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इसलिए कराई गई निगम मंडलों की नियुक्तियां रद्द

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रायपुर। नई सरकार के अस्तित्व में आने के हफ्ते भर के भीतर ही कल संवैधानिक पदों को छोड़कर सभी निगम मंडल के अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्तियां रद्द करने के पीछे बड़ा संकेत है।
नये मंत्री मंडल के गठन के तूरंत बाद रिक्त हुए निगम मंडलों में नियुक्तियां शुरु हो जाएंगी। विशेषकर कुछ ऐसे सीनियर विधायक जो मंत्री बनने से वंचित रह जाने वाले हैं उन्हें बड़े निगम मंडल अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि मंत्री मंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल मंत्रियों की संख्या 13 रहना है। भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ ही टी.एस. सिंहदेव एवं ताम्रध्वज साहू मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं।
बाकी दस रिक्त स्थानों के लिए कुछ विधायकों ने दिल्ली तक की दौड़ लगा दी है। दिल्ली पहुंचे हुए लोगों में धनेन्द्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल, अमरजीत भगत, रुद्र गुरु एवं कुलदीप जुनेजा हैं।
माना जा रहा है तीन बार विधायक रहे लोग भी मंत्री पद से वंचित हो सकते हैं। ऐसे सीनियर विधायकों को निगम मंडल में मौका मिल सकता है। पिछली सरकार की तरह संसदीय सचिव पद की परंपरा जारी रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
ताकि मंत्री बनने से रह गए कुछ लोगों को संसदीय सचिव बनाकर संतुष्ट किया जा सके। हालांकि भाजपा शासनकाल में कांग्रेस संसदीय सचिव वाली व्यवस्था का विरोध करती रही थी,
लेकिन पुराने सारे दिग्गज नेताओं के जीतकर आ जाने के कारण मंत्री पद को लेकर जो मारामारी मची हुई है,ऐसे में आगे किसी भी तरह के असंतोष से बचने के लिए एक रास्ता संसदीय सचिव पद भी दिख रहा है।
सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निकटतम कानूनी सलाहकारों से विचार विमर्श भी किया है।  

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