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शिक्षा के मंदिर में धमकी का साया? कनकी स्कूल की महिला प्राचार्य ने सुरक्षा की गुहार लगाई

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बी.एन. यादव पर मानसिक प्रताड़ना और बाहरी लोगों को बुलाकर धमकाने का आरोप; पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से भी हस्तक्षेप की मांग

 

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कोरबा।   जिस विद्यालय में बच्चों को अनुशासन और सम्मान का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहां महिला प्राचार्य स्वयं अपनी सुरक्षा को लेकर भय व्यक्त कर रही हैं। कनकी हायर सेकेंडरी स्कूल की प्राचार्य  शकुंतला सारथी ने 10 अक्टूबर 2026 के शिकायत पत्र में बी.एन. यादव पर मानसिक प्रताड़ना, प्रशासनिक कामकाज में बाधा और बाहरी लोगों के माध्यम से धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्राचार्य की सुरक्षा के साथ विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण पर उठे इन सवालों की तत्काल निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पुलिस अधीक्षक, कोरबा को संबोधित उपलब्ध शिकायत की प्रति पर जिला पुलिस कार्यालय की प्राप्ति मुहर दिखाई देती है। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से भी हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, इन दोनों कार्यालयों में शिकायत प्राप्त होने की अलग पावती उपलब्ध प्रति में नहीं है।

प्रभार का विवाद अब सुरक्षा के सवाल तक

शिकायत में प्राचार्य ने बताया है कि लगभग चार महीने पहले उनकी पदस्थापना हुई थी। उनके अनुसार, उस समय प्रभारी प्राचार्य रहे बी.एन. यादव ने उन्हें प्रभार नहीं दिया और अंततः जिला शिक्षा अधिकारी के हस्तक्षेप से डीडीओ प्रभार मिला।

सारथी का आरोप है कि इसके बाद भी विद्यालय में अधिकार बनाए रखने की कोशिश और लगातार शिकायतों के कारण उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। बार-बार जांच की स्थिति से पढ़ाई का वातावरण प्रभावित होने की बात भी उन्होंने पत्र में लिखी है।

प्रभार सौंपने का विवाद यदि महिला प्राचार्य को भयभीत करने तक पहुंच गया है, तो शिक्षा विभाग को केवल पत्राचार करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेने का अधिकार नहीं है। पदस्थापना और प्रभार संबंधी आदेशों की जांच कर प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

9 अक्टूबर को बाहरी लोगों से धमकाने का आरोप

पत्र का सबसे गंभीर हिस्सा 9 अक्टूबर 2026 की कथित घटना से जुड़ा है। प्राचार्य का आरोप है कि शाम लगभग चार बजे 35 से 40 पुरुषों को नशे की हालत में विद्यालय में प्रवेश कराया गया और उन्हें डराया-धमकाया गया, ताकि वह कनकी स्कूल छोड़ दें और बी.एन. यादव विद्यालय के प्रभारी बने रहें।

शिकायत के अनुसार, बी.एन. यादव ने उनके सामने इन लोगों को स्वयं बुलाने की बात कही। इस घटना के बाद प्राचार्य ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा, सम्मान और विद्यालय के शांतिपूर्ण वातावरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।  यह आरोप सत्य पाया गया तो मामला सामान्य विभागीय मतभेद से कहीं अधिक गंभीर होगा। विद्यालय में कौन आया, किसने प्रवेश कराया, वहां क्या हुआ और उस समय कौन-कौन मौजूद था—पुलिस को इन प्रश्नों के उत्तर प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध अभिलेखों से जुटाने चाहिए।

तंबाकू सेवन और स्कूल फंड संबंधी आरोप भी

प्राचार्य ने पत्र में बी.एन. यादव पर छात्रों के सामने तंबाकू और गुटखा सेवन करने तथा पढ़ाई छोड़कर अन्य कर्मचारियों के साथ समय बिताने के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने स्कूल फंड में गबन और पूर्व जांच में दोषी पाए जाने का दावा किया है।

इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित जांच रिपोर्ट, वित्तीय अभिलेख और पूर्व आदेश देखना आवश्यक है। उपलब्ध शिकायत पत्र के आधार पर गबन सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन यदि पूर्व शिकायतें और जांच रिपोर्ट मौजूद हैं, तो जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन पर क्या निर्णय लिया गया और उसका पालन हुआ या नहीं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारी जवाब दें—सुरक्षित विद्यालय सुनिश्चित कौन करेगा?

यह प्रकरण केवल दो कर्मचारियों के बीच विवाद बताकर बंद नहीं किया जाना चाहिए। शिकायत में महिला प्राचार्य की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को तत्काल सुनिश्चित करना चाहिए कि—

– प्राचार्य को शिकायत देने के कारण दबाव या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
– कथित घटना के गवाहों के बयान स्वतंत्र वातावरण में लिए जाएं और उपलब्ध CCTV, प्रवेश संबंधी अभिलेख तथा अन्य साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं।
– प्रभार, वित्तीय अनियमितता और पूर्व शिकायतों की जांच संबंधित मूल रिकॉर्ड से हो।
– विद्यालय में अनधिकृत प्रवेश रोका जाए और नियमित अध्यापन जारी रहे।
– आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं आवश्यक पुलिस कार्रवाई हो।

प्राचार्य सुरक्षा मांग रही हैं तो प्रशासन को पहले सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए; जांच का इंतजार करके भय को विद्यालय की रोजमर्रा की व्यवस्था नहीं बनने देना चाहिए। शिक्षा के मंदिर की गरिमा भाषणों से नहीं, सुरक्षित परिसर और निष्पक्ष कार्रवाई से बचती है। कलेक्टर महोदय, जिला शिक्षा अधिकारी और पुलिस प्रशासन इस शिकायत का तत्काल संज्ञान लें—तथ्य सामने लाएं और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की लिखित जानकारी दें।  यह समाचार उपलब्ध शिकायत पत्र पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। बी.एन. यादव और संबंधित विभागों का पक्ष उपलब्ध नहीं है; प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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