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छत्तीसगढ़ की विकास दर झारखंड और उत्तराखंड से भी पीछे

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रायपुर । घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते देश की विकास दर भले ही 5 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गई हो लेकिन राज्यों की आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार बरकरार है। वित्त वर्ष 2018-19 में चार राज्यों के जीएसडीपी (ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट) की सालाना वृद्धि दर दस फीसद से ऊपर रही है। इसके बावजूद विकास दर में झारखंड और उत्तराखंड तो पिछड़ा ही छत्तीसगढ़ अपने ही साथ बनें इन दोनों राज्यों से भी फिसड्डी रहा। अब तक पिछड़ते रहे पश्चिम बंगाल ने वित्त वर्ष 2018-19 में 12.58 प्रतिशत विकास दर हासिल की है, जो सभी राज्यों में सर्वाधिक है।
वहीं गोवा, पंजाब और उत्तर प्रदेश विकास दर के मामले में पिछड़ते हुए निचले पायदान पर रहे हैं। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए विकास दर के आंकड़े संबंधित प्रदेश सरकारों के आर्थिक और सांख्यिकी निदेशालय से जुटाकर अपनी वेबसाइट पर जारी किए हैं।
हालांकि अरुणाचल प्रदेश, असम, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा तथा दो केंद्र शासित क्षेत्रों-अंडमान निकोबार व चंडीगढ़ की विकास दर के आंकड़े एक अगस्त 2019 तक उपलब्ध नहीं हुए हैं।
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जिन प्रदेशों की विकास दर के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें चार राज्यों- पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, बिहार और तेलंगाना की विकास दर दस फीसद से अधिक रही है। बंगाल की विकास दर 12.58 प्रतिशत रही है जो सब राज्यों में सर्वाधिक है।
आंध्र प्रदेश की विकास दर का आंकड़ा इतना ही था। इसी तरह तीसरे नंबर पर रहे बिहार ने भी 10.53 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2018-19 में सबसे कम विकास दर गोवा (0.47 प्रतिशत), पंजाब (5.91 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (6.08 प्रतिशत) और उत्तरप्रदेश (6.46 प्रतिशत) की रही है जो देश की आर्थिक वृद्धि दर से भी कम है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2018- 19 में देश की विकास दर 6.8 प्रतिशत रही जो कि बीते पांच साल में न्यूनतम है। चालू वित्त वर्ष में भी इसके 7 प्रतिशत से नीचे रहने का अनुमान है|

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