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6 दिन में इतनी बारिश,1000 मिमी का आंकड़ा पार

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रायपुर। प्रदेश में अब कहीं जाकर इंद्रदेवता की रहम हुई है। शुक्रवार को तटीय ओडिशा पर कम दाब का क्षेत्र बना, वहीं समुद्र तल से मानसून द्रोणिका तटीय ओडिशा के आसपास कम दाब के क्षेत्र के साथ स्थित है। दक्षिण-पूर्व से पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी तक समुद्र तल से 2.1 किमी तक फैली है। दक्षिण की तरफ झुकी है।
समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर तक फैला हुआ एक चक्रवाती घेरा भी मध्यप्रदेश के ऊपर स्थित है। इन सभी ने मिलकर प्रदेश में जमकर बारिश करवाई। रायपुर से लेकर जगदलपुर तक बादल फटे जैसे हालत बन गए। जगदलपुर में महज 24 घंटे में 228.5 मिमी बारिश हुई, जो सीजन में किसी एक स्थान पर सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड है। रायपुर में भी 65.8 मिमी बारिश हुई, माना में 102.6 मिमी।
शुक्रवार-शनिवार की रात भर बारिश हुई। अगले 24 घंटे में रायपुर, दुर्ग, बस्तर संभाग के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश में इस सीजन में अब तक 1000 मिमी बारिश हो चुकी है, जो औसत आंकड़े से एक मिमी अधिक है। पूरे सीजन में औसतन 1200 मिमी बारिश होती है। बहरहाल अभी भी मध्य छत्तीसगढ़ के आठ जिलों सहित सरगुजा संभाग में और अधिक बारिश, लगातार बरसात होने से स्थिति सुधर सकती है।
सर्वाधिक बारिश- जगदलपुर में 288.5 मिमी (28.85 सेमी)
बस्तर संभाग में फिर जमकर बारिश- तोकपाल 188.3 मिमी, अंतागढ़ 99.5 मिमी, लोहांडीगुड़ा 77.2, गीदम 78.2, पखांजूर 77.0
बारिश के आंकड़े जिलेवार-
सामान्य बारिश वाले जिले- बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बीजापुर, धमतरी, गरियाबंद, करीबधाम, कांकेर, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर।
औसत से अधिक बारिश- बस्तर 1582.6 मिमी (56), दंतेवाड़ा 1428.8 मिमी (26), नारायणपुर 1435.5 मिमी (36), सुकमा 1466 मिमी (53) (नोट- ब्रैकेट के डेटा औसत से अधिक बारिश के हैं, सभी फीसद में हैं।)
औसत से कम बारिश- बेमेतरा 691.4 मिमी (21), दुर्ग 620.3 मिमी (27), जांजगीर 773.2 मिमी (24), जशपुर 773.6 (36), कोरबा 849.6 (26), मुंगेली 604 (27),राजनांदगांव 666.6 मिमी (21) रायपुर 696 मिमी (22), सरगुजा 604.7 (43)
बीते पांच सालों में मानसूनी बारिश के आंकड़े-
2015- 1136.4 मिमी (मानसून- 1028.6, पोस्ट मानसून- 70.8)
2016- 1315.8 मिमी (मानसून- 1177.9, पोस्ट मानसून के बाद- 79.8)
2017- 1124.4 मिमी (मानसून- 1124.4, पोस्ट मानसून- 61.8)
2018- 1110.8 मिमी (मानसून- 1050.2 मिमी के करीब)
2019- 1000.0 मिमी (मानसून- 12 अक्टूबर को होगी मानसून की वापसी)
इस बार मौसम विभाग के सभी पूर्वानुमान सटीक साबित हुए हैं। बादल जमकर बरसे। अगले 24 घंटे में प्रदेश के रायपुर, दुर्ग संभाग में कहीं-कहीं पर भारी से अतिभारी बारिश हो सकती है। 10 सितंबर के पहले एक सिस्टम और सक्रिय होता दिख रहा है। इससे जो भी कमी रह गई है, वह दूर हो जाएगी।
एचपी चंद्रा, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी, लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र
प्रदेश में बांधों के हालात सुधरे
प्रदेश में लगातार बन रहे मजबूत सिस्टम के चलते बांधों की स्थिति में सुधार हो रहा है। बांधों में पानी की मात्रा बढ़ी है। बस्तर संभाग के बांधों में पर्याप्त पानी है, लेकिन अभी भी चिंता का विषय मध्य छत्तीसगढ़ के बांध बने हुए हैं। रायपुर, दुर्ग जिले की प्यास बुझाने वाले पं. रविशंकर शुक्ल यानी गंगरेल बांध आधा भी नहीं भरा है। हालांकि सच्चाई यह भी है कि अगस्त में खेती के लिए पानी मुहैया करवाने के लिए बांध के गेट खोले गए थे, इसलिए इसका जल स्तर थोड़ा कम हुआ है। बहरहाल अच्छी खबर यह है कि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे, इसके बाद 12 सितंबर तक लगातार सिस्टम बनने का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके चलते उम्मीद जगी है।
प्रदेश के बांधों की स्थिति-
बांध- जल भराव
मिनी माता बांगो- 78.43
पं. रविशंकर शुक्ल सागर- 43.45
तांदुला- 44.94
दुधावा – 60.65
सिकासार- 74.31
खारंग- 74.31
सोंढूर- 82.80
मुरुमसिल्ली- 49.89
कोदर- 46.34
मनियारी- 100.00
केलो- 52.87
(नोट- आंकड़े मिलियन क्यूबिक में।)

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