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मॉडर्न सोसायटी से ज्यादा ज्ञान रखते हैं आदिवासी

छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन का प्रथम वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न

रायपुर।  जनजातीय समुदाय मॉडर्न सोसायटी से ज्यादा ज्ञान रखता है। सहज, सरल प्रकृति के करीब नैसगिर्क जीवन जीने वाले आदिवासी समुदाय का पारंपरिक ज्ञान हमसे  ज्यादा उन्नत है। आदिवासी महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें उच्च शिक्षा के पर्याप्त अवसर मिलें और वे हर क्षेत्र के प्रति जागरुक बनें। यह बातें छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन (सीजीएसए) और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से वैश्विक परिदृश्य में आदिवासी महिलाओं की स्थिति पर आयोजित प्रथम वार्षिक सम्मेलन के अंतिम दिन विषय विशेषज्ञों, विद्वानों और शोधार्थियों ने कहीं।

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सम्मेलन के द्वितीय दिवस 29 जून शनिवार को आयोजित समापन समारोह के मुख्य अतिथि आयोजन समिति के संरक्षक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला, विशेष अतिथि इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के प्रबंध समिति की सदस्य प्रो. अंशु केडिया, मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी के सचिव प्रो. ध्रुव दीक्षित, मध्यप्रदेश सोशियोलाजिकल सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. महेश शुक्ला, छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन की अध्यक्ष और सम्मेलन की समन्वयक प्रो. प्रीति शर्मा, रविवि के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला के अध्यक्ष प्रो. एन. कुजूर, सीजीएसए के सचिव और सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. एल.एस. गजपाल,  आयोजन की सह-समन्वयक प्रो सुचित्रा शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रो. सोनीता सत्संगी, संरक्षक प्रो. श्रद्धा गिरोलकर, प्रो. पुष्पा तिवारी, प्रो. मंजू झा सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारीगण, प्राध्यापकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित थे।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि आयोजन समिति के संरक्षक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि आदिवासी समुदाय की महिलाएं सशक्त और आत्मिर्भर रहती हैं। देश के विभिन्न राज्यों की आदिवासी संस्कृति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की वजह से ही हमारी सांस्कृति संरक्षित है। आदिवासी समुदाय का दिल बहुत पवित्र है, उनके भीतर छल-कपट नहीं दिखता। वे प्राकृतिक रूप से सहज और सरल रहते हैं। इस अवसर पर मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी मध्यप्रदेश के सचिव प्रो. ध्रुव दीक्षित, मध्यप्रदेश सोशियोलॉजिकल सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. महेश शुक्ला और इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के प्रबंध समिति की सदस्य प्रो. अंशु केडिया  ने छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन के गठन और प्रथम वार्षिक सम्मेलन के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दीं।

सम्मेलन के द्वितीय दिवस इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी की अध्यक्ष प्रो. मैत्रेयी चौधरी ने ऑनलाइन उपस्थिति दी और छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन के गठन की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन को सराहनीय प्रयास बताया। सम्मेलन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए रविवि के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला के अध्यक्ष प्रो. एन. कुजूर ने कहा कि जनजातीय जीवन में महिला और पुरुष के बीच कोई अंतर नहीं होता। पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं बाजार जाती हैं और अपनी वस्तुयों का विक्रय कर आवश्यक सामग्रियों का क्रय करती हैं। प्रो. कुजूर ने कहा कि जैसे-जैसे विकसित समुदाय के सम्पर्क में जनजातीय समाज आता जा रहा है वैसे-वैसे उनके जीवन में समस्याएं ज्यादा आ रही हैं। को-चेयर के रूप में उस्थित प्रो. पुष्पा तिवारी ने कहा कि वे 10 प्रतिशत सुंदर होंगे, लेकिन 90 प्रतिशत परिश्रम करते हैं और हम 90 प्रतिशत अपनी सुंदरता पर ध्यान देते हैं। उनके पास मॉडर्न सोसायटी से भी ज्यादा ज्ञान होता है। प्रो. नीरजा ने कहा कि मेडिसीन, हर्बल, कृषि आदि क्षेत्रों में जनजातीय वर्ग को हमसे कहीं ज्यादा ज्ञान है और हमें उनसे सीखने की जरूरत है।

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता रविवि के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला की प्राध्यापक डा. हेमलता बोरकर ने की।  को-चेयर मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी मध्यप्रदेश के सचिव प्रो. ध्रुव दीक्षित ने कहा कि जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष प्रावधान करने की आवश्यकता है। इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के प्रबंध समिति की सदस्य प्रो. अंशु केडिया ने आदिवासी महिलाओं की स्थिति पर शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत किये गये शोध पत्रों की सराहना की। प्रो. श्रद्धा गिरोलकर ने कहा कि हम आदिवासी महिलाओं की बात करते हैं तो निश्चित रूप से वे हमसे बहुत आगे हैं। हम आर्थिक रूप से भौतिक संसाधनों को लेकर उनसे आगे हो सकते है लेकिन उनके विचार हमसे बहुत आगे हैं और वे हमसे बहुत ज्यादा आधुनिक हैं।

इसके पूर्व इस वार्षिक सम्मेलन में ही तीन नए कानूनों की भी जानकारी दी गई। जिला प्रशासन रायपुर द्वारा न्यू क्रिमिनल ला रिफार्म्स विषय पर कैपिसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत  कानून के प्राध्यापक प्रो. अभिनव शुक्ला, प्रो हीना इलियास और  अधिवक्ता शुभम तोमर ने 1 जुलाई से देश में लागू हो रहे तीन नए कानूनों की विस्तार से जानकारी प्रदान की। सम्मेलन के चार तकनीकी सत्र में 25 से भी ज्यादा शोध पत्रों का वाचन किया गया। छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन की उपाध्यक्ष प्रो. सुचित्रा शर्मा ने निष्कर्ष प्रस्तुत किया। सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. एल.एस. गजपाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह के मुख्य अतिथि आयोजन समिति के संरक्षक और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने सत्र अध्यक्षों. विषय विशेषज्ञों, प्राध्यापकों,  शोधार्थियों तथा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये। रविवि के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला के अध्यक्ष प्रो. एन. कुजूर ने आभार व्यक्त किया। यह जानकारी छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय एसोसिएशन की अध्यक्ष और सम्मेलन की समन्वयक प्रो. प्रीति शर्मा, रविवि के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य अध्ययनशाला के अध्यक्ष प्रो. एन. कुजूर, सीजीएसए के सचिव और सम्मेलन के आयोजन सचिव प्रो. एल.एस. गजपाल ने दी।

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