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प्रवर्तित इंजीनियरिंग महाविद्यालय,आदिवासी, हरिजन एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए खोला इंजीनियरिंग महाविद्यालय, शासन नहीं दे रही है ध्यान, 25 जुलाई से आंदोलनरत

रायगढ़ –  पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का एक मात्र शासन द्वारा प्रवर्तित इंजीनियरिंग महाविद्यालय हैं, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने सत्र 2000 में रायगढ़ तथा आसपास के जिलों के निर्धन आदिवासी, हरिजन एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के इंजीनियरिंग की शिक्षा के लिए खोला गया था। इस क्षेत्र को कम फीस में शिक्षा देने वाला वृहद अधोसंरचना एवं अति अनुभवी शिक्षकों से भरपूर एक मात्र विकल्प है।

इस महाविद्यालय का संचालन शासन द्वारा निर्मित एक सोसायटी से किया जाता है, जिसके अध्यक्ष तकनीकी शिक्षा मंत्री वर्तमान में श्री उमेश पटेल एवं सदस्य  प्रकाश नायक विधायक, रायगढ़ प्रभारी मंत्री वर्तमान में  रवीन्द्र चौबे, रायगढ़ कलेक्टर एवं अन्य उच्च अधिकारी है।

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ऐसे ताकतवर संचालक मंडल के बाद भी गरीबों का यह विकल्प पिछले कुछ सालों से शासन की अनदेखी के कारण अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। अनदेखी ऐसी कि शिक्षकों को 17 माह से वेतन जैसी मूलभूत अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है ना तो छात्र-छात्राओं को लाभ मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी से बदहाली के कारण ईलाज के अभाव में यहां के तीन कर्मचारियों के परिवारजनों की मृत्यु हो चुकी है जो दुर्भाग्यजनक है ।

इस महाविद्यालय से न केवल हमारा बल्कि यहां के निर्धन छात्र-छात्राओं का भी भविष्य जुड़ा है, इसे बचाने के प्रयास में हम सभी गत 25 जुलाई से आंदोलनरत हैं और विभिन्न माध्यमों से शासन को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। आप सभी से निवेदन है कि इस महाविद्यालय को बचाने में सहयोग करें ।

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