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BREAKING : कांग्रेस संगठन की चूक तो नहीं..! मोदी ने हाईजैक किया सिंहदेव का मुद्दा, घर की बात संभाल नहीं पाए कांग्रेस के नेता

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रायपुर। भाजपा की परिवर्तन यात्रा के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार से हजारों करोड़ मिला है। यहां सड़कें हों, रेल हो, बिजली हो, दूसरे ऐसे अनेक विकास के काम हो हमने छत्तीसगढ़ के लिए पैसे की कोई कमी नहीं रखी। यह बात मैं कह रहा हूं, ऐसी बात नहीं है, यहां के उप मुख्यमंत्री जी ने सार्वजनिक सभा में कही थी। उप मुख्यमंत्री जी ने सच बोला तो पार्टी के नीचे से ऊपर तूफान खड़ा हो गया। उनको फांसी पर लटकाने के खेल खेलने लग गए।’

छत्तीसगढ़ के पहले उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के संबंध में पीएम मोदी का यह बयान दरअसल कोई सामान्य बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारे में हंगामा मचाने वाला बयान है। सिंहदेव को उप मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस संगठन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सब कुछ ठीक है और सब एक हैं, लेकिन ऐसा नहीं था। कांग्रेस संगठन ने इसमें बड़ी चूक कर दी। उप मुख्यमंत्री सिंहदेव ने पीएम मोदी के मंच पर मौजूदगी की स्थिति में यह कहा कि राज्य को केंद्र से पूरी मदद मिलती है, यह एक जिम्मेदार नेता का शिष्टाचार वश दिया गया बयान है। यूपीए सरकार में गृहमंत्री और वित्त मंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सिंहदेव के बयान पर यही प्रतिक्रिया भी दी। इसके विपरीत कांग्रेस संगठन में जो कुछ हुआ, उसने पार्टी की एकजुटता में सेंध लगाने का मौका दे दिया।

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कांग्रेस पार्टी, कांग्रेस पार्टी की छत्‍तीसगढ़ प्रभारी कुमारी सैलजा ने ऐसी कोई पहल नहीं की, जिससे उप मुख्यमंत्री सिंहदेव के बयान को एक सामान्य घटना के रूप में टाला जा सके, बल्कि सिंहदेव से ही जवाब मांगा गया। डेढ़ दशक तक कांग्रेस के विपक्ष में रहने के दौरान जब पीएल पुनिया कांग्रेस प्रभारी बने थे, तब सभी वर्ग के नेताओं में एकजुटता का संदेश देना बड़ी चुनौती थी। पुनिया ने इस चुनौती को सरकार बनाने के अवसर के रूप में भुनाया था। कांग्रेस के सभी नेता एक होकर चुनाव लड़े थे। अब जब फिर छत्तीसगढ़ में चुनाव सिर पर है, तब पीएम मोदी ने कांग्रेस की एकजुटता में ही सेंध लगा दी।

क्या कहा था सिंहदेव ने 

रायगढ़ में पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उप मुख्यमंत्री सिंहदेव ने कहा था,मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि केंद्र सरकार ने कभी हमारे राज्य से भेदभाव नहीं किया। जब भी हमने केंद्र से मांगा, हमें वहां से हर बार मिला है।

निश्चित तौर पर सिंहदेव का यह बयान पार्टी लाइन से अलग था। पार्टी के शीर्ष नेता लगातार भेदभाव का आरोप लगाते मोदी सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। लिहाजा, यह बयान बड़ा मुद्दा बना और उन्हें सफाई देनी पड़ी। सियासी पंडितों की राय में, ऐन चुनाव के वक्त कांग्रेस पार्टी चाहती तो इसे सिहंदेव की सौम्य सियासत मानते हुए बात को तूल देने की बजाए खत्‍म कर देती। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इस पूरे मामले में पार्टी प्रभारी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 2018 के चुनाव के दौरान जब पुनिया प्रभारी थे, तब कई तरह की अफवाहें सामने आई थीं। उनको लेकर कई ऑडियो वायरल हुए थे, लेकिन वे पूरे धैर्य के साथ पार्टी के लिए काम करते रहे। उन्होंने पूरी पार्टी को जोड़ दिया था। इसके विपरीत जब चुनाव के समय फिर से पार्टी में एकजुटता का संदेश देने की जरूरत है, तब छत्तीसगढ़ प्रभारी कुमारी सैलजा ने ऐसी कोई पहल नहीं की और एक बार फिर कांग्रेस में गुटबाजी को हवा मिल गई।

चुनाव में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में 15 साल की भाजपा की सरकार के बाद जब कांग्रेस ने पूरे दम-खम के साथ चुनाव मैदान में अपनी ताकत लगाई तो उसका असर दिखा और पार्टी 68 सीटें जीतने में कामयाब रही। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहला मौका था। इसके बाद चार साल से भी ज्यादा समय तक भाजपा सुस्त दिखती रही, लेकिन अचानक भाजपा की सक्रियता ने प्रदेश में एक नई लहर पैदा की। इस लहर के बीच में उप मुख्यमंत्री सिंहदेव के मुद्दे ने नई बहस को जन्म दे दिया है। आपको बता दें कि सीएम भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने पहले ही दिन से उन मुद्दों पर फोकस किया, जो चुनाव के दौरान मतदाताओं में अपील करने वाले थे। ऐसे समय में सिंहदेव के बयान और उस बयान के पार्टी के भीतर चल रही हवा ने नई बहस को जन्म दे दिया है। भाजपा ने इसे स्थानीय स्तर पर भुनाने के बजाय पीएम मोदी के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा कर दिया है।

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