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भारत निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन कार्य में लगे 25 हजार अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले पर लगाई रोक

भिलाई। नई सरकार कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत निर्वाचन कार्य में लगे 25 हजार अधिकारियों, कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं कर पाएगी। भारत निर्वाचन आयोग ने आज एक राज्य सरकार को एक मेल भेजकर तबादले पर रोक लगा दी है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव खतम होने के बाद अब लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता पुनरीक्षण का काम प्रारंभ हो गया है। आज इसके लिए राज्य निर्वाचन कार्यालय में एक अहम बैठक हुई। इसी दौरान दिल्ली से निर्वाचन आयोग का मेल आ गया।
आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य समाप्त नहीं हो जाता, तब तक चुनाव कार्य से जुड़े अफसरों और कर्मचारियों का तबादला नहीं करें। आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए 25 जनवरी का डेट तय किया है। लेकिन, अफसरों का कहना है कि इसमें वृद्धि भी हो सकती है।
ज्ञातव्य है, भाजपा की 15 साल पुरानी सरकार बदलने के बाद कांग्रेस सरकार बड़ी संख्या में अफसरों का ट्रांसफर करने वाली थी। 27 में से करीब 15 जिले के कलेक्टरों को तुरंत बदलने की खबर थी। बड़ी संख्या में एडिशनल कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत विभिन्न विभागों से एआरओ बनाए जाते हैं, उन्हें भी बदला जाना था।
राज्य में 23,957 बूथ है। सभी पर एक-एक बूथ लेवल आफिसर होता। सब मिलाकर करीब 25 हजार अधिकारी, कर्मचारी आयोग के इस आदेश से 25 जनवरी तक सुरक्षित हो जाएंगे।
सरकार को किसी कलेक्टर को बदलना भी होगा तो अब आयोग को तीन नामों का पेनल भेजना होगा। वो भी कारण बताकर। उसमें भी आयोग को जो नाम उपयुक्त लगेगा, उस पर टिक लगा देगा। इसलिए, नई सरकार अब 25 जनवरी के बाद ही कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर्स के ट्रांफसर पर सोचेगी।

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