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वेतनमान के लिए हड़ताल की चेतावनी, कोरबा में नर्सों की फाइल पर कथित वसूली—क्या यही है स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान?

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ग्रेड-पे की मांग लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचा नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन; इधर मेडिकल कॉलेज में ₹2,000 के कथित भुगतान और जांच प्रभावित करने वाले फोन ने खोली व्यवस्था की दूसरी परत

 

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मिथलेश मरकाम पर 10 स्टाफ नर्सों को कथित व्हाट्सऐप कॉल कर बयान बदलवाने का आरोप—एक वर्ष के UPI और बैंक लेन-देन से फाइल मूवमेंट का हो मिलान

 

रायपुर/कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मरीजों की सांस थामने वाली नर्सें अब अपने अधिकारों और सम्मान के लिए शासन को हड़ताल की चेतावनी देने पर मजबूर हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ग्रेड-पे और वेतनमान की विसंगति दूर कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मिला है। एसोसिएशन ने चेताया है कि शीघ्र निर्णय नहीं होने पर प्रदेशभर के नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं।

दूसरी तरफ कोरबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में इन्हीं नर्सों के सरकारी कार्य, सर्विस रिकॉर्ड और अवकाश संबंधी फाइलों को लेकर कथित डिजिटल वसूली का मामला जांच के घेरे में है।

सवाल तीखा है

जिन नर्सों को बेहतर वेतनमान और सम्मान मिलना चाहिए, क्या उन्हीं की सरकारी फाइलें कथित भुगतान और बाबूशाही की मोहताज बन गई हैं?
जांच समिति बनी तो शुरू हुआ कथित ‘बयान बचाओ अभियान’?

 

कोरबा मेडिकल कॉलेज के डीन ने ₹2,000 के कथित ऑनलाइन भुगतान संबंधी शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच समिति गठित की और आरोपों के घेरे में आए बाबू मिथलेश मरकाम को नोटिस जारी किया है। लेकिन समिति की जांच शुरू होने से पहले ही शिकायतकर्ता पक्ष ने नया गंभीर आरोप लगाया है।

आरोप है कि मिथलेश मरकाम ने संबंधित स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मचारियों को कथित रूप से व्हाट्सऐप कॉल कर कहा—

«“कमेटी के सामने कहना कि आपने अपनी मर्जी से पैसे दिए थे और मेरे समर्थन में बयान देना।”»

यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल ₹2,000 के कथित लेन-देन का नहीं रहा। यह संभावित गवाहों को प्रभावित करने, बयान की भाषा तय कराने और जांच को मनचाही दिशा में मोड़ने के प्रयास का भी मामला हो सकता है। बयान बदला जा सकता है—डिजिटल ट्रेल नहीं

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ को शिकायतकर्ता पक्ष से ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट, चैट और संबंधित सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनकी प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच समिति अथवा वैधानिक एजेंसी को करना है। अब जांच केवल एक भुगतान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन 10 स्टाफ नर्सों से संबंधित भुगतान और सरकारी कार्यों का उल्लेख सामने आया है, उनकी बैंक-UPI प्रविष्टियों का संबंधित फाइलों से आमने-सामने मिलान कराया जाए:

– पैसा किस तारीख को और किस खाते में गया?
– उस समय संबंधित नर्स का कौन-सा सरकारी काम लंबित था?
– सर्विस बुक, चाइल्ड केयर लीव, एजुकेशन लीव अथवा अन्य फाइल किसके पास थी?
– भुगतान के बाद फाइल कितने समय में आगे बढ़ी?
– क्या कोई वैधानिक सरकारी रसीद जारी हुई?
– खबर अथवा शिकायत के बाद रकम वापस की गई?
– जांच समिति बनने के बाद किस-किस नर्स को फोन किया गया?

यदि पैसे देने वालों के काम तेजी से हुए और रकम नहीं देने वालों की फाइलें महीनों रुकी रहीं, तो यही समयरेखा कथित वसूली की सबसे मजबूत कड़ी बन सकती है। एक वर्ष के कर्मचारी-संबंधित लेन-देन की हो विधिसम्मत जांच. सक्षम प्राधिकारी को मिथलेश मरकाम से जुड़े संबंधित बैंक खातों और UPI माध्यमों के पिछले एक वर्ष के कर्मचारी-संबंधित लेन-देन का कानूनसम्मत परीक्षण कराना चाहिए।

जांच का उद्देश्य निजी बैंकिंग जानकारी सार्वजनिक करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि:

– अस्पताल के किन कर्मचारियों ने रकम भेजी;
– भुगतान के समय उनका कौन-सा काम लंबित था;
– क्या समान सरकारी कार्यों के लिए समान रकम ली गई;
– क्या रकम किसी तीसरे व्यक्ति के खाते में मंगाई गई;
– और शिकायत के बाद कितना पैसा लौटाया गया।

यदि रकम वास्तव में निजी उधारी अथवा स्वैच्छिक सहयोग थी तो उसका उद्देश्य, बातचीत और वापसी का दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सकता है। केवल “अपनी मर्जी से पैसे दिए” कहना पर्याप्त उत्तर नहीं होगा। नर्सों को वेतनमान भी चाहिए और वसूली-मुक्त व्यवस्था भी नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन की वेतनमान संबंधी लड़ाई और कोरबा मेडिकल कॉलेज का कथित वसूली प्रकरण अलग-अलग घटनाएं हैं। फिर भी दोनों एक साझा सच्चाई की ओर संकेत करते हैं—स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली नर्सें आर्थिक विसंगति, लंबित फाइलों और प्रशासनिक दबाव से जूझ रही हैं।

प्रदेश सरकार को केवल हड़ताल टालने के लिए आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध निर्णय देना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी नर्स की सर्विस बुक, अवकाश, वेतन या एरियर्स की फाइल कथित भुगतान अथवा निजी कृपा पर निर्भर न रहे।

जांच की निष्पक्षता के लिए तत्काल कदम जरूरी

– सभी 10 नर्सों के बयान अलग-अलग और गोपनीय वातावरण में लिए जाएं।
– उन्हें प्रतिशोध, फाइल रोकने और प्रशासनिक प्रताड़ना से लिखित सुरक्षा मिले।
– उपलब्ध UPI, चैट, स्क्रीनशॉट और कथित रकम-वापसी का सत्यापन हो।
– फाइल मूवमेंट और भुगतान की तारीखों का मिलान कराया जाए।
– जांच प्रभावित करने वाले कथित कॉल की स्वतंत्र जांच हो।
– आरोपों से जुड़े कर्मचारी को जांच तक संवेदनशील स्थापना एवं अवकाश फाइलों से अलग रखा जाए।
– प्रथमदृष्टया तथ्य मिलने पर मामला सक्षम भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी को सौंपा जाए।

सरकार से सीधा सवाल

क्या नर्सों को उनका न्यायसंगत वेतनमान मिलेगा?

क्या कोरबा मेडिकल कॉलेज की नर्सें बिना कथित भुगतान के अपना वैधानिक सरकारी काम करा पाएंगी?

क्या जांच समिति बैंकिंग रिकॉर्ड और फाइलों का मिलान करेगी—या कथित रूप से रटवाए जा रहे “अपनी मर्जी से पैसे दिए” वाले बयान को ही अंतिम सच मान लेगी?

वेतनमान के लिए सड़क पर उतरने की चेतावनी और सरकारी फाइल के लिए कथित डिजिटल भुगतान—स्वास्थ्यकर्मियों के सम्मान पर लगा यह दोहरा घाव अब सरकार से निर्णायक जवाब मांग रहा है।

संपादक—अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

«संपादकीय स्पष्टीकरण: मिथलेश मरकाम और कथित भुगतान से संबंधित विवरण शिकायतकर्ता पक्ष से प्राप्त सामग्री पर आधारित तथा जांचाधीन आरोप हैं। किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी घोषित नहीं किया गया है। बैंक और डिजिटल रिकॉर्ड का परीक्षण केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया से किया जाना चाहिए। संबंधित सभी पक्षों का तथ्यात्मक जवाब आमंत्रित है।»

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