त किया जाएगा।

प्रांतीय सम्मेलन बना शिकायत का मंच

आज कटघोरा में जायसवाल समाज द्वारा एक प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस सम्मेलन के दौरान जायसवाल समाज के पदाधिकारियों ने अपनी पुरानी शिकायत को मुख्यमंत्री के सामने दोहराया। पदाधिकारियों ने बताया कि खसरा नंबर 481 और खसरा नंबर 479 के हिस्सों को 20 फीट की रास्ता छोड़कर विभिन्न भूखंडों में तोड़ा गया था, जिसमें से कुछ भूखंडों का समाज की सामुदायिक गतिविधियों में उपयोग होता था। इसी प्रकार, खसरा नंबर 485 का 0.018 हेक्टेयर हिस्सा भी सरकारी जमीन में शामिल है, जिसे अवैध कब्जे से मुक्त कराने की आवश्यकता है।

अवैध कब्जे से उपजा आक्रोश

जायसवाल समाज के सदस्यों का कहना है कि इस भूमि पर अवैध निर्माण से न केवल उनके सामुदायिक उपयोग की जगह पर अतिक्रमण हुआ है, बल्कि समाज की भावनाओं पर भी चोट पहुंची है। यह भूमि समाज के लिए विशेष महत्व रखती है और इसे पार्किंग और अन्य सामुदायिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जाता था। अवैध कब्जा होने के कारण समाज के लोग यहां अपनी गाड़ियों को पार्क नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें दूसरे स्थानों पर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व में भी शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी जायसवाल समाज द्वारा तहसीलदार को शिकायत की गई थी, जिसमें उन्होंने प्रशांत अग्रवाल द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे और निर्माण कार्य की जानकारी दी थी। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई थी, जिससे समाज के लोग नाराज थे। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस मामले में तत्परता से कदम उठाएगा और इस भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराएगा।

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