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खनिज, माशिमं, आबकारी समेत बीस निगम, मंडलों से सरकार ने बजट खजाने में जमा करने कहा

रायपुर, 27 जनवरी। राज्य सरकार ने अपने बीस से अधिक सार्वजनिक उपक्रमों से बैंकों में जमा सरप्लस फंड को वापस मांगा है। विशेष सचिव वित्त शारदा वर्मा ने इन उपक्रमों के एमडी और सीईओ को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसके जरिए सरकार करीब पांच सौ करोड़ रुपए एकत्रित करना चाहती है।

20 जनवरी को भेजे पत्र में वर्मा ने कहा है कि यह राशि सरकार के, के डिपाजिट में जमा की जाएगी । जिन उपक्रमों के सीईओ, एमडी को यह पत्र भेजा गया है उनमें ,पुलिस हाउसिंग, ग्रामोद्योग बोर्ड, आबकारी निगम, खनिज निगम, माध्यमिक शिक्षा मंडल, सीएसआईडीसी। जैसे बड़े बजट वाले बीस निगम शामिल हैं। ये सभी निगम मंडल, राज्य सरकार के द्वारा दिए जाने वाले बजट से ही चलते हैं जबकि कुछ अन्य केंद्रीय अनुदान से संचालित हैं।

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वैसे हर साल ऐसा पत्र

भेजा जाता है…

वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार ऐसा पत्र अमुमन हर साल जारी किया जाता है, ताकि निगम, मंडलो को अनावश्यक खर्चों से रोका जा सके। वित्त विभाग ने यह पत्र , बीते कुछ सालों बाद लिखा है। बीते दो सालों में कोरोना की वजह से बजट कटौती के कारण इसकी जरूरत नहीं पड़ी थी। इस बार सरकार ,इन निगमों के जरिए पांच सौ करोड़ जुटाने जा रही है।

सरकार पर 53 हजार करोड़ का कर्ज है अभी

वित्त विभाग के इस कदम को सूत्र राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति से जोडक़र देख रहे हैं। राज्य सरकार पर इस समय लगभग 53 हजार करोड़ का कर्ज है जो उसने आरबीआई, और अन्य वित्तीय संस्थानों से लिया है। इसलिए साल से अंतिम दो महीनों में खर्च चलाने के लिए पाई-पाई जोड़ रही है। सरकार को इस समय 31 मार्च से पहले खेतीहर मजदूर न्याय योजना लागू करनी है जिस पर करीब डेढ़ हजार करोड़ रूपए खर्च करने हैं। साथ ही गोधन न्याय योजना, धान खरीदी का बोनस के अंतिम किश्त का भी भुगतान करना है।

सरकारी खरीदी पर भी लगेगी रोक

वित्त विभाग जल्द ही ,सरकार के अन्य विभागों में होने वाली खरीदियों पर भी रोक लगाने जा रहा है। यह रोक 15 फरवरी के बाद होने वाली खरीदी पर रहेगी।सरकारी विभाग, बजट खर्च करने के इरादे से अंतिम महीनों में खरीदी के नाम पर राशि खर्च कर देते हैं।

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