SECL प्रबंधन एक्शन में: क्या जल्द खाली होगी कोरबा सर्विस स्टेशन की जमीन?

देर से सही, बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी; अब तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड, लिमहा की अनुमतियों और पर्यावरणीय अनुपालन की जांच की मांग
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। लीज समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल पंप का संचालन आखिर किस अधिकार से जारी है? कोरबा सर्विस स्टेशन की जमीन पर अब SECL कुसमुंडा प्रबंधन की कार्रवाई आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद संपदा अधिकारी का बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस सामने आया है। देर से उठे इस कदम के बाद सबसे बड़ा सवाल है—क्या प्रक्रिया अब जमीन का कब्जा वापस लेने के परिणाम तक पहुंचेगी?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस मामले में भूमि-अधिकार, लीज और कथित निजी सौदे से जुड़े सवाल लगातार उठाता रहा है। अब SECL के दस्तावेज संबंधित पक्ष से उसके कब्जे और संचालन के अधिकार का जवाब मांग रहे हैं।
नोटिस निकला है—अब कार्रवाई का परिणाम भी दिखे
13 अक्टूबर 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट में कोरबा सर्विस स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप संचालित मिलने और लीज अवधि समाप्त होने का उल्लेख है। इसके बाद उपलब्ध कारण बताओ नोटिस में परिसर को अनधिकृत कब्जे में बताते हुए पूछा गया है कि बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई है। हालांकि, कारण बताओ नोटिस अंतिम बेदखली आदेश नहीं है। संबंधित पक्ष का जवाब, सुनवाई और सक्षम अधिकारी का निर्णय अभी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। जमीन खाली होने अथवा SECL को कब्जा वापस मिलने की पुष्टि भी बाकी है। अब प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि कार्रवाई केवल नोटिस की सुर्खी बनकर न रह जाए। सुनवाई हो, दस्तावेज परखे जाएं और निर्णय की स्थिति स्पष्ट की जाए।
पहले खाली करने का निर्देश, फिर नवीनीकरण से इनकार
SECL ने 3 सितंबर 2024 के पत्र में संबंधित भूमि और भवन खाली कर कब्जा सौंपने के लिए पत्र प्राप्ति से 30 दिन का समय दिया था। 27 जनवरी 2025 के पत्र में प्रबंधन ने भूमि की आवश्यकता बताते हुए नया अनुबंध अथवा लीज डीड देने से इनकार किया। इसी पत्र में खाली करने के निर्देश के बावजूद जमा किए गए किराये पर आपत्ति जताते हुए राशि लौटाने के लिए बैंक खाते की जानकारी मांगी गई थी। इतने स्पष्ट पत्राचार के बाद जनता को यह जानने का अधिकार है कि कार्रवाई किस वजह से लंबी चली और अब उसकी समयबद्ध परिणति क्या होगी। किसी न्यायिक आदेश का प्रभाव रहा हो तो प्रबंधन उसे भी अभिलेखों सहित स्पष्ट करे।
पंप के बाद अब तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड, लिमहा पर सवाल
ग्राम यात्रा की अगली दस्तावेजी पड़ताल तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड, लिमहा स्थित कोल वाशरी की अनुमतियों, पानी के उपयोग और पर्यावरणीय अनुपालन पर केंद्रित है। वाशरी की पर्यावरणीय स्वीकृति, स्थापना एवं संचालन की सहमति, जल उपयोग की अनुमति, जलमीटर रिकॉर्ड, अपशिष्ट जल प्रबंधन तथा कोयले और रिजेक्ट के अभिलेख क्या कहते हैं? संबंधित विभागों के निरीक्षण कब हुए और उनमें दर्ज शर्तों का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया? अनुमति है तो उसका रिकॉर्ड सामने आए। अनुपालन है तो उसका प्रमाण सामने आए। कमियां मिलती हैं तो जिम्मेदारी तय हो।
सक्षम विभाग शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन विषयों की जांच कर सकते हैं। उल्लंघन की पुष्टि होने पर लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी। फिलहाल प्रस्तुत पंप संबंधी दस्तावेजों से वाशरी की सरकारी जांच शुरू होने या वहां उल्लंघन सिद्ध होने की पुष्टि नहीं होती।
कारोबार कितना भी बड़ा हो—जवाब दस्तावेजों से देना होगा
पंप से जुड़े कथित निजी सौदे की पुष्टि के लिए भी मूल समझौते, भुगतान और संबंधित पक्षों के उत्तर जरूरी हैं। SECL की भूमि पर अधिकार का प्रश्न किसी निजी सौदे के दावे से समाप्त नहीं होता। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पंप पर जारी प्रक्रिया का परिणाम और लिमहा वाशरी से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल पाठकों के सामने रखता रहेगा।
SECL ने कदम बढ़ाया है—अब जमीन की स्थिति स्पष्ट करे। संबंधित विभाग भी वाशरी की अनुमतियों और अनुपालन का हिसाब सामने रखें। जनहित के सवालों का जवाब फाइलों में दबाकर नहीं, तथ्यों को सार्वजनिक करके दिया जाए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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