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कोरबा में निगम का बड़ा घोटाला: सार्वजनिक सड़क बेचकर जनजीवन बाधित, पार्षद बोले- “भ्रष्ट अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई”

कोरबा। नगर निगम कोरबा के अधिकारियों द्वारा जनता की सुविधाओं से खेलते हुए, रविशंकर शुक्ल नगर से कृष्णा नगर को जोड़ने वाली वर्षों पुरानी सड़क को छलपूर्वक निजी स्वामियों को बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। इसके चलते सड़क के बीचों-बीच खुदाई कर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस अजीबोगरीब सौदेबाजी पर स्थानीय पार्षद अब्दुल रहमान ने निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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सड़क को गुपचुप बेचने का कारनामा

पं. रविशंकर नगर के विस्तार में भूखण्ड क्रमांक-75 और 76 की नीलामी के समय निगम ने इन्हें सड़क से लगभग पांच फीट दूर की मार्किंग के साथ बेचा था। विजय सिंह के बेटे शुभम सिंह और अमित कुमार शुक्ला द्वारा खरीदे गए इन भूखण्डों की खरीद-फरोख्त प्रक्रिया में निगम ने उस समय सड़क को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया। परंतु, कुछ समय बाद, कथित रूप से निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इन्हीं भूखण्डों की रजिस्ट्री में सड़क की जमीन को भी निजी स्वामित्व में जोड़ दिया गया।

जनता के उपयोग की सड़क, अब निजी निर्माण के लिए खुदी

नवंबर 2024 में अमित कुमार शुक्ला के भाई अश्वनी शुक्ला ने निर्माण कार्य के नाम पर जेसीबी की मदद से मुख्य सड़क पर गहरे गड्ढे खुदवा दिए, जिससे डामरयुक्त यह सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। वर्ष 2020-21 में निगम द्वारा बनाई गई इस सड़क को बंद किए जाने से स्थानीय लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि निगम की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते उनकी सुविधा छिन गई है और यह किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

पार्षद का तीखा प्रहार – जांच और न्याय की मांग

स्थानीय पार्षद अब्दुल रहमान ने नगर निगम की कार्यशैली पर सख्त सवाल खड़े करते हुए कहा, “यह सोचने की बात है कि बीते 20-30 वर्षों से जनता के आवागमन के लिए बनाई गई सड़क को कैसे निगम ने निजी स्वामित्व में बेच दिया? यह भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने जनता के हक की जमीन को छलपूर्वक निजी संपत्ति में बदल दिया।” पार्षद ने मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

धरना प्रदर्शन की चेतावनी, जनता के साथ खड़े रहेंगे पार्षद

पार्षद रहमान ने निगम को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि निगम इस गड़बड़ी को नहीं सुधारता और सड़क को फिर से जनता के उपयोग के लिए नहीं खोलता, तो वे वार्डवासियों के साथ साकेत भवन के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क की खुदाई करने वाले भू-स्वामी अमित कुमार शुक्ला और अश्वनी शुक्ला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “जनता के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह विरोध आंदोलन का रूप लेगा।”

 

निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, जनता में आक्रोश

 

निगम के इस कदम से न केवल वार्डवासी नाराज हैं, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी इसका विरोध शुरू हो चुका है। वर्षों से सार्वजनिक आवागमन के लिए प्रयुक्त इस मुख्य सड़क को कैसे निगम ने बेचा, यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले ने नगर निगम के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि निगम ने इस सौदे में केवल निजी हित साधने के लिए जनता के अधिकारों की अनदेखी की है।

जनता के अधिकारों की लड़ाई

यदि यह सड़क बंद रही, तो कृष्णा नगर और रविशंकर शुक्ल नगर के निवासियों का जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा। पार्षद अब्दुल रहमान ने नगर निगम को चेतावनी दी है कि यदि जनता की सुविधा बहाल नहीं की गई, तो उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। यह मामला जनता के अधिकारों का सवाल है, और पार्षद रहमान ने इसे न्याय की लड़ाई बताते हुए कहा है, “जब तक जनता को उनका अधिकार नहीं मिलता, निगम का घेराव जारी रहेगा।”

यह प्रकरण निगम के कर्तव्यों की अनदेखी और निजी स्वार्थों की पूर्ति का प्रतीक बन गया है। अब देखना यह है कि नगर निगम अपनी गलती को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर जनता और जनप्रतिनिधियों को मिलकर यह न्याय हासिल करना पड़ेगा।

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